प्रवक्ता

अध्याय 46

1नून के पुत्र योशुआ शूरवीर योद्धा थे और भविष्यवक्ता के रूप में मूसा के उत्तराधिकारी। वह अपने नाम के अनुरूप 2प्रभु के चुने हुए लोगों के महान् उद्धारक बने। उन्होंने इस्राएल को उसकी विरासत दिलाने के लिए आक्रामक शत्रुओें को दण्ड दिया। 3उन्होंने कितना यश कमाया, जब वह अपने हाथ उठाते और नगरों के विरुद्ध तलवार खींचते थे। 4कौन उनके विरुद्ध टिक सका? क्योंकि वह प्रभु के युद्ध लड़ते थे। 5क्या सूर्य उनके हाथ से नहीं रोका गया और एक दिन दो दिनों के बराबर नहीं बना? 6जब शत्रु उन पर चारों ओर से टूट पड़े, तो उन्होंने सर्वोच्च प्रभु की दुहाई दी। प्रभु ने उनकी प्रार्थना सुनी और ओले के बड़े-बड़े पत्थरों की वर्षा की। 7वे शत्रु-सेना पर टूट पड़े और उन्होंने ढाल पर उतरने वालों का विनाश किया, 8जिससे राष्ट्र जान जायें कि उनके शस्त्र कितने शक्तिशाली हैं; क्येांकि योशुआ प्रभु के लिए लड़ते थे और सर्वशक्तिमान् का अनुगमन करते थे। 9मूसा के दिनों में वह ईमानदार बने रहे और उन्होंने यफुन्ने के पुत्र कालेब के साथ समुदाय का विरोध किया, प्रजा को पाप करने से रोका और उनका दुष्टतापूर्ण भुनभुनाना समाप्त किया। 10इसलिए छः लाख सैनिकों में ये दो बचे और उन्होंने उस विरासत में प्रवेश किया, जहाँ दूध और मधु की नदियाँ बहती हैं। 11प्रभु ने कालेब को बल प्रदान किया, जो उनकी वृद्धावस्था तक बना रहा। वे पहाड़ी प्रदेश में बस गये, जहाँ उनके वंशजों को विरासत मिली, 12जिससे सभी इस्राएली यह जान जाये कि प्रभु का अनुगमन करना कितना अच्छा है। 13प्रत्येक न्यायकर्ता ने नाम कमाया; उन में एक का भी मन विचलित नहीं हुआ। वे प्रभु से विमुख नहीं हुए। 14धन्य है उनकी स्मृति! उनकी हड्डियाँ अपने स्थान पर फिर खिल उठें, 15इन यशस्वी पुरुषों के पुत्रों द्वारा उनका नाम फिर चमके! 16समूएल प्रभु के कृपापात्र और नबी थे। उन्होंने राजत्व की स्थापना की और अपनी जाति के शासकों का अभिषेक किया। 17वह प्रभु की संहिता के अनुसार सभा में न्याय करते थे और प्रभु की कृपादृष्टि याकूब पर बनी रही। वह अपनी ईमानदारी द्वारा सच्चे नबी 18और अपने शब्दों द्वारा सच्चे दृष्टा प्रमाणित हुए। 19जब उनके शत्रुओें ने उन पर चारों ओर से आक्रमण किया, तो उन्होंने सर्वशक्तिमान् प्रभु से प्रार्थना की और उसे दूध पीने वाला मेमना अर्पित किया। 20प्रभु ने आकाश में मेघगर्जन उत्पन्न किया और उसकी वाणी का महानाद सुनाई पड़ा। 21उसने तीरुस के सेनापतियों का और सभी फिलिस्तीनी नेताओें का विनाश किया। 22उन्होंने अपनी चिरनिद्रा के पहले ही, प्रभु और उसके अभिषिक्त को साक्षी बना कर कहा:"मैने कभी किसी का कुछ नहीं लिया, यहाँ तक कि किसी की चप्पल तक नहीं‘। उस समय किसी ने उन पर अभियोग नहीं लगाया। 23उन्होंने मरने के बाद भी भविष्यवाणी की और राजा को उसकी मृत्यु की सूचना दी। उन्होंने प्रजा की दुष्टता दूर करने के लिए पृथ्वी की गोद में से अपनी वाणी सुनायी।