एज़ेकिएल 36:27 “मैं तुम लोगों में अपना आत्मा रख दूँगा, जिससे तुम मेरी संहिता पर चलोगे और ईमानदारी से मेरी आज्ञाओं का पालन करोग।”
योहन 14:16 “मैं पिता से प्रार्थना करूँगा और वह तुम्हें एक दूसरा सहायक प्रदान करेगा, जो सदा तुम्हारे साथ रहेगा।“
लूकस 1:35 “स्वर्गदूत ने उत्तर दिया, ’’पवित्र आत्मा आप पर उतरेगा और सर्वोच्च प्रभु की शक्ति की छाया आप पर पड़ेगी।“
लूकस 11:13 “बुरे होने पर भी यदि तुम लोग अपने बच्चों को सहज ही अच्छी चीज़ें देते हो, तो तुम्हारा स्वर्गिक पिता माँगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों नहीं देगा?’’
योहन 16:7-15 “फिर भी मैं तुम लोगों से सच कहता हूँ तुम्हारा कल्याण इस में है कि मै चला जाऊँ। यदि मैं नहीं जाऊँगा, तो सहायक तुम्हारे पास नहीं आयेगा। यदि मैं जाऊँगा, तो मैं उसे तुम्हारे पास भेजूँगा। (8) जब वह आयेगा, तो पाप, धार्मिकता और दंण्डाज्ञा के विषय में संसार का भ्रम प्रमाणित कर देगा- (9) पाप के विषय में, क्योंकि वे मुझ में विश्वास नहीं करते (10) घार्मिकता के विषय में, क्योंकि मैं पिता के पास जा रहा हूँ और तुम मुझे और नहीं देखोगे; (11) दण्डाज्ञा के विषय में, क्योंकि इस संसार का नायक दोषी ठहराया जा चुका है। (12) मुझे तुम लोगों से और बहुत कुछ कहना है परन्तु अभी तुम वह नहीं सह सकते। (13) जब वह सत्य का आत्मा आयेगा, तो वह तुम्हें पूर्ण सत्य तक ले जायेगा; क्योंकि वह अपनी ओर से नहीं कहेगा, बल्कि वह जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा और तुम्हें आने वाली बातों के विषय में बतायेगा। (14) वह मुझे महिमान्वित करेगा, क्योंकि उसे मेरी ओर से जो मिला है, वह तुम्हें वही बतायेगा। (15) जो कुछ पिता का है, वह मेरा है। इसलिये मैंने कहा कि उसे मेरी ओर से जो मिला है, वह तुम्हें वही बतायेगा। “
योहन 7:37-39 “पर्व के अन्तिम और मुख्य दिन ईसा उठ खड़े हुए और उन्होंने पुकार कर कहा, ‘‘यदि कोई प्यासा हो, तो वह मेरे पास आये। (38) जो मुझ में विश्वास करता है, वह अपनी प्यास बुझाये।'' जैसा कि धर्म-ग्रन्थ में लिखा है- उसके अन्तस्तल से संजीवन जल की नदियाँ बह निकलेंगी। (39) उन्होंने यह बात उस आत्मा के विषय में कही, जो उन में विश्वास करने वालों को प्राप्त होगा। उस समय तक आत्मा प्रदान नहीं किया गया था, क्योंकि ईसा महिमान्वित नहीं हुए थे।“
रोमियों 8:26-27 “आत्मा भी हमारी दुर्बलता में हमारी सहायता करता है। हम यह नहीं जानते कि हमें कैसे प्रार्थना करनी चाहिए, किन्तु हमारी अस्पष्ट आहों द्वारा आत्मा स्वयं हमारे लिए विनती करता है। (27) ईश्वर हमारे हृदय का रहस्य जानता है। वह समझाता है कि आत्मा क्या कहता है, क्योंकि आत्मा ईश्वर के इच्छानुसार सन्तों के लिए विनती करता है।
प्रेरित-चरित 2:1-18 “जब पेंतेकोस्त का दिन आया और सब शिष्य एक स्थान पर इकट्ठे थे, (2) तो अचानक आँधी-जैसी आवाज आकाश से सुनाई पड़ी और सारा घर, जहाँ वे बैठे हुए थे, गूँज उठा। (3) उन्हें एक प्रकार की आग दिखाई पड़ी जो जीभों में विभाजित होकर उन में से हर एक के ऊपर आ कर ठहर गयी। (4) वे सब पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गये और पवित्र आत्मा द्वारा प्रदत्त वरदान के अनुसार भिन्न-भिन्न भाषाएं बोलने लगे। (5) पृथ्वी भर के सब राष्ट्रों से आये हुए धर्मी यहूदी उस समय येरुसालेम में रहते थे। (6) बहुत-से लोग वह आवाज सुन कर एकत्र हो गये। वे विस्मित थे, क्योंकि हर एक अपनी-अपनी भाषा में शिष्यों को बोलते सुन रहा था। (7) वे बड़े अचम्भे में पड़ गये और चकित हो कर बोल उठे, ''क्या ये बोलने वाले सब-के-सब गलीली नहीं है? (8) तो कि हम में हर एक अपनी-अपनी जन्मभूमि की भाषा कैसे सुन रहा है? (9) पारथी, मेदी और एलामीती; मेसोपोतामिया, यहूदिया और कम्पादुनिया, पोंतुस और एशिया, (10) फ्रुगिया और पप्फुलिया, मिश्र और कुरेने के निकवर्ती लिबिया के निवासी, रोम के यहूदी तथा दीक्षार्थी प्रवासी, (11) क्रेत और अरब के निवासी-हम सब अपनी-अपनी भाषा में इन्हें ईश्वर के महान् कार्यों का बख़ान करते सुन रहे हैं।'' (12) सब-के-सब बड़े अचम्भे में पड़ कर चकित रह गये और एक दूसरे से कहते थे, ''यह क्या बात है?'' (13) कुछ लोग उपहास करते हुए कहते थे, ''ये तो नयी अंगूरी पी कर मतवाले हैं''। (14) पेत्रुस ने ग्यारहो के साथ खड़े हो कर लोगों को सम्बोधित करते हुए ऊँचे स्वर से कहा, ''यहूदी भाइयो और येरुसालेम के सब निवासियो! आप मेरी बात ध्यान से सुनें और यह जान लें कि (15) ये लोग मतवाले नहीं हैं, जैसा कि आप समझते हैं। अभी तो दिन के नौ ही बजे हैं। (16) यह वह बात है, जिसके विषय में नबी योएल ने कहा है, (17) प्रभु यह कहता है- मैं अन्तिम दिनों सब शरीरधारियों पर अपना आत्मा उतारूँगा। तुम्हारे पुत्र और पुत्रियाँ भविष्यवाणी करेंगे, तुम्हारे नवयुवकों को दिव्य दर्शन होंगे और तुम्हारे बड़े-बूढ़े स्वप्न देखेंगे। (18) मैं उन दिनों अपने दास-दासियों पर अपना आत्मा उतारूँगा और वे भविष्यवाणी करेंगे।“
प्रेरित-चरित 8:14-17 “जब येरुसालेम में रहने वाले प्रेरितों ने यह सुना कि समारियों ने ईश्वर का वचन स्वीकार कर लिया तो उन्होंने पेत्रुस और योहन को उनके पास भेजा। (15) वे दोनों वहाँ गये और उन्होंने समारियों के लिए यह प्रार्थना की कि उन्हें पवित्र आत्मा प्राप्त हो। (16) पवित्र आत्मा अब तक उन में से किसी पर नहीं उतरा था। उन्हें केवल प्रभु ईसा के नाम पर बपतिस्मा दिया गया था। (17) इसलिए पेत्रुस और योहन ने उन पर हाथ रखे और उन्हें पवित्र आत्मा प्राप्त हो गया।“
प्रेरित-चरित 19:1-6 “जिस समय अपोल्लोस कुरिन्थ में था, पौलुस भीतरी प्रदेशों का दौरा समाप्त कर एफेसुस पहुँचा। वहाँ उसे कुछ शिष्य मिले। (2) उसने उन से पूछा, ''क्या विश्वासी बनते समय आप लोगों को पवित्र आत्मा प्राप्त हुआ था?'' उन्होंने उत्तर दिया, ''हमने यह भी नहीं सुना है कि पवित्र आत्मा होता है''। (3) इस पर उसने पूछा, ''तो, आप को किसका बपतिस्मा मिला?'' उन्होंने उत्तर दिया, ''योहन का बपतिस्मा''। (4) पौलुस ने कहा, ''योहन पश्चात्ताप का बपतिस्मा देते थे। वह लोगों से कहते थे कि आप को मेरे बाद आने वाले में-अर्थात् ईसा में- विश्वास करना चाहिए।'' (5) उन्होंने यह सुन कर प्रभु ईसा के नाम पर बपतिस्मा ग्रहण किया। (6) जब पौलुस ने उन पर हाथ रखा, तो पवित्र आत्मा उन पर उतरा और वे भाषाएँ बोलते और भविष्यवाणी करते रहे।“
अनुवाक्य: तेरी स्तुति और महिमा हो।
अथवा : हमें अपने वरों तथा फ़लों से भर दे।
अथवा : हमारे हृदय में आ।