जयेसु प्रार्थना संसाधन

स्तोत्र 130

अनुवाक्य : हे प्रभु अपनी करुणा से मेरी पुकार सुन।

  • प्रभु! गहरे गर्त में से मैं तेरी दुहाई देता हूँ।
  • प्रभु! मेरी पुकार सुन, मेरी विनती पर ध्यान दे।
  • प्रभु! यदि तू हमारे अपराधों को याद रखेगा, तो कौन टिका रहेगा?
  • तू पापों को क्षमा करता है, इसलिए लोग तुझ पर श्रद्धा रखते हैं।
  • मैं प्रभु की प्रतीक्षा करता हूँ। मेरी आत्मा उसकी प्रतिज्ञा पर भरोसा रखती है।
  • भोर की प्रतीक्षा करने वाले पहरेदारों से भी अधिक मेरी आत्मा प्रभु की राह देखती है।
  • इस्राएल! प्रभु पर भरोसा रखो; क्योंकि दयासागर प्रभु उदारतापूर्वक मुक्ति प्रदान करता है।
  • वही इस्राएल का उसके सब अपराधों से उद्धार करेगा।

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Praise the Lord!