
प्रभु-ईश्वर यह कहता है, "मैं स्वयं अपनी भेड़ों की सुध लूँगा और उनकी देख-भाल करूँगा। भेड़ों के भटक जाने पर जिस तरह गड़ेरिया उनका पता लगाने जाता है, उसी तरह मैं अपनी भेड़ें खोजने जाऊँगा। कुहरे और अँधेरे में जहाँ कहीं वे तितर-बितर हो गयी हैं, मैं उन्हें वहाँ से छुड़ा लाऊँगा। मैं उन्हें राष्ट्रों में से निकाल कर और विदेशों से एकत्र कर उनके अपने देश में लौटा लाऊँगा। मैं उन्हें इस्राएल के पहाड़ों पर, घाटियों में और देश भर के बसे हुए स्थानों पर चराऊँगा। मैं उन्हें अच्छे चरागाहों में ले चलूँगा। वे इस्राएल के पर्वतों पर चरेंगी। वहाँ वे अच्छे चारागाहों में विश्राम करेंगी। और इस्राएल के पर्वतों की हरी-भरी भूमि में चरेंगी। प्रभु कहता है मैं स्वयं अपनी भेड़ें चराऊँगा और उन्हें विश्राम करने की जगह दिखाऊँगा। जो भेड़ें खो गयी हैं, मैं उन्हें खोज निकालूंगा; जो भटक गयी हैं, मैं उन्हें लौटा लाऊँगा; जो घायल हो गयी हैं, उनके घावों पर पट्टी बाँधूंगा; जो पवित्र हृदय बीमार हैं, उन्हें चंगा करूंगा; जो मोटी और भली-चंगी हैं, उनकी देख-रेख करूँगा। मैं उनका सच्चा चरवाहा होऊँगा।
प्रभु की वाणी।
अनुवाक्य : प्रभु मेरा चरवाहा है। मुझे किसी बात की कमी नहीं।
1. प्रभु मेरा चरवाहा है। मुझे किसी बात की कमी नहीं। वह मुझे हरे मैदानों में चराता है। वह मुझे विश्राम के लिए जल के निकट ले जा कर मुझ में नवजीवन का संचार करता है। वह अपने नाम का सच्चा है, वह मुझे धर्म-मार्ग पर ले चलता है।
2. चाहे अँधेरी घाटी हो कर जाना ही क्यों न पड़े, मुझे किसी अनिष्ट की आशंका नहीं; क्योंकि तू मेरे साथ रहता है। तेरी लाठी, तेरे डण्डे पर मुझे भरोसा है।
3. तू मेरे शत्रुओं के देखते-देखते मेरे लिए खाने की मेज़ सजाता है। तू मेरे सिर पर तेल का विलेपन करता है। तू मेरा प्याला लबालब भर देता है।
4. इस प्रकार तेरी भलाई और तेरी कृपा से मैं जीवन भर घिरा रहता हूँ। प्रभु का मंदिर ही मेरा घर है; मैं उस में अनन्त काल तक निवास करूँगा।
आशा व्यर्थ नहीं होती, क्योंकि ईश्वर ने हमें पवित्र आत्मा को प्रदान किया है और उसी के द्वारा ईश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में उमड़ पड़ा है। हम निस्सहाय ही थे, जब मसीह निर्धारित समय पर विधर्मियों के लिए मर गये। धार्मिक मनुष्य के लिए शायद ही कोई अपने प्राण अर्पित करे। फिर भी हो सकता है कि भले मनुष्य के लिए कोई मरने को तैयार हो जाये, किन्तु हम पापी ही थे जब मसीह हमारे लिए मर गये थे; इस से ईश्वर ने हमारे प्रति अपने प्रेम का प्रमाण दिया है। जब हम मसीह के रक्त के कारण धार्मिक माने गये, तो हम निश्चय ही मसीह के द्वारा ईश्वर के दण्ड से बच जायेंगे। हम शत्रु ही थे जब ईश्वर के साथ हमारा मेल उसके पुत्र की मृत्यु द्वारा हो गया था; और उसके साथ मेल हो जाने के बाद हम उसके पुत्र के जीवन द्वारा निश्चय ही बच जायेंगे। इतना ही नहीं, अब तो हमारे प्रभु येसु मसीह के द्वारा ईश्वर से हमारा मेल हो गया है, इसलिए हम उन्हीं के द्वारा ईश्वर पर भरोसा रख कर आनन्दित हैं।
प्रभु की वाणी।
(अल्लेलूया, अल्लेलूया !) प्रभु कहते हैं, "भला गड़ेरिया मैं हूँ। मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं।" (अल्लेलूया !)
येसु ने फ़रीसियों और शास्त्रियों को यह दृष्टान्त सुनाया, "यदि तुम्हारे एक सौ भेड़ें हों और उन में से एक भी भटक जाये, तो तुम लोगों में ऐसा कौन होगा जो निन्यानबे भेड़ों को निर्जन प्रदेश में छोड़ कर न चला जाये और उस भटकी हुई को तब तक न खोजता रहे, जब तक वह उसे नहीं पाये? पाने पर वह आनन्दित हो कर उसे अपने कंधों पर रख लेता है और घर आ कर अपने मित्रों और पड़ोसियों को बुलाता है और उन से कहता है, 'मेरे साथ आनन्द मनाओ, क्योंकि मैंने अपनी भटकी हुई भेड़ को पा लिया है।" मैं तुम से कहता हूँ, उसी प्रकार निन्यानबे धर्मियों की अपेक्षा, जिन्हें पश्चात्ताप की आवश्यकता नहीं है, एक पश्चात्तापी पापी के लिए स्वर्ग में अधिक आनन्द मनाया जायेगा।
प्रभु का सुसमाचार।
पवित्र हृदय के पर्व पर, येसु हमें अपने हृदय की गहराई को देखने के लिए आमंत्रित करते हैं - एक ऐसा हृदय जो हर इंसान के लिए अनंत प्रेम, दया और करुणा से धड़कता है। लूकस 15:3-7 में येसु एक चरवाहे की कहानी सुनाते हैं जो अपने 99 भेड़ों को छोड़कर उस एक खोई हुई भेड़ की खोज में निकलता है। यह एक साधारण सी दृष्टांत है, लेकिन यह हमें एक गहरी बात सिखाती है - कि ईश्वर का प्रेम व्यक्तिगत, सक्रिय और कभी हार न मानने वाला होता है। पवित्र हृदय कोई दूर के ईश्वर का प्रतीक नहीं, बल्कि उस ईश्वर का चिन्ह है जो हमारे बहुत करीब आता है, जो हमारी तकलीफों को महसूस करता है, और जो हर खोई आत्मा को खोजने के लिए तुरंत चलता है। येसु के कंधों पर खोई हुई भेड़ को उठाए हुए तस्वीर हमें उनकी कोमलता और मिशन की याद दिलाती है - कि वह पापियों को ढूंढता है, टूटे हुए दिलों को उठाता है और हर आत्मा को अपने पास लाना चाहता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि येसु केवल भीड़ की चिंता नहीं करते, बल्कि हर एक व्यक्ति की परवाह करते हैं। वह हमें देखता है, वह हमसे व्यक्तिगत रूप से प्रेम करता है। और अगर हम अकेले ही खो जाये, तो भी वह हमें ढूंढने आता है - क्योंकि उसका हृदय तब तक चैन नहीं पाता जब तक हर खोई आत्मा उसकी देखभाल में सुरक्षित न हो। इस दुनिया में जहाँ लोगों को उनके काम या सफलता से आँका जाता है, वहाँ पवित्र हृदय हर व्यक्ति को केवल इसलिए महत्व देता है क्योंकि वे प्रेम किए गए हैं। यह हमें भी चुनौती देता है कि हम दूसरों से वैसी ही दया और धैर्य से प्रेम करें - खासकर उनसे जो दूर या भुला दिए गए हैं। आज, आइए हम येसु के प्रेम में विश्राम करें। अगर हम उससे भटक गए हैं, तो लौट आएं। और उसके पवित्र हृदय को अपना हृदय बनाने दें - ताकि हम और अधिक दयालु, क्षमाशील और प्रेम से भरे हुये बन सकें, जैसे वे है।
✍ - फादर डेन्नीस तिग्गा
The Feast of the Sacred Heart of Jesus invites us to gaze into the very heart of Christ — a heart that beats with endless love, mercy, and compassion for all people. In Luke 15:3–7, Jesus tells the story of a shepherd who leaves ninety-nine sheep to go in search of the one that is lost. It’s a simple parable, but it reveals something profound: the nature of God’s love is personal, active, and relentless. The Sacred Heart is not a symbol of a distant God, but of one who draws near, who feels deeply, and who moves with urgency when even one soul is wandering. The image of Jesus carrying the lost sheep on His shoulders is a tender picture of His mission — to seek out the sinner, to lift the broken, and to bring every soul home. This feast reminds us that Jesus is not only concerned with the crowd but with the individual. He sees us. He loves us personally. And even if we were the only one lost, He would still come looking — because His heart is not satisfied until every lost sheep is safe in His care. In a world that often values people for their success or usefulness, the Sacred Heart values every person simply because they are loved. It challenges us to love others with the same mercy and patience — especially those who seem far away or forgotten. Today, let us rest in the love of Jesus. Let us return to Him if we’ve strayed. And let us allow His Sacred Heart to shape our own — to make us more compassionate, forgiving, and ready to love as He does.
✍ -Fr. Dennis Tigga
आज हम प्रभु येसु ख्रीस्त के पवित्रतम हृदय का महोत्सव मना रहे हैं। यह महोत्सव केवल हमे एक ही चीज बताता है और वह है प्रेम। जिस प्रकार प्रभु येसु ने कहा जिसके भीतर जो रहता है वह उसके मुख और व्यवहार से बाहर आता है। प्रभु येसु के ह्दय में केवल प्रेम ही प्रेम है क्योंकि उनका ह्दय प्रेम का श्रोत है और उनके ह्दय से केवल प्रेम ही बहता है। प्रभु येसु ख्रीस्त के पवित्रतम ह्दय की भक्ति यू तो बहुत पहले से थी परंतु इसको सार्थकता मार्गेट मरियम अलोकोक को प्राप्त ईश्वर के दर्शन और उनके पवित्र ह्दय की व्याख्या उपरांत हुई। आज के सुसमाचार के जरिये काथलिक कलीसिया हम से प्रभु के प्रेम को समझाने की कोशिष करती है कि एक भला चरवाहा अपनी हर एक भेड़ से कितना प्रेम करता है यदि उनमें से कोई एक भी भटक जाये तो वह उस अकेले को खोजने को निकल पड़ता हैं। हम भले ही अपने जीवन में पाप की गहराईयों में कितने ही नीचें क्यों न पडे़ हो फिर भी हमारे प्रति प्रभु का ह्दय प्रेम से उमड़ता है। इस प्रकार से असीम प्रेम करने वाले पवित्र ह्दय के प्रति हम अपने आप को समर्पित करें जिससे हमारा ह्दय भी उस प्रेम से भर जायें।
✍ - फादर डेन्नीस तिग्गा
Today we are celebrating the Sacred Heart of Lord Jesus Christ. This feast only tells us one thing and that is love, love, and love. As Lord Jesus said, that what is within that only comes out of person’s mouth and behavior. There is only love in the heart of Jesus because his heart is the source of love and only love flows from his heart. Devotion to the Sacred Heart of Jesus Christ was there from a long time ago, but it became meaningful after the vision of God received by St. Margaret Mary Alaqoque and the interpretation of His Sacred Heart. Through today's gospel, the Catholic Church tries to explain to us the love of the Lord as that of how much a good shepherd loves his each sheep. No matter how low we have fallen in the depths of sin in our lives, yet God's heart overflows with love for us. Let us dedicate ourselves to such limitless love of the Sacred Heart that our hearts may also be filled with that love.
✍ -Fr. Dennis Tigga