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38. पेन्तेकोस्त का इतवार (दिन)

प्रेरित चरित 2:1-11; 1 कुरिन्थियों 12:3ब-7, 12-13; योहन 20:19-23

(फादर सौंदरा राजन)


एक अंग्रेज नवयुवक अपने अमरीकी दोस्त से मिलने गया। उस दोस्त ने अपने देश की विभिन्न जगहों को दिखाकर अपने देश की गरिमा का वर्णन किया। चलते-चलते वे नियाग्रा जलप्रपात के पास पहुँचे। अमरीकी युवक ने अपने दोस्त को जलप्रपात की ओर इशारा करते हुए कहा, ’’यह सारी दुनिया की सबसे बड़ी ऐसी शक्ति है जिसका उपयोग किसी भी कार्य के लिये नहीं किया जा रहा है।’’ नियाग्रा जलप्रपात को देखने के लिए कई लोग जाते हैं और यह सच भी है कि वह एक बहुत बड़ी प्राकृतिक शक्ति है। इसे देखकर लोग अचम्भें में पड़ जाते हैं। जिसको ख्रीस्तीय शिक्षा मिली है या जो ईश्वर की प्रेरणा से प्रेरित है उसे यह बराबर मालूम है कि इस दुनिया में मौजूद सबसे बड़ी ऐसी ताकत जिसका उपयोग नहीं किया जा रहा है वह नियाग्ररा जलप्रपात नहीं बल्कि पवित्र आत्मा है।

आज हम पेंतेकोस्त का त्योहार मना रहे हैं। यह पवित्र आत्मा के आगमन का त्योहार है। आज के दिन हम उस घटना की याद करते हैं जब प्रार्थनारत माता मरियम एवं प्रभु के चेलों के ऊपर आग की जीभों के रूप में पवित्र आत्मा का आगमन हुआ था। इस घटना के फलस्वरूप प्रभु येसु के मुक्ति कार्य, जिसे प्रेरित आगे बढ़ा रहे थे, में बहुत बड़ा मोड़ आ गया। पवित्र आत्मा प्रेरितों को जगह-जगह पहुँचाकर प्रभु की मुक्ति योजना की घोषणा कराते हैं। पवित्र आत्मा की कृपा से प्रेरित निडर होकर स्वर्ग राज्य का प्रचार-प्रसार करते हैं। अपने ऊपर अत्याचार करने वालों को वे क्षमा करते हैं और उत्पीड़न के समय हिम्मत के साथ प्रभु के लिए सब कुछ सह लेते हैं। उनके लिए पवित्र आत्मा एक ऐसी शक्ति थी जो उन्हें समय-समय पर मार्गदर्षन दे रहे थे।

लेकिन यह सच है कि हम में से कई लोग इस शक्ति को न परखते और न पहचानते हैं। शायद हम बैचेन रहते हैं। हमारी इच्छा के अनुसार चीज़ें प्राप्त होने के बावजूद भी, परिस्थितियों में परिवर्तन आने के बावजूद भी हमारी बैचेनी दूर नहीं होती है। किसी ने मुझे अपने कमरे में एक नये टेलीविजन को दिखाकर कहा कि, ’’यह बहुत अच्छा टेलीविज़न है और इसमें करीब दौ सौ चैनल देख सकते हैं’’। मैने उनसे पूछा, ’’आप कौन-सा चैनल देखते हैं?’’ तब उसने उत्तर दिया, ’’देखने लायक कुछ भी नहीं है।’’ आज के समुदाय में कई लोग इसी प्रकार के अनुभवों के शिकार हैं। एक प्रकार की बैचेनी और असंतुष्टि उनके ऊपर मंडराती रहती है। शायद प्रभु की मृत्यु के बाद पवित्र आत्मा के आगमन तक प्रेरितों ने भी इसी प्रकार की बैचेनी और असंतुष्टि का अनुभव किया होगा।

पवित्र आत्मा के आगमन से कलीसिया की शुरूआत होती है। पवित्र आत्मा ने विश्वासी व्यक्तियों को समुदाय का रूप देकर उन्हें एकता महसूस करायी और उनके बीच के रिष्ते को दिन प्रतिदिन मजबूत बनाया। कलीसिया पिछली इक्कीस सदियों से जिन कठिनाईयों तथा संकटों से गुजरी है उनका अध्ययन करने पर हम अवश्य ही यह मानेंगे कि यह ईश्वरीय कृपा से ही संभव हुआ है। पवित्र आत्मा के आगमन के लिए बड़ी तैयारी की ज़रूरत थी। प्रभु ने उनको आदेश दिया था कि वे एक साथ प्रार्थनामय वातावरण में पवित्र आत्मा की प्रतीक्षा करे। ईश वचन हमें यह बताता है कि जब पवित्र आत्मा का आगमन हुआ तब माता मरियम के साथ शिष्य एकत्रित थे। ख्रीस्तीय जीवन को बिताने के लिए पवित्र आत्मा की बड़ी ज़रूरत है। प्रभु येसु का जन्म पवित्र आत्मा की शक्ति से हुआ था। पवित्र आत्मा की प्रेरणा तथा शक्ति का प्रभु ने अपने सार्वजनिक कार्यों में लगातार अनुभव किया। हम ने भी दृढ़ीकरण संस्कार में पवित्र आत्मा को स्वीकार किया है। शायद उसी बड़ी शक्ति को हमने भी ठीक से नहीं पहचाना है।

पवित्र आत्मा कई ख्रीस्तीय भाई-बहनों के लिए अपरिचित ईश्वर है। आज का दूसरा पाठ हमें यह बताता है कि कोई भी पवित्र आत्मा के प्रभाव के बिना यह नहीं कह सकता कि येसु प्रभु है। पवित्र आत्मा ही कलीसिया में विभिन्न प्रकार के सेवा कार्य के लिए प्रेरणा एवं शक्ति देते हैं। पवित्र आत्मा ही कई व्यक्त्यिों को जोड़कर कलीसिया रूपी समुदायों में येसु के शरीर को रूप देते हैं। उत्पत्ति ग्रंथ अध्याय 11 में हम पढ़ते हैं कि मनुष्य ने घमण्डी बनकर बाबुल में मिनार बनाकर ईश्वर के विरुद्ध पाप किया इस पर ईश्वर ने उनकी भाषा में ऐसी उलझन पैदा की कि वे एक दूसरे को समझने में असमर्थ हो गये। इसके ठीक विपरीत जब माता मरियम और प्रेरितगणों ने ईश्वर के सामने विनम्र बनकर पवित्र आत्मा की कृपा को प्राप्त किया तो दुनिया के विभिन्न देषों से आये हुए विभिन्न भाषा बोलने वाले लोग प्रेरितों की बातें अपनी-अपनी भाषा में समझने लगे। पवित्र आत्मा एकता की आत्मा है। जब कभी हम एकता की कमी महसूस करते हैं चाहे वह कलीसियाई समुदायों के बीच में हो, व्यक्तियों के बीच में हो, दिलों के बीच में हो, एक परिवार में ही हो या फिर अपने ही अंदर हो यह सब पवित्र आत्मा की अनुपस्थिति और अनुभव की कमी के कारण ही है।

आज हम इसलिये हमारे पल्ली समुदाय, कलीसिया तथा परिवारों की एकता को कायम रखने के लिए ईश्वर से पवित्र आत्मा की कृपा माँगे।


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