प्रवक्ता 43:29-37 “हम कहाँ तक कहें! उसके महान् कार्यों का अन्त नहीं। हम अन्त में यह कहते हैं : ''वहीं सब कुछ है!'' (30) हम उसकी महिमा का वर्णन करने में असमर्थ हैं; क्योंकि वह अपने कार्यों से कहीं अधिक महान् है। (31) प्रभु भीषण और अत्यधिक महान् है, उसका सामर्थ्य आष्चर्यजनक है। (32-33) शक्ति भर प्रभु की महत्ता गाओ, क्योंकि वह तुम्हारी स्तुति के परे है। उसकी महिमा श्लाय हैं। (34) पूरी शक्ति लगा कर उसकी स्तुति करते जाओ। तुम उसका पूरा-पूरा वर्णन नहीं कर पाओगे। (35) किसने उसे देखा, जो उसका वर्णन कर सके? कौन उसके महत्व के अनुसार उसकी महिमा कर सकता है? (36) जो दिखता, उस से कहीं अधिक अप्रकट है; क्योंकि हमने उसके कार्यों में से कुछ को ही देखा है। (37) प्रभु ने सब कुछ बनाया है और भक्तों को प्रज्ञा का वरदान दिया है।“
इसायाह 43:21 “ मैंने यह प्रजा अपने लिए बनायी है। यह मेरा स्तुतिगान करेगी।“
यिरमियाह 16:16 “अँधेरा होने से पहले ही, इस से पहले कि अन्धकारमय पहाड़ियों पर तुम्हारे पैर ठोकर खायें, तुम अपने प्रभु-ईश्वर की स्तुति करो। तुम प्रकाश की प्रतीक्षा करो, किन्तु वह उसे घोर अन्धकार में बदलता और उसे काला बादल बना देता है।“
योहन 4:23 “वह समय आ रहा है, आ ही गया है, जब सच्चे आराधक आत्मा और सच्चाई से पिता की आराधना करेंगे। पिता ऐसे ही आराधकों को चाहता है।“
कलोसियों 3:16 “मसीह की शिक्षा अपनी परिपूर्णता में आप लोगों में निवास करें। आप बड़ी समझदारी से एक दूसरे को शिक्षा और उपदेश दिया करें। आप कृतज्ञ हृदय से ईश्वर के आदर में भजन, स्तोत्र और आध्यात्मिक गीत गाया करें।“