
स्वर्ग में ईश्वर का मंदिर खुल गया और मंदिर में विधान की मंजूषा दिखाई पड़ी। आकाश में एक महान् चिह्न दिखाई दिया, सूर्य का वस्त्र ओढ़े एक महिला दिखाई पड़ी; उसके पैरों तले चन्द्रमा था और उसके सिर पर बारह नक्षत्रों का मुकुट। वह गर्भवती थी और प्रसव-वेदना से पीड़ित हो कर चिल्लाती थी। तब आकाश में एक अन्य चिह्न दिखाई पड़ा - लाल रंग का एक बहुत बड़ा पंखदार साँप। उसके सात सिर थे, दस सींग थे और हर एक सिर पर एक मुकुट था। उसकी पूँछ ने आकाश के एक तिहाई तारे बुहार कर पृथ्वी पर फेंक दिये। वह पंखदार साँप प्रसव-पीड़ित महिला के समाने खड़ा रहा जिससे वह नवजात शिशु को निगल जाये। उस महिला ने एक पुत्र प्रसव किया जो लोह-द लोह-दण्ड से सब राष्ट्रों पर शासन करेगा। किसी ने उस शिशु को उठा कर उसे ईश्वर और उसके सिंहासन तक पहुँचा दिया और महिमा मरुभूमि की ओर भाग गयी, जहाँ ईश्वर ने उसके लिए आश्रय तैयार किया था। मैंने स्वर्ग में किसी को उच्च स्वर से यह कहते सुना, " अब हमारे ईश्वर की विजय, सामर्थ्य तथा राजत्व और उसके मसीह का अधिकार प्रकट हुआ है।"
प्रभु की वाणी।
अनुवाक्य : ओफ़िर के स्वर्ग से विभूषित हो कर एक महिला तुम्हारे दाहिने खड़ी है।
राजकुमारियाँ तुम्हारी प्रिय सखियाँ हैं, ओफ़िर के स्वर्ग से विभूषित हो कर एक महिला तुम्हारे दाहिने खड़ी है पुत्री! इधर देखो और कान लगा कर सुनो। तुम अपने लोगों को और पिता का घर भूल जाओ।
राजा तुम्हारे सौन्दर्य की अभिलाषा करेंगे। वह तुम्हारे स्वामी हैं; उन्हें दण्डवत् करो। वे भजन गाते हुए उसे ले जाती और राजा के महल में प्रवेश करती हैं।
अल्लेलूया ! धन्य हैं वे, जो ईश्वर का वचन सुनते और उसका पालन करते हैं। अल्लेलूया !
येसु लोगों को उपदेश दे ही रहे थे कि भीड़ में से कोई स्त्री उन्हें संबोधित करते हुए ऊँचे स्वर से बोल उठी, "धन्य है वह गर्भ, जिसने आप को धारण किया और धन्य हैं वे स्तन, जिनका आपने पान किया है!" परन्तु येसु ने कहा, “ठीक है; किन्तु वे कहीं अधिक धन्य हैं, जो ईश्वर का वचन सुनते और उसका पालन करते हैं।"
प्रभु का सुसमाचार।