
”हम पीढ़ियों के क्रमानुसार अपने लब्धप्रतिष्ठ पूर्वजों का गुणगान करें। जिन लोगों के उपकार नहीं भुलाये गये हैं, उनके नाम यहाँ दिये जायेंगे। उन्होंने जो सम्पत्ति छोड़ दी है, वह उनके वंशजों में निहित है। उनके वंशज आज्ञाओं का पालन करते हैं, और इनके कारण इनके संतति भी। उनका वंश सदा बना रहेगा और उनकी कीर्ति कभी नहीं मिटेगी। उनके शरीर शान्ति में दफ़नाये गये और उनके नाम पीढ़ी-दर-पीढ़ी बने रहेंगे। लोग उनकी प्रजा की प्रशंसा करेंगे, सभाओं में उनका गुणगान किया जायेगा।"
प्रभु की वाणी।
अनुवाक्य : प्रभु-ईश्वर उन्हें उनके पिता दाऊद का सिंहासन प्रदान करेगा।
1. प्रभु ने शपथ खा कर दाऊद से प्रतिज्ञा की है। वह अपने वचन से नहीं मुकरेगा। "मैं तुम्हारे वंशजों में से एक को तुम्हारे सिंहासन पर बैठाऊँगा।"
2. क्योंकि प्रभु ने सियोन को चुना और अपने निवास के लिए चाहा। "यह मेरा चिरस्थायी निवास है। मेरी इच्छा यह है कि मैं यहीं रहूँ।"
3. "मैं यहाँ दाऊद के लिए एक शक्तिशाली वंशज उत्पन्न करूँगा, अपने मसीह के लिए एक प्रदीप जलाऊँगा। उसके शत्रुओं को लज्जित होना पड़ेगा। किन्तु उसके मस्तक पर मेरा मुकुट शोभायमान होगा।"
अल्लेलूया, अल्लेलूया! वे इस्राएल की सान्त्वना की प्रतीक्षा में थे और पवित्र आत्मा उन पर छाया रहता था।
येसु ने अपने शिष्यों से कहा, "धन्य हैं तुम्हारी आँखें, क्योंकि वे देखती हैं और धन्य हैं तुम्हारे कान, क्योंकि वे सुनते हैं! मैं तुम लोगों से कहे देता हूँ- तुम जो बातें देख रहे हो, उन्हें कितने ही नबी और धर्मात्मा देखना चाहते थे, परन्तु उन्होंने उन को देखा नहीं और तुम जो बातें सुन रहे हो, वे उनको सुनना चाहते थे, परन्तु उन्होंने उन को सुना नहीं।"
प्रभु का सुसमाचार।
आज हम माता मरियम के माता-पिता — संत जोआकिम और अन्ना — को स्मरण करते हैं, जिन्होंने मरियम को धर्म, भक्ति और विश्वास के परिवेश में पाला। यद्यपि पवित्र शास्त्र में उनके बारे में बहुत जानकारी नहीं है, फिर भी कलीसिया उन्हें “धार्मिक पूर्वजों” की श्रेणी में रखती है, जिनकी "स्मृति अनन्त काल तक जीवित रहती है" (प्रवक्ता 44:14)। इनका जीवन इस बात का साक्ष्य है कि ईश्वर की योजना अक्सर परिवार के माध्यम से कार्य करती है, जहाँ विश्वास की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ती है। येसु आज के सुसमाचार में कहते हैं, “धन्य हैं तुम्हारी आँखें, क्योंकि वे देखती हैं और धन्य हैं तुम्हारे कान, क्योंकि वे सुनते हैं!” (मत्ती 13:16)। संत अन्ना और योआकिम ने ईश्वर की योजना को अपने जीवन में न केवल सुना, बल्कि उसे स्वीकार कर पूर्ण समर्पण में जिया। उन्होंने मरियम को उसी ईश्वरीय इच्छा में शिक्षित किया जो अंततः येसु तक पहुँची। इस पर्व पर हम अपने परिवारों को संत जोआकिम और अन्ना के संरक्षण में अर्पित करें, और अपने घरों को विश्वास और भक्ति के केंद्र बनाएँ, जहाँ भविष्य की पीढ़ियाँ ईश्वर की महिमा में पनपें।
✍ - फादर प्रीतम वसुनिया - (इन्दौर धर्मप्रांत)
We honour Sts. Joachim and Anne, who raised Mary in faith and devotion. Though Scripture offers little about them, the Church venerates them as “righteous ancestors” whose “memory endures forever” (Sirach 44:14). Their life shows God’s plan often works through families, passing faith across generations. Jesus says, “Blessed are your eyes, for they see, and your ears, for they hear” (Matthew 13:16). Joachim and Anne heard and lived God’s plan, preparing Mary for her role. On this memorial, we entrust our families to their protection, making our homes centres of faith where future generations glorify God.
✍ -Fr. Preetam Vasuniya (Indore Diocese)