जयेसु प्रार्थना संसाधन

पुत्र ईश्वर के आदर में

योहन 5:19-30 “ईसा ने उन से कहा, ‘‘मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ- पुत्र स्वयं अपने से कुछ नहीं कर सकता। वह केवल वही कर सकता है, जो पिता को करते देखता है। जो कुछ पिता करता है, वह पुत्र भी करता है; (20) क्योंकि पिता पुत्र को प्यार करता है, और वह स्वयं जो कुछ करता है, उसे पुत्र को दिखाता है। वह उसे और महान् कार्य दिखायेगा, जिन्हें देख कर तुम लोग अचम्भे में पड़ जाओगे। (21) जिस तरह पिता मृतकों को उठाता और जिलाता है, उसी तरह पुत्र भी जिसे चाहता, उसे जीवन प्रदान करता है; (22) क्योंकि पिता किसी का न्याय नहीं करता। उसने न्याय करने का पूरा अधिकार पुत्र को दे दिया है, (23) जिससे सब लोग जिस प्रकार पिता का आदर करते हैं, उसी प्रकार पुत्र का भी आदर करें। जो पुत्र का आदर नहीं करता, वह पिता का, जिसने पुत्र को भेजा, आदर नहीं करता। (24) ’‘मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ- जो मेरी शिक्षा सुनता और जिसने मुझे भेजा, उस में विश्वास करता है, उसे अनन्त जीवन प्राप्त है। वह दोषी नहीं ठहराया जायेगा। वह तो मृत्यु को पार कर जीवन में प्रवेश कर चुका है। (25) ’‘मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ- वह समय आ रहा है, आ ही गया है, जब मृतक ईश्वर के पुत्र की वाणी सुनेंगे, और जो सुनेंगे, उन्हें जीवन प्राप्त होगा। (26) जिस तरह पिता स्वयं जीवन का स्रोत है, उसी तरह उसने पुत्र को भी जीवन का स्रोत बना दिया (27) और उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, क्योंकि वह मानव पुत्र है। (28) इस पर आश्चर्य न करो। वह समय आ रहा है, जब वे सब, जो कब्रों में है, उसकी वाणी सुन कर निकल आयेंगे। (29) सत्कर्मी जीवन के लिए पुनर्जीवित हो जायेंगे और कुकर्मी नरकदण्ड के लिए। (30) मैं स्वयं अपने से कुछ भी नहीं कर सकता। मैं जो सुनता, उसी के अनुसार निर्णय देता हूँ और मेरा निर्णय न्यायसंगत है; क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, बल्कि जिसने मुझे भेजा, उसकी इच्छा पूरी करना चाहता हूँ।''

एफ़ेसियों 1:5-9 “इस प्रकार उसने अपनी मंगलमय इच्छा के अनुसार (6) अपने अनुग्रह की महिमा प्रकट की है। वह अनुग्रह हमें उसके प्रिय पुत्र द्वारा मिला है, (7) जो अपने रक्त द्वारा हमें मुक्ति अर्थात् अपराधों की क्षमा दिलाते हैं। यह ईश्वर की अपार कृपा का परिणाम है, (8) जिसके द्वारा वह हमें प्रज्ञा तथा बुद्धि प्रदान करता रहता है। (9) (९-१०) उसने अपनी मंगलमय इच्छा के अनुसार निश्चय किया था कि वह समय पूरा हो जाने पर स्वर्ग तथा पृथ्वी में जो कुछ है, वह सब मसीह के अधीन कर एकता में बाँध देगा। उसने अपने संकल्प का यह रहस्य हम पर प्रकट किया है।“

फिलिप्पियों 2:5-11 “आप लोग अपने मनोभावों को ईसा मसीह के मनोभावों के अनुसार बना लें। (6) वह वास्तव में ईश्वर थे और उन को पूरा अधिकार था कि वह ईश्वर की बराबरी करें, (7) फिर भी उन्होंने दास का रूप धारण कर तथा मनुष्यों के समान बन कर अपने को दीन-हीन बना लिया और उन्होंने मनुष्य का रूप धारण करने के बाद (8) मरण तक, हाँ क्रूस पर मरण तक, आज्ञाकारी बन कर अपने को और भी दीन बना लिया। (9) इसलिए ईश्वर ने उन्हें महान् बनाया और उन को वह नाम प्रदान किया, जो सब नामों में श्रेष्ठ है, (10) जिससे ईसा का नाम सुन कर आकाश, पृथ्वी तथा अधोलोक के सब निवासी घुटने टेकें (11) और पिता की महिमा के लिए सब लोग यह स्वीकार करें कि ईसा मसीह प्रभु हैं।“


अनुवाक्य: तेरी स्तुति और महिमा हो।

  • हे पुत्र ईश्वर –-
  • हे अनादी शब्द –-
  • हे आल्फ़ा और ओमेगा –-
  • हे मुक्तिदाता प्रभु –-
  • हे अनादी शब्द –-
  • हे ईश्वर के मेमने --
  • हे मसीह –-
  • हे ईसा नाज़री –-
  • हे महत्ती ज्योति (इसायाह 9:1) –-
  • हे इम्मनुएल --
  • हे जीवन्त ईश्वर के पुत्र --
  • हे परम पिता के एकलौते पुत्र –-
  • हे दाऊद के पुत्र –-
  • हे मरियम के पुत्र –-
  • हे अपूर्व परामर्शदाता (इसायाह 9:5) –-
  • हे शक्तिशाली ईश्वर (इसायाह 9:5) –-
  • हे शाश्वत पिता (इसायाह 9:5) –-
  • हे शांति के राजा (इसायाह 9:5) –-
  • हे इस्राएल के राजा --
  • हे राजाओं के राजा –-
  • हे प्रभुओं के प्रभु –-
  • हे महापुरोहित –-
  • हे हमारे एकमात्र मध्यस्थ –-
  • हे संसार की ज्योति –-
  • हे भले गड़ेरिये –-
  • हे भेडशाला के द्वार --
  • हे सच्ची दाखलता - -
  • हे मार्ग, सत्य और जीवन –-
  • हे भले गुरु --
  • हे पुनरुत्थान और जीवन --
  • हे संजीवन जल देने वाले --
  • हे स्वर्ग से उतरी हुई रोटी-
  • हे अनन्त जीवन की रोटी –-
  • हे कलीसिया के वर - -
  • हे मृतकों को जिलाने वाले –-
  • हे अपदूतों को निकालने वाले –-
  • हे रोगियों को चंगा करने वाले –-
  • हे कुष्ठ रोगियों को शुद्ध करने वाले –-
  • हे अर्घांग रोगियों को चलाने वाले –-
  • हे अंधों को दृष्टिदान देने वाले –-
  • हे गूँगों को आवाज देने वाले –-
  • हे बहरों के कान खोलने वाले –-
  • हे अनन्त जीवन का संदेश देने वाले –-
  • हे स्वर्ग राज्य के रहस्य प्रकट करने वाले –-
  • हे पानी पर चलने वाले –-
  • हे आँधी को शाँत करने वाले –-
  • प्रभु और गुरु होकर भी अपने शिष्यों के पैर धोने वाले --
  • अपने श्त्रुओं के लिए प्रार्थना करने वाले --
  • हे क्रूस पर अपना रक्त बहाने वाले –-
  • हे क्रूस पर अपने जीवन की कुर्बानी देने वाले –-
  • हे तीसरे दिन जी उठने वाले –-
  • हे पवित्र आत्मा प्रदान करने वाले –-
  • हे अंतिम दिन फ़िर आने वाले –-
  • हे जीवितों और मृतकों के न्याय करने वाले --

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Praise the Lord!