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जयेसु प्रार्थना संसाधन
स्तोत्र 119 (A)
अनुवाक्य : हे प्रभु, तेरे पवित्र वचन से मेरे जीवन को आलोकित कर।
मैं तेरे आदेश पूरे करने में सदा दृढ़ बना रहूँ।
यदि मैं तेरी आज्ञाओं का ध्यान करता रहूँगा, तो मुझे कभी हताश नहीं होना पड़ेगा।
मैं तेरे आदेशों का पालन करता हूँ, तू कभी मेरा परित्याग न कर।
तेरी शिक्षा का पालन करने से ही नवयुवक निर्दोष आचरण कर सकता है।
मैं सारे हृदय से तुझे खोजता रहा, मुझे अपनी आज्ञाओं के मार्ग से भटनके न दे।
मैंने तेरी शिक्षा अपने हृदय में सुरिक्षत रखी, जिससे मैं तेरे विरुद्ध पाप न करूँ।
प्रभु! तू धन्य है। मुझे अपनी संहिता की शिक्षा दे।
मेरा कण्ठ तेरे सब नियमों का बखान करता रहा।
धन-सम्पत्ति की अपेक्षा मुझे तेरे आदेशों के पालन से अधिक आनन्द मिला।
मैं तेरी विधियों का मनन करूँगा, मैं तेरे मार्गों का ध्यान रखूँगा।
तेरी संहिता मुझे अपार आनन्द प्रदान करती है, मैं तेरी शिक्षा कभी नहीं भुलाऊँगा।
अपने सेवक को आशिष प्रदान कर, जिससे मैं जीवित रहूँ और तेरी शिक्षा का पालन करूँ।
मेरी आँखों को ज्योति प्रदान कर, जिससे मैं तेरी संहिता की महिमा देख सकूँ।
मैं पृथ्वी पर परदेशी हूँ, अपनी आज्ञाओं को मुझ से न छिपा।
मेरी आत्मा सदा-सर्वदा तेरे नियमों के लिए तरसती है।
चाहे शासक मिल कर मेरी निन्दा करें, किन्तु मैं, तेरा सेवक तेरी संहिता का मनन करता हूँ।
तेरे आदेश मुझे अपार आनन्द प्रदान करते हैं, तेरा विधान मेरा परामर्शदाता है।
मुझे अपनी आज्ञाओं का मार्ग समझा और मैं तेरे अपूर्व कार्यों का मनन करूँगा।
कपट के मार्ग से मुझे दूर रख और अपनी संहिता पर चलने की कृपा प्रदान कर।
मैंने सत्य का मार्ग चुना और तेरे निर्णयों को हृदयंगम किया है।
मैं तेरे आदेशों का पालन करता हूँ। प्रभु! मुझे निराश न होने दे।
मैं तेरी आज्ञाओं के मार्ग पर चलता हूँ, क्योंकि तू मुझ में नवजीवन का संचार करता है।
प्रभु! मुझे अपने विधान के मार्ग की शिक्षा प्रदान कर, मैं जीवन भर उस पर चलता रहूँगा।
मुझे ऐसी शिक्षा दे, जिससे मैं सारे हृदय से तेरी संहिता का पालन करता रहूँ।
मुझे अपनी आज्ञाओं के मार्ग पर ले चल; क्योंकि वे मुझे आनन्द प्रदान करती हैं।
मेरे हृदय में धन-सम्पत्ति का नहीं, बल्कि अपने आदेशों का अनुराग रोपने की कृपा कर।
मुझे तेरी आज्ञाएँ हृदय से प्रिय हैं; तू अपने न्याय के अनुरूप मुझे नवजीवन प्रदान कर।
मेरे मुख को सत्य-वचन से वंचित न कर, क्योंकि मुझे तेरे नियमों का भरोसा है।
मैं निरन्तर और सदा-सर्वदा तेरी संहिता का पालन करूँगा।
तेरी आज्ञाएँ मुझे अपार आनन्द प्रदान करती हैं। मैं उन्हें सारे हृदय से चाहता हूँ।
मैं तेरी आज्ञाओं को करबद्ध प्रणाम करता हूँ। मैं तेरी संहिता का मनन करूँगा।
यह विपत्ति में मेरी सान्त्वना है, क्योंकि तेरी शिक्षा मुझे नवजीवन प्रदान करती है।
प्रभु! मैं तेरे प्राचीन नियमों का स्मरण करता हूँ, इन से मुझे सान्त्वना मिलती है।
पृथ्वी पर मेरे अस्थायी निवास में तेरी संहिता मेरे भजनों का विषय बन गयी है।
प्रभु! मैं रात को तेरा नाम स्मरण करता हूँ, जिससे मैं तेरी संहिता के अनुसार जीवन बिताऊँ।
यही मेरे लिए उचित है कि मैं तेरे नियमों का पालन करूँ।
प्रभु! मैंने कहा: मेरा भाग्य यह है कि मैं तेरी शिक्षा का पालन करूँ।