चालीसे का तीसरा सप्ताह, बृहस्पतिवार

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पहला पाठ

नबी येरेमियस का ग्रन्थ 7:23-28

“यह वह प्रजा है, जो अपने प्रभु-ईश्वर की बात नहीं सुनती।”

प्रभु यह कहता है, “मैंने उन्हें यह आदेश दिया : यदि तुम मेरी बात पर ध्यान दोगे; तो मैं तुम्हारा ईश्वर होऊँगा और तुम होगे मेरी प्रजा। यदि तुम मेरे बताये हुए मार्गों पर चलोगे, तो तुम्हारा कल्याण होगा। किन्तु उन्होंने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया और मेरी आज्ञाओं का पालन नहीं किया। वे अकड़ कर बुराई करते रहे और मेरे पास आने की अपेक्षा मुझ से दूर चल गये। जिस दिन तुम्हारे पूर्वज मिस्र देश से निकले, उस दिन से आज तक मैं अपने सब सेवकों, अर्थात्‌ नबियों को तुम्हारे पास भेजता रहा। किन्तु उन्होंने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया और मेरी आज्ञाओं का पालन नहीं किया। वे अकड्‌ कर बुराई करते रहे और अपने पूर्वजों से अधिक दुष्ट निकले। 'तुम उन्हें यह सब बता दोगे, किन्तु वे तुम्हारी नहीं सुनेंगे। तुम उन्हें पुकारोगे, किन्तु वे उत्तर नहीं देंगे। तुम उन से यह कहो : यह वह प्रजा है, जो अपने प्रभु-ईश्वर की बात नहीं सुनती और शिक्षा ग्रहण करने से इनकार करती है। सच्चाई नहीं रही; वह उनके मुख से चली गयी है।”

प्रभु की वाणी।

भजन : स्तोत्र 94:1-2, 6-9

अनुवाक्य : ओह! यदि तुम आज उसकी यह वाणी सुनो, “अपना हृदय कठोर न बनाओ।”

आओ! हम प्रभु के सामने आनन्द मनायें, अपने शक्तिशाली त्राणकर्ता का गुणगान करें। हम स्तुति करते हुए उसके पास जायें, भजन गाते हुए उसे धन्य कहें।

आओ! हम दण्डवत्‌ कर प्रभु की आराधना करें, अपने सृष्टिकर्ता के सामने घुटने टेकें। वही तो हमारा ईश्वर है और हम हैं उसके चरागाह की प्रजा, उसकी अपनी भेड़ें।

ओह! यदि तुम आज उसकी यह वाणी सुनो, “अपना हृदय कठोर न बनाओ, जैसा कि पहले मरीबा और मस्सा की मरूभूमि में हुआ था। उस दिन तुम्हारे पूर्वजों ने मेरी परीक्षा ली। मेरे कार्यों को देखते हुए भी उन्होंने मुझ में विश्वास नहीं किया।”

जयघोष : योएल 2:12-13

प्रभु कहता है - सारे हृदय से मेरे पास लौट आओ और मैं प्रेमपूर्वक तुम पर दया करूँगा।

सुसमाचार

लूकस के अनुसार पवित्र सुसमाचार 11:14-23

“जो मेरे साथ नहीं है, वह मेरा विरोधी है।”

येसु ने किसी दिन एक अपदूत निकाला, जिसने एक मनुष्य को गूँगा बना दिया था। अपदूत के निकलते ही वह गूँगा बोलने लगा और लोग अचंभे में पड़ गये। परन्तु उन में से कुछ ने कहा, “यह अपदूतों के नायक बेलजेबुल की सहायता से अपदूतों को निकालता है।” कुछ लोग येसु की परीक्षा लेने के लिए उन से स्वर्ग की ओर का कोई चिह्न माँगने लगे। उनके विचार जान कर येसु ने उन से कहा, “जिस राज्य में फूट पड़ जाती है, वह उजड़ जाता है और घर ढह जाते हैं।” यदि शैतान अपने ही विरुद्ध विद्रोह करने लगे, तो उसका राज्य कैसे टिका रहेगा? तुम कहते हो कि मैं बेलजेबुल की सहायता से अपदूतों को निकालता हूँ। यदि मैं बेलजेबुल की सहायता से अपदूतों को निकालता हूँ, तो तुम्हारे बेटे किसकी सहायता से उन्हें निकालते हैं? इसलिए वे तुम लोगों का न्याय करेंगे। परन्तु यदि मैं ईश्वर के सामर्थ्य से अपदूतों को निकालता हूँ, तो निस्संदेह ईश्वर का राज्य तुम्हारे बीच आ गया है। “यदि कोई बलवान्‌ मनुष्य हथियार बाँध कर अपने घर की रखवाली करता हो, तो उसकी धन-सम्पत्ति सुरक्षित रहती है। पर यदि कोई उस से भी बलवान्‌ उस पर टूटे पड़े और उसे हरा दे, तो जिन हथियारों पर उसका भरोसा था; वह उन्हें उस से छीन लेता हैं और उसका माल लूट कर बाँट देता है।” "जो मेरे साथ नहीं है, वह मेरा विरोधी है और जो मेरे साथ नहीं बटोरता, वह बिखेरता है।”

प्रभु का सुसमाचार।

📚 मनन-चिंतन

जो मेरे साथ नहीं है, वह मेरा विरोधी है और जो मेरे साथ नहीं बटोरता, वह बिखेरता है। येसु दुष्टात्मा को बाहर निकालते हैं, बुराई पर अपनी शक्ति दिखाते हैं। लेकिन जब कुछ लोग उन पर बेलज़ेबुल की शक्ति से ऐसा करने का आरोप लगाते हैं, तो वे स्पष्ट रूप से चुनने के लिए कहते हैं- या तो आप ईश्वर के साथ हैं या उसके विरुद्ध। कोई बीच का रास्ता नहीं है। येसु हमें सक्रिय रूप से उसके पक्ष में रहने, इकट्ठा होने, निर्माण करने और उसके राज्य के प्रकाश में जीने के लिए आमंत्रित करते हैं। यह हमें अपने जीवन को देखने की चुनौती देता है-क्या हम ईश्वर के प्रेम को दुनिया में लाने में मदद कर रहे हैं या विभाजन में योगदान दे रहे हैं? आज इस बात पर चिंतन करें कि आपके चुनाव आपको कहाँ ले जाते हैं। क्या आप इस तरह से जी रहे हैं कि दूसरों का निर्माण हो और ईश्वर का प्रेम फैले, या क्या ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ आप नकारात्मकता, विभाजन या पाप को हावी होने देते हैं? प्रार्थना, दया और कार्य के माध्यम से येसु के साथ खड़े होने का सचेत निर्णय लें। प्रभु येसु, मुझे आपके साथ दृढ़ता से खड़े होने में मदद करें। मुझे बुराई का विरोध करने और एक ऐसा प्रकाश बनने की शक्ति दें जो आपके नाम में दूसरों को इकट्ठा करे और उनका निर्माण करे। आमेन।

- फादर अल्फ्रेड डिसूजा (भोपाल महाधर्मप्रांत)


📚 REFLECTION

"Do not think that I have come to abolish the Law or the Prophets; I have come not to abolish but to fulfill." (Matthew 5:17)

Jesus assures His listeners that He respects and fulfills the Law of God—not by strict legalism, but by living its true spirit: love, mercy, and obedience. He teaches that every command of God has meaning and value, and that those who live by them and teach others to do so will be called great in the Kingdom. This passage calls us to go deeper—not just to follow rules outwardly, but to live God's Word with sincerity, love, and integrity. Today, reflect on your attitude toward God’s commandments. Are they just rules to follow, or a guide to love more deeply? Try to live the spirit behind the commandment—whether it's honesty, forgiveness, or humility—and be a witness to others by your example.

Lord Jesus, help me to live not just by the letter of Your law, but by its spirit. Teach me to walk in Your truth and to lead others by my example of love and faithfulness. Amen.

-Fr. Alfred D’Souza (Archdiocese of Bhopal)

📚 मनन-चिंतन

जो मेरे साथ नहीं है, वह मेरा विरोधी है और जो मेरे साथ नहीं बटोरता, वह बिखेरता है।

येसु दुष्टात्मा को बाहर निकालते हैं, बुराई पर अपनी शक्ति दिखाते हैं। लेकिन जब कुछ लोग उन पर बेलज़ेबुल की शक्ति से ऐसा करने का आरोप लगाते हैं, तो वे स्पष्ट रूप से चुनने के लिए कहते हैं- या तो आप ईश्वर के साथ हैं या उसके विरुद्ध। कोई बीच का रास्ता नहीं है। येसु हमें सक्रिय रूप से उसके पक्ष में रहने, इकट्ठा होने, निर्माण करने और उसके राज्य के प्रकाश में जीने के लिए आमंत्रित करते हैं। यह हमें अपने जीवन को देखने की चुनौती देता है-क्या हम ईश्वर के प्रेम को दुनिया में लाने में मदद कर रहे हैं या विभाजन में योगदान दे रहे हैं? आज इस बात पर चिंतन करें कि आपके चुनाव आपको कहाँ ले जाते हैं। क्या आप इस तरह से जी रहे हैं कि दूसरों का निर्माण हो और ईश्वर का प्रेम फैले, या क्या ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ आप नकारात्मकता, विभाजन या पाप को हावी होने देते हैं? प्रार्थना, दया और कार्य के माध्यम से येसु के साथ खड़े होने का सचेत निर्णय लें।

प्रभु येसु, मुझे आपके साथ दृढ़ता से खड़े होने में मदद करें। मुझे बुराई का विरोध करने और एक ऐसा प्रकाश बनने की शक्ति दें जो आपके नाम में दूसरों को इकट्ठा करे और उनका निर्माण करे। आमेन।

- ब्रदर सुमन खलखो (भोपाल महाधर्मप्रान्त)


📚 REFLECTION

"Whoever is not with me is against me, and whoever does not gather with me scatters." (Luke 11:23)

In this passage, Jesus casts out a demon, showing His power over evil. But when some accuse Him of doing it by the power of Beelzebul, He responds with a clear call to choose: you are either aligned with God or against Him. There is no middle ground. Jesus invites us to actively choose to be on His side, to gather, build up, and live in the light of His kingdom. It challenges us to look at our lives—are we helping bring God’s love into the world or contributing to division? Reflect today on where your choices lead you. Are you living in a way that builds up others and spreads God’s love, or are there areas where you allow negativity, division, or sin to take hold? Make a conscious decision to stand with Jesus—through prayer, kindness, and action.

Lord Jesus, help me to stand firmly with You. Give me the strength to resist evil and to be a light that gathers and builds up others in Your name. Amen.

-Bro. Suman Khalkho (Archdiocese of Bhopal)

मनन-चिंतन

येसु एक समझदार शिक्षक और धैर्यवान प्रशिक्षक थे। यहाँ तक कि जब उनके श्रोता उनके प्रति आक्रामक और रोषकारी थे, तब भी उन्होंने धैर्यपूर्वक उन्हें ईश्वर के राज्य के मूल्यों की शिक्षा दी। हम यह रवैया उस समय साफ देखते हैं जब उनके विरोधियों ने उन पर आरोप लगाते हुए कहा, "वह नरकदूतों के नायक की सहायता से नरकदूतों को निकालता है"। वे अपने श्रोताओं की ऐसी प्रतिक्रियाओं से आहत होने को तैयार नहीं थे। दूसरी ओर, उन्होंने धैर्यपूर्वक उन्हें उनके कथन की अतार्किकता को इंगित करते हुए यह सिखाया कि दुष्ट आत्माएँ अपने दुष्ट राज्य के निर्माण में रुचि रखती हैं और उनके बुरे प्रयासों में वे एकजुट रहते हैं। प्रयासों की एकता के बिना शैतान का राज्य टिक नहीं सकता। इसलिए शैतान अपने स्वयं के प्रयासों को खराब करने में शामिल नहीं हो सकता। यह आत्मघाती होगा। येसु चाहते हैं कि हम यह समझ लें कि वे ईश्वर के सामर्थ्य से, न कि शैतान की सहायता से शैतान के राज्य को नष्ट करने का काम कर रहे हैं। वे हमें यह जानने के लिए आमंत्रित करते हैं कि वे शैतान से बहुत अधिक शक्तिशाली हैं।

- - फादर फ्रांसिस स्करिया


REFLECTION

Jesus was an understanding teacher and a patient trainer. Even when his listeners were aggressive and offensive towards him, he patiently taught them the values of the Kingdom of God. We see this approach when his opponents said, “He casts out demons by Beelzebul, the prince of demons”. He was unwilling to be hurt by such reactions from his listeners. On the other hand, he patiently showed them the illogicality of their statement by pointing out that the evil spirits are interested in building their evil kingdom and in their evil efforts they are united. Without unity of efforts the kingdom of the devil cannot stand. Hence the devil cannot indulge in spoiling his own efforts. That would be suicidal. Jesus wants us to perceive “the finger of God” working through him destroying the kingdom of the devil. He invites us to know he is much stronger than the devil.

- Fr. Francis Scaria