1मोआब के विषय में दिव्य वाणी। एक ही रात में अर-मोआब उजाड़ा और नष्ट किया गया! एक ही रात में किर-मोआब उजाड़ा और नष्ट किया गया! 2लोग विलाप करने के लिए पहाड़ पर अवस्थित दीबोन के मन्दिर जाते हैं; नेबों पर और मेदेबा में मोआब शोक मानाता है। सबों के सिर मूँड़े गये, सबों की दाढ़ी कट गयी। 3सड़कों पर सब शोक के वस्त्र पहने हैं। लोग छतों पर और चैकों में विलाप करते और आँसू बहाते हैं। 4हेशबोन और एलआले दुहाई देते हैं, उनकी आवाज़ यहज़ तक सुनाई पड़ती है। मोआब के सैनिक चिल्लाते हैं, उनका साहस टूट गया है। 5मेरा हृदय मोआब के लिए रोता है: उसके शरणार्थी सोअर तक, एगलत-शलिशीया तक भागते हैं। वे रोते हुए लूहीत की ओर चढ़ रहे हैं। वे होरोनईम के मार्ग पर अपने विनाश पर विलाप करते हैं। 6निम्रीम के जलाशय सूख गये हैं। घास जल गयी और पेड़-पौधे कुम्हला गये। कुछ भी हरियाली शेष नहीं। 7इसलिए वे अपनी बची हुई सम्पत्ति मजनूँ नाले के उस पार ले जा रहे हैं। 8मोआब भर में उनकी पुकार सुनाई पड़ती है। उनके विलाप की आवाज एगलैम तक, बएर-एलीम तक सुनाई पड़ती है। 9दीमोन के जलाशय रक्त से भर गये हैं, किन्तु मैं दीमोन पर और विपत्तियाँ भेजूँगा। मैं मोआब के शरणार्थियों पर और देश में बचे हुए लोगों पर एक सिंह छोडूँगा।