अनुवाक्य : हे प्रभु, हम पर दया कर।
• हे प्रभु, हमारे पापों के कारण तूने हमारे लिए प्राणपीड़ा महसूस की।
• हे प्रभु, हमारे पापों के कारण तूने हमारे लिए रक्त का पसीना बहाया।
• हे प्रभु, हमारे पापों के कारण तू कोडों से मारा गया।
• हे प्रभु, हमारे पापों के कारण तुझे काँटों का मुकुट पहनाया गया।
• हे प्रभु, हमारे पापों के कारण तेरा उपहास किया गया।
• हे प्रभु, हमारे पापों के कारण तेरा अपमान किया गया।
• हे प्रभु, हमारे पापों के कारण तुझे क्रूस पर मृत्यु स्वीकार करनी पडी।
• हे प्रभु, हमारे अपराधों के कारण तू बार-बार धरती पर गिरा।
• हे प्रभु, हमारे अपराधों के कारण तेरे हाथ-पैरों पर कीले ठोके गये।
• हे प्रभु, हमारे अपराधों के कारण तेरे बगल को छेदा गया।
• हे प्रभु हमारे अपराधों के कारण तुझे बडी वेदना महसूस हुयी।
• हे प्रभु, हमारे अपराधों के कारण तू घायल किया गया।
• हे प्रभु, हमारे गुनाहों के कारण तेरे कपडे उतारे गये।
• हे प्रभु, हमारे गुनाहों के कारण तूने मारने वालों के सामने अपनी पीठ कर दी (इसायाह 50:6)।
• हे प्रभु, हमारे गुनाहों के कारण तूने दाढी नोचने वालों के सामने अपना गाल कर दिया (इसायाह 50:6)।
• हे प्रभु, हमारे गुनाहों के कारण तूने अपमान करने और थूकने वालों से अपना मुख नहीं छिपाया (इसायाह 50:6)।
• हे प्रभु, हमारे गुनाहों के कारण तेरी आकृति इतनी विरूपित की गयी थी कि तू मनुष्य नहीं जान पडता था।
• हे प्रभु, हमारे कुकर्मों के कारण तू मनुष्यों द्वारा निन्दित और तिरस्कृत बन गया (इसायाह 53:3)
• हे प्रभु, हमारे कुकर्मों के कारण तू छेदित किया गया (इसायाह 53:5)
• हे प्रभु, हमारे कुकर्मों के कारण तेरी गिनती कुकर्मियों में हुयी (इसायाह 53:12)
• हे प्रभु, हमारे कुकर्मों के कारण तेरी कब्र विधर्मियों के बीच बनायी गयी (इसायाह 53:9)
• हमारी मुक्ति के लिए तू अपने ऊपर किये हुए अत्याचारों को धैर्यपूर्वक सहता गया (इसायाह 53:7)
• हे प्रभु, तूने हमारे रोगों को अपने ऊपर ले लिया। (इसायाह 53:4)