जयेसु प्रार्थना संसाधन

चंगाई

मत्ती 9:35 “ईसा सभागृहों में शिक्षा देते, राज्य के सुसमाचार का प्रचार करते, हर तरह की बीमारी और दुबर्लता दूर करते हुए, सब नगरों और गाँवों में घूमते थे।“

मारकुस 5:40-43 “ ईसा ने सब को बाहर कर दिया और वह लड़की के माता-पिता और अपने साथियों के साथ उस जगह आये, जहाँ लड़की पड़ी हुई थी।) लड़की का हाथ पकड़ कर उस से कहा, 'तालिथा कुम''। इसका अर्थ है- ओ लड़की! मैं तुम से कहता हूँ: उठो। लड़की उसी क्षण उठ खड़ी हुई और चलने-फिरने लगी, क्योंकि वह बारह बरस की थी। लोग बड़े अचम्भे में पड़ गये। ईसा ने उन्हें बहुत समझा कर आदेश दिया कि यह बात कोई न जान पाये और कहा कि लड़की को कुछ खाने को दो।“

स्तोत्र 107:17-22 “कुछ लोग अपने कुकर्मों के कारण बीमार पड़ गये थे। वे अपने पापों के कारण कष्ट झेल रहे थे। (18) वे हर प्रकार के भोजन से घृणा करते थे और मृत्यु के द्वार तक पहुँच गये थे। (19) उन्होंने अपने संकट में प्रभु की दुहाई दी और उसने विपत्ति से उनका उद्धार किया। (20) उसने अपनी वाणी भेज कर उन्हें स्वस्थ किया और कब्र से उनका उद्धार किया। (21) वे प्रभु को धन्यवाद दे- उसके प्रेम के लिए और मनुष्यों के कल्याणार्थ उसके चमत्कारों के लिए। (22) वे धन्यवाद का बलिदान चढ़ायें और आनन्द के गीत गाते हुए उसके कार्य घोषित करें।“

प्रेरित-चरित 19:11-12 “ ईश्वर पौलुस द्वारा असाधारण चमत्कार दिखता था। जब लोग उसके शरीर पर के रूमाल और अंगोछे रोगियों के पास ले जाते थे, तो उनकी बीमारियाँ दूर हो जाती थीं और दुष्ट आत्मा निकल जाते थे।“

प्रेरित-चरित 28:8 “उसी समय पुब्लियुस का पिता बुख़ार और पेचिश से पीड़ित हो कर पलंग पर पड़ा हुआ था। पौलुस ने उसके पास जा कर प्रार्थना की और उस पर हाथ रख कर उस को अच्छा कर दिया।“

प्रेरित-चरित 5:15 “लोग रोगियों को सड़कों पर ले जा कर खटोलों तथा चारपाइयों पर लिटा देते थे, ताकि जब पेत्रुस उधर गुजरे, तो उसकी छाया उन में से किसी पर पड़ जाये।“

याकूब 5:13-15 “यदि आप लोगों में कोई कष्ट में हो, तो वह प्रार्थना करे। कोई प्रसन्न हो, तो भजन गाये। कोई अस्वस्थ हो, तो कलीसिया के अध्यक्षों को बुलाये और वे प्रभु के नाम पर उस पर तेल का विलेपन करने के बाद उसके लिए प्रार्थना करें। वह विश्वासपूर्ण प्रार्थना रोगी को बचायेगी और प्रभु उसे स्वास्थ्य प्रदान करेगा। यदि उसने पाप किया है, तो उसे क्षमा मिलेगी।“

प्रज्ञा 16:12 “उसे किसी जड़ी-बूटी या लेप से स्वास्थ्य लाभ नहीं हुआ, बल्कि प्रभु! तेरे शब्द ने उसे चंगा किया था।“

एज़ेकिएल 37:1-14 “प्रभु का हाथ मुझ पर पड़ा और प्रभु के आत्मा ने मुझे ले जा कर एक घाटी में उतार दिया, जो हड्डियों से भरी हुई थी। (2) उसने मुझे उनके बीच चारों ओर घुमाया। वे हाड्डियाँ बड़ी संख्या में घाटी के धरातल पर पड़ी हुई थीं और एकदम सूख गयी थीं। (3) उसने मुझ से कहा, ’’मानवपुत्र! क्या इन हाड्डियों में फिर जीवन आ सकता है?’’ मैंने उत्तर दिया, ’’प्रभु-ईश्र! तू ही जानता है’’। (4) इस पर उसने मुझ से कहा, ’’इन हाड्डियों से भवियवाणी करो। इन से यह कहो, ’सूखी’ हड्डियो! प्रभु की वाणी सुनो। (5) प्रभु-ईश्वर इन हड्डियों से यह कहता है: मैं तुम में प्राण डालूँगा और तुम जीवित हो जाओगी। (6) मैं तुम पर स्नायुएँ लगाऊँगा तुम में मांस भरूँगा, तुम पर चमड़ा चढाऊँगा। तुम में प्राण डालूँगा, तुम जीवित हो जाओगी और तुम जानोगी कि मैं प्रभु हूँ।’’ (7) मैं उसके आदेश के अनुसार भवियवाणी करने लगा। मैं भवियवाणी कर ही रहा था कि एक खडखडाती आवाज सुनाई पडी और वे हाड्डिया एक दूसरी से जुडने लगीं। (8) मैं देख रहा था कि उन पर स्नायुएँ लगीं; उन में मांस भर गया, उन पर चमड़ा चढ गया, किंतु उन में प्राण नहीं थे। (9) उसने मुझ से कहा, ’’मानवपुत्र! प्राणवायु को सम्बोधिक कर भवियवाणी करो। यह कह कर भवियवाणी करो: ’प्रभु-ईश्वर यह कहता है। प्राणवायु! चारों दिशाओं में आओ और उन मृतकों में प्राण फूँक दो, जिससे उन में जीवन आ जाये।’’ (10) मैंने उसके आदेशानुसार भवियवाणी की और उन में प्राण आये। वे पुनर्जीवित हो कर अपने पैरों पर खड़ी हो गयी- वह एक विशाल बहुसंख्यक सेना थी। (11) तब उसने मुझ से कहा, ’’मानवपुत्र! ये हड्डियाँ समस्त इस्राएली हैं। वे कहते रहते हैं- ’हमारी हड्डियाँ सूख गयी हैं। हमारी आशा टूट गय है। हमारा सर्वनाश हो गया है। (12) तुम उन से कहोगे, ’प्रभु यह कहता है: मैं तुम्हारी कब्रों को खोल दूँगा। मेरी प्रजा! में तुम लोगों को कब्रों से निकाल का इस्राएल की धरती पर वापस ले जाऊँगा। (13) मेरी प्रजा! जब मैं तुम्हारी कब्रों को खोल कर तुम लोगों को उन में से निकालूँगा, तो तुम लोग जान जाओगे कि मैं ही प्रभु हूँ। (14) मैं तुम्हें अपना आत्मा प्रदान करूँगा और तुम में जीवन आ जायेगा। मैं तुम्हें तुम्हारी अपनी धरती पर बसाऊँगा और तुम लोग जान जाओगे कि मैं, प्रभु, ने यह कहा और पूरा भी किया’।’’

योहन 9:1-3 “रास्ते में ईसा ने एक मनुष्य को देखा, जो जन्म से अन्धा था। उनके शिष्यों ने उन से पूछा, ‘‘गुरुवर! किसने पाप किया था, इसने अथवा इसके माँ-बाप ने, जो यह मनुष्य जन्म से अन्धा है?'' ईसा ने उत्तर दिया, ‘‘न तो इस मनुष्य ने पाप किया और न इसके माँ-बाप ने। यह इसलिए जन्म से अन्धा है कि इसे चंगा करने से ईश्वर का सामर्थ्य प्रकट हो जाये।“

प्रेरित-चरित 3:1-9 “पेत्रुस और योहन तीसरे पहर की प्रार्थना के समय मन्दिर जा रहे थे। (2) लोग एक मनुष्य को ले जा रहे थे, जो जन्म से लँगड़ा था। वे उसे प्रतिदिन ला कर मन्दिर के ‘सुन्दर’ नामक फाटक के पास रखा करते थे, जिससे वह मन्दिर के अन्दर जाने वालों से भीख माँग सके। (3) जब उसने पेत्रुस और योहन को मन्दिर में प्रवेश करते देखा, तो उन से भीख माँगी। (4) पेत्रुस और योहन ने उसे ध्यान से देखा। पेत्रुस ने कहा, ‘‘हमारी ओर देखो’’ (5) और वह कुछ पाने की आशा से उनकी ओर देखता रहा। (6) किन्तु पेत्रुस ने कहा, ‘मेरे पास न तो चाँदी है और न सोना; बल्कि मेरे पास जो, वही तुम्हें देखा हूँ- ईसा मसीह नाज़री के नाम पर चलो’’ (7) और उनसे उसका दाहिना हाथ पकड़ कर उसे उठाया। उसी क्षण लँगड़े के पैरों और टखनों में बल आ गया। (8) वह उछल कर खड़ा हो गया और चलने-फिरने लगा। वह चलते, उछलते तथा ईश्वर की स्तुति करते हुए उनके साथ मन्दिर आया। (9) सारी जनता ने उस को चलते-फिरते तथा ईश्वर की स्तुति करते हुए देखा।“

प्रेरित-चरित 14:8-10 “लुस्त्रा में एक ऐसा व्यक्ति बैठा हुआ था, जिसके पैरों में शक्ति नहीं थी। वह जन्म से ही लंगड़ा था और कभी चल-फिर नहीं सका था। (9) वह पौलुस का प्रवचन सुन ही रहा था कि पौलुस ने उस पर दृष्टि गड़ायी और उस में स्वस्थ हो जाने योग्य विश्वास देख कर (10) ऊँचे स्वर में कहा, ’’उठो और अपने पैरों पर खड़े हो जाओ’’। वह उछल पड़ा और चलने-फिरने लगा।“

निरगमन 15:26 “'यदि तुम अपने प्रभु-ईष्वर की वाणी ध्यान से सुनोगे और उसकी इच्छा पूरी करोगे, उसकी आज्ञाओं और सब विधियों का पालन करोगे, तो मैं वे बीमारियाँ तुम्हारे ऊपर नहीं ढाहूँगा, जिन्हें मैंने मिस्रियों पर ढाही थी; क्योंकि मैं वह प्रभु हूँ, जो तुम्हें स्वस्थ करता हैं।“

निरगमन 23:25-26 “तुम अपने प्रभु ईष्वर की सेवा करोगे और वह तुम्हारे अन्न-जल को आषीर्वाद देगा और मैं तुम से बीमारियाँ दूर रखूँगा। (26) न तो तुम्हारे देश में गर्भपात होगा और न कोई बाँझ रहेगी। मैं तुम्हारी आयु के दिन बढाऊँगा।“

विधि-विवरण 7:14-15 “तुम को अन्य सभी जातियों की अपेक्षा अधिक आशीर्वाद मिलेगा। तुम में कोई पुरुष या स्त्री अथवा तुम्हारे पशुओं में कोई नर या मादा निस्सन्तान नहीं होगा। (15) प्रभु तुम से सब प्रकार की बीमारियों को दूर रखेगा और तुम पर वे भयानक महामारियाँ नहीं आने देगा, जिनका अनुभव तुमने मिस्र में किया। वह उन्हें उन लोगों पर ढाहेगा, जो तुम से घृणा करते हैं।“

स्तोत्र 30:3 “प्रभु! मेरे ईश्वर! मैंने तुझे पुकारा और तूने मुझे स्वास्थ्य प्रदान किया।“v

इसायाह 53:4-5 “वह हमारे ही रोगों का अपने ऊपर लेता था और हमारे ही दुःखों से लदा हुआ था और हम उसे दण्डित, ईश्वर का मारा हुआ और तिरस्कृत समझते थे। (5) हमारे पापों के कारण वह छेदित किया गया है। हमारे कूकर्मों के कारण वह कुचल दिया गया है। जो दण्ड वह भोगता था, उसके द्वारा हमें शान्ति मिली है और उसके घावों द्वारा हम भले-चंगे हो गये हैं।

अनुवाक्य : हे प्रभु अपनी शक्ति से मुझे चंगा कर।

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