1जिन को ईश्वर और मनुष्यों का प्रेम प्राप्त था: वह मूसा थे, जिनकी स्मृति धन्य है। 2उसने उन्हें सन्तों-जैसी महिमा प्रदान की और उन्हें महान् शत्रुओें के लिए भीषण बनाया। उसने उनके कहने पर तुरन्त महान् चमत्कार दिखाये 3और उन्हें राजाओें की दृष्टि में महिमान्वित किया। उसने उन्हें अपनी प्रजा के लिए आज्ञाएँ दीं और उनके लिए अपनी महिमा प्रकट की। 4उसने उनकी निष्ठा और विनम्रता के कारण उनका अभिषेक किया। और सब शरीरधारियों में से उन को चुना। 5उसने उन को अपनी वाणी सुनायी और उन्हें घने बादल में बुलाया। 6उसने उन्हें आमने-सामने अपनी आज्ञाएँ, जीवन और ज्ञान की संहिता प्रदान की, जिससे वह याकूब को प्रभु के विधान की और इस्राएल को उसके निर्णयों की शिक्षा दें। 7उसने मूसा के भाई लेवीवंशी हारून को इसी तरह पवित्र और प्रतिष्ठित किया। 8उसने चिरस्थायी विधान के रूप में उन्हें प्रजा का पुरोहित बनाया, उन्हें सुन्दर परिधान दे कर प्रसन्न किया। 9और महिमामय वस्त्र पहनाये। उसने उन्हें अपूर्व आभूषण दिये और उन्हें अधिकार सूचक चिन्हों से अलंकृत किया। 10उसने उन्हें जाँघिया, कुरता और एफोद दिया। उसने उनके चारों ओर अनार और सोने की अनेक घण्टियाँ लगवायी, 11जो उनके चलते समय टनटनायें और उनके मन्दिर में प्रवेश करने पर सुनाई पड़े, जिससे उसकी प्रजा के पुत्र सावधान रहें। 12उसने उनके लिए कलाकार द्वारा सोने के तारों का, नीले और बैगनी रंग का पवित्र वस्त्र सिलवाया। इसके अतिरिक्त कमरबन्द और वक्षपेटिका में ऊरीम और तुम्मीम। 13शिल्पकार द्वारा बटी हुई छालटी से बनायी वक्षपेटिका में नक़्क़ाषी किये हुये सोने के खाँचों में इस्राएल के बारह वंशों की संख्या के अनुसार अक्षरों से अंकित मणियाँ सुशोभित थीं। 14उनकी पगड़ी पर एक स्वर्ण मुकुट था, जिस पर अभिषेक की मुहर अंकित थी। वह कलाकृति सम्मान का प्रतीक थी, नयनाभिराम और अलंकृत। 15उनके पूर्व इतनी सुन्दर वस्तुएँ कभी नहीं हुई 16और बाद में कोई विदेशी उन्हें कभी नहीं पहनेगा। उनके पुत्र ही उन्हें पहनेंगे और उनके बाद अनन्त काल तक उनके वंशज। 17उनकी बलियाँ अनन्त काल तक प्रतिदिन दो बार भस्म कर दी जायेंगी। 18मूसा ने उन्हें याजक के रूप में नियुक्त कर उनका अभिषेक पवित्र तेल से किया। 19यह उनके लिए और उनके वंशजों के लिए एक चिरस्थायी विधान था: जब तक आकाश बना रहेगा, वे याजक का कार्य सम्पन्न करेंगे और प्रभु के नाम पर प्रजा को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। 20उसने उन्हें सभी लोगों में से चुना, जिससे वह प्रभु को होम-बलि, लोबान एवं सुगन्धयुक्त अन्न-बलि चढ़ायें और प्रजा के लिए प्रायश्चित-विधि सम्पन्न करें। 21उसने उन्हें अपने आदेश सुनाये और संहिता की व्याख्या का अधिकार दिया, जिससे वह याकूब को उसके नियमों की शिक्षा दे, और इस्राएल को उसकी संहिता के विषय में ज्योति प्रदान करें। 22एक अन्य वंश के लोगों ने उनके विरुद्ध विद्रोह किया और मरुभूमि में उन से ईर्ष्या प्रकट की: वे दातान, अबिराम और कोरह के दल थे, जो कु्रद्ध हो कर उनके विरुद्ध खड़े हो गये। 23प्रभु ने यह देखा और यह उसे अप्रिय लगा, उसका क्रोध भड़क उठा और उनका विनाश हुआ। 24उसने उनके विरुद्ध चमत्कार दिखाये और उन्हें अपनी धधकती आग में भस्म किया। 25उसने हारून का यश और बढ़ाया और उन्हें एक दायभाग प्रदान किया। उसने उन्हें खेतों के प्रथम फल दिलाये 26और उन्हें भरपूर भोजन प्रदान किया; क्योंकि वे प्रभु को अर्पित बलिदान खायेंगे; जिन्हें उसने हारून और उनके वंशजों को दिया। 27किन्तु प्रजा की भूमि में उन्हें विरासत नहीं मिली, प्रजा की तरह उन्हें कोई भाग नहीं मिला; क्योंकि प्रभु स्वयं उनका भाग और उनकी विरासत है। 28एलआज़ार के पुत्र पीनहास तीसरे यशस्वी व्यक्ति हैं। उन्होनें प्रभु के लिए उत्साह का प्रदर्शन किया 29ओैर अपनी उदारता और साहस से इस्राएल पर से प्रभु का का्रेध दूर किया। 31यूदावंशी यिशय के पुत्र दाऊद के लिए जेा विधान निर्धारित किया गया, उसके अनुसार राजा का उत्तराधिकार उनके पुत्रों में एक को मिलता है, जब कि हारून का उत्तराधिकार उनके सभी वंशजों को मिलता है। प्रजा का उचित रीति से न्याय करने के लिए प्रभु आपके हृदयों को प्रज्ञा प्रदान करें, जिससे आपकी समृद्धि लुप्त न हो और आपका यष पीढ़ियों तक बना रहे!