1निर्जन प्रदेश के सेला नगर से देश के शासक का मेमना सियोन की पुत्री के पर्वत के पास भेजो। 2अरनोन नदी के घाटों पर मोआब की स्त्रियाँ नीड़ से भगायी हुई चिड़ियों-जैसी हैं। 3वे कहती हैं, “परामर्श के बाद निर्णय कीजिएः दुपहरी में हमें रात-जैसा अँधेरा दीजिए। निराश्रय लोगों को छिपाइए, शराणार्थियों के साथ विश्वासधात न कीजिए। 4मोआब के शरणार्थियों को अपने साथ रहने दीजिए। विनाश करने वाले से उनकी रक्षा कीजिए।“ जब अत्याचार और विनाश समाप्त होगा और आक्रमणकारी देश से लुप्त हो जायेगा, 5तो प्रेम के आधार पर दाऊद के तम्बू में एक सिंहासन प्रतिष्ठित किया जायेगा और उस पर एक निष्ठावान् और न्यायप्रिय व्यक्ति विराजमान हागा, जो सब को न्याय दिलायेगा। 6हमने मोआब के असीम अहंकार, अक्खड़पन, घमण्ड और गर्व के विषय में सुना; किन्तु उसकी डींग व्यर्थ है। 7अब मोआब मोआब पर विलाप कर रहा है, सभी मोआबी रो रहे हैं। वू पूर्णतः निराश हो कर कीर-हरेसेत की किशमिश टिकियों के लिए आह भर रहे हैं; 8क्योंकि हेशबोन के खेत और सिबमा की दाखबरियाँ कुम्हला रही हैं। वे यज़ेर तक, उजाड़खण्ड तक फैली थीं। उनकी दाखलताएँ समुद्र के उस पार बढ़ गयी थीं। उनकी अंगूरी पी कर राष्ट्रों के शासक लड़खड़ा कर गिर जाते थे। 9इसलिए मैं यजे़र की तरह सिबमा की दाखबारियों के लिए रोता हूँ। हेशबोन और एलआले! मैं तुम को अपने आँसुओं से सींचता हूँ; क्योंकि वे आनन्द के गीत अब नहीं सुनाई पड़ते, जो तुम्हारे फलों और फ़सलों के विषय में गाये जाते थे। 10घाटियों में हर्षध्वनि लुप्त हो गयी है, दाखबारियों में उल्लास और जयकार नहीं सुनाई पड़ता; रसकुण्डों में अंगूर नहीं पेरे जाते हैं, आनन्द के गीत बन्द हो गये हैं। 11मेरा मन मोआब के लिए, मेरा हृदय किर-हेरेस के लिए वीणा के तारों की तरह काँपता है। 12मोआब अपने पहाड़ी पूजास्थान की तीर्थयात्रा करेगा और अपने मन्दिर में प्रार्थना करेगा, किन्तु उस से उसे कोई लाभ नहीं होगा। 13यह मोआब के विषय में प्रभु की पुरानी दिव्य वाणी है। 14अब प्रभु यह कहता है, “ठीक तीन वर्षों के बाद मोआब का वैभव समाप्त किया जायेगा और उसकी विशाल जनसंख्या का अवशेष नगण्य होगा“।