अनुवाक्य : हे प्रभु, मेरे अपराधों को क्षमा कर।
• तू मेरे अपराधों और जवानी के पापों को याद न कर। (स्तोत्र 25:7)
• प्रभु! अपनी भलाई और सत्यप्रतिज्ञता के अनुरूप मेरी सुधि ले। (स्तोत्र 25:7)
• प्रभु! अपने नाम के अनुरूप मेरा अपराध क्षमा कर, हालाँकि वह भारी है। (स्तोत्र 25:11)
• मुझ पर दयादृष्टि कर, मुझ पर दया कर; क्योंकि मैं अकेला और दुःखी हूँ। (स्तोत्र 25:16)
• मेरे शोकसन्तप्त हृदय को सान्त्वना दे और मुझे यातनाओं से मुक्त कर। (स्तोत्र 25:17)
• मेरी दुर्गति और कष्ट पर ध्यान दे, मेरे सब पाप क्षमा कर। (स्तोत्र 25:18)
• मेरे जीवन की रक्षा कर, मेरा उद्धार कर। मैं तेरी शरण आया हूँ, मुझे निराश न कर। (स्तोत्र 25:20)
• प्रभु! मेरी पुकार पर ध्यान दे। मुझ पर दया कर मेरी सुन। (स्तोत्र 27:7)
• प्रभु! मेरी सुन, मुझ पर दया कर। प्रभु! मेरी सहायता कर।’’ (स्तोत्र 30:11)
• प्रभु! मैं तेरी शरण आया हूँ। मुझे कभी निराश न होने दे। (स्तोत्र 31:1)
• मेरी सुन, मुझे शीघ्र छुड़ाने की कृपा कर। (स्तोत्र 31:3)
• प्रभु! मुझ पर दया कर, क्योंकि मैं संकट में हूँ। (स्तोत्र 31:10)
• मेरी आँखें शोक से धुँधली हो गयी हैं, मेरी आत्मा और मेरा शरीर सन्तप्त हैं। (स्तोत्र 31:10)
• मेरा जीवन दुःख में बीत रहा है और मेरे वर्ष आहें भरने में। (स्तोत्र 31:11)
• मेरी दुर्गति के कारण मेरी शक्ति क्षीण हो गयी है। और मेरी हड्डियाँ गल रही हैं। (स्तोत्र 31:11)
• अपने सेवक पर दयादृष्टि कर। तू दयासागर है, मेरा उद्धार कर। (स्तोत्र 31:17)
• प्रभु! मैं तुझे पुकारता हूँ; मुझे निराश न होने दे। (स्तोत्र 31:18)
• मैंने तेरे सामने अपना पाप स्वीकार किया, मैंने अपना दोष नहीं छिपाया। (स्तोत्र 32:5)
• मैंने कहा, ’’मैं प्रभु के सामने अपना अपराध स्वीकार करूँगा’’। (स्तोत्र 32:5)
• प्रभु! क्रुद्ध हुए बिना मुझे दण्ड दे, कोप किये बिना मेरा सुधार कर। (स्तोत्र 38:1)
• तेरे क्रोध के कारण मेरा सारा शरीर क्षत-विक्षत है, मेरे पाप के कारण मेरी समस्त हड्डियाँ छीज रही हैं। (स्तोत्र 38:4)
• मेरे अपराधों का ढेर मेरे सिर से भी ऊँचा हो गया है, भारी बोझ की तरह मैं उन्हें ढोने में असमर्थ हूँ।(स्तोत्र 38:5)
• मेरी मूर्खता के कारण मेरे घावों में पीब पड़ गयी और उन से दुर्गन्ध आती है। (स्तोत्र 38:6)
• मैं अपना अपराध स्वीकार करता हूँ, अपने पाप के कारण अशान्त हूँ। (स्तोत्र 38:19)
• प्रभु! मेरी प्रार्थना और मेरी पुकार सुन, मेरे आँसुओं पर ध्यान दे। (स्तोत्र 39:13)
• मैं दरिद्र और निस्सहाय हूँ, प्रभु मेरी सुधि लेता है। (स्तोत्र 40:18)
• तू ही मेरा सहायक और उद्धारक है। मेरे ईश्वर! विलम्ब न कर। (स्तोत्र 40:18)
• ’प्रभु! मुझ पर दया कर, मुझे चंगा कर, क्योंकि मैंने तेरे विरुद्ध पाप किया है।’’ (स्तोत्र 41:5)
• मुझ पर दया कर। ईश्वर! मुझ पर दया कर। मैं तेरी शरण आया हूँ। (स्तोत्र 57:1)