वर्ष का बाईसवाँ सप्ताह, इतवार - वर्ष A

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पहला पाठ

नबी येरेमियस यहाँ बताते हैं कि नबी का कार्य कितना कठिन है। लोग सत्य नहीं सुनना चाहते हैं और नबी का अपमान तथा उपहास करते हैं। फिर भी येरेमियस ईश्वर का वचन घोषित करते रहते हैं, क्योंकि वह उसके अन्दर एक धधकती आग के समान है, जिसे वह नहीं दबा पाते हैं।

नबी येरेमियस का ग्रंथ 20:7-9

"ईश्वर का वचन मेरे अपमान का कारण बन गया है।"

हे प्रभु ! तूने मुझे प्रलोभन दिया और मैं बहक गया। तूने मुझे मात कर दिया और मैं हार गया हूँ। मैं दिन भर हँसी का पात्र बना रहता हूँ, सब के सब मेरा उपहास करते हैं। जब-जब बोलता हूँ तो मुझे चिल्लाना और हिंसा तथा विध्वंस की घोषणा करनी पड़ती है। ईश्वर का वचन मेरे लिए निरन्तर अपमान तथा उपहास का कारण बन गया है। जब मैं सोचने लगा, "मैं उसे भुलाऊँगा, मैं फिर कभी उसके नाम पर भविष्यवाणी नहीं करूँगा", तो उसका वचन मेरे अन्दर एक धधकती आग-सा बना, जो मेरी हड्डी-हड्डी में समा गयी है। मैं उसे दबाते दबाते थक गया हूँ और अब मुझ से नहीं रहा जाता।

प्रभु की वाणी।

भजन : स्तोत्र 62:2-6,8-9

अनुवाक्य : मेरी आत्मा तेरे लिए तरसती है।

हे ईश्वर ! तू ही मेरा ईश्वर है। मैं तुझे ढूँढ़ता रहता हूँ। मेरी आत्मा तेरे लिए तरसती है। जल के लिए सूखी सन्तप्त भूमि की तरह मैं तेरे दर्शनों के लिए लालायित हूँ।

मैं तेरे पवित्र मंदिर में तेरा सामर्थ्य और तेरी महिमा देखना चाहता हूँ तेरा प्रेम प्राणों से भी अधिक वांछनीय है, मेरा कंठ तेरी स्तुति करता रहेगा।

में जीवन भर तुझे धन्य कहूँगा और हाथ जोड़ कर तुझ से प्रार्थना करता रहूँगा। तू मेरी आत्मा को तृप्त कर देता है। मैं उल्लसित हो कर तेरी महिमा का बखान करता हूँ।

तू सदा ही मेरा सहारा रहा है। मैं तेरे पंखों की छाया में सुखी हूँ। मेरी आत्मा तेरे लिए तरसती है। तेरा दाहिना हाथ मुझे सँभालता रहता है।

दूसरा पाठ

सन्त पौलुस रोमियों से अनुरोध करते हैं कि वे इस संसार के अनुकूल नहीं बनें, बल्कि ईश्वर की सन्तति होने के नाते सब कुछ नयी दृष्टि से देखें और अपना स्वभाव बदल लें।

रोमियों के नाम सन्त पौलुस का पत्र 12:1-2

"एक जीवन्त बलि के रूप में अपने को ईश्वर के प्रति अर्पित करें।"

भाइयो ! मैं ईश्वर की दया के नाम पर अनुरोध करता हूँ कि आप मन तथा हृदय से उसकी उपासना करें और एक जीवन्त, पवित्र तथा सुग्राह्य बलि के रूप में अपने को ईश्वर के प्रति अर्पित करें। आप इस संसार के अनुकुल न बने, बल्कि सब कुछ नयी दृष्टि से देखें और अपना स्वभाव बदल लें। इस प्रकार आप जान जायेंगे कि ईश्वर क्या चाहता है और उसकी दृष्टि में क्या भला, सुग्राह्य तथा सर्वोत्तम है।

प्रभु की वाणी।

जयघोष

अल्लेलूया, अल्लेलूया ! हे प्रभु ! बोल, तेरा दास सुन रहा है। तेरे ही शब्दों में अनन्त जीवन का संदेश है। अल्लेलूया !

सुसमाचार येसु के शिष्य अन्य यहूदियों की तरह समझते थे कि मसीह एक साधारण राजा की तरह इस पृथ्वी पर राज्य करेंगे। येसु उन्हें स्पष्ट शब्दों में अपने दुःखभोग के विषय में कहते हैं और इस पर बल देते हैं कि जो अपना क्रूस उठा कर उनका अनुसरण नहीं करेगा, वह उनका शिष्य नहीं बन सकता।

मत्ती के अनुसार पवित्र सुसमाचार 16:21-27

"यदि कोई मेरा अनुसरण करना चाहे, तो वह आत्मत्याग करे।"

येसु अपने शिष्यों को यह समझाने लगे कि मुझे येरुसालेम जाना होगा, नेताओं, महायाजकों और शास्त्रियों की ओर से बहुत दुःख उठाना, मार डाला जाना और तीसरे दिन जी उठना होगा। पेत्रुस येसु को अलग ले गया और उन्हें यह कह कर समझाने लगा, "ईश्वर ऐसा न करे। प्रभु ! यह आप पर कभी नहीं बीतेगी।" इस पर येसु ने मुड़ कर पेत्रुस से कहा, "हट जाओ, शैतान ! तुम मेरे रास्ते में बाधा बने रहे हो। तुम ईश्वर की बातें नहीं, बल्कि मनुष्यों की बातें सोचते हो।" इसके बाद येसु ने अपने शिष्यों से कहा, "यदि कोई मेरा अनुसरण करना चाहे, तो वह आत्मत्याग करे और अपना क्रूस उठा कर मेरे पीछे हो ले। क्योंकि जो अपना जीवन सुरक्षित रखना चाहता है, वह उसे खो देगा और जो मेरे कारण अपना जीवन खो देता है, वही उसे सुरक्षित रख सकेगा। मनुष्य को इस से क्या लाभ यदि वह सारा संसार प्राप्त कर ले लेकिन अपना जीवन गँवा दे। अपने जीवन के बदले मनुष्य दे ही क्या सकता है? क्योंकि मानव पुत्र अपने स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा सहित आयेगा और वह प्रत्येक मनुष्यों को उसके कर्म का फल देगा।"

प्रभु का सुसमाचार।


📚 मनन-चिंतन

जैसे प्रभु ईश्वर चाहते हैं कि हम सफल हों, वैसे ही शैतान चाहता है कि हम असफल हों। ईश्वर के पास हमारे कल्याण के लिए एक योजना है, लेकिन शैतान के पास हमारी विफलता के लिए एक योजना है। लूकस 4:13 में हम पढ़ते हैं, "जब शैतान सब प्रकार की परीक्षा ले चुका था, तो उचित समय के लिये उसे छोड़ गया"। येसु न केवल लगातार स्वर्गक पिता की बात सुन रहे थे, बल्कि वे शैतान के धोखे के प्रति हमेशा सतर्क भी रहते थे। जब येसु ने अपने दुखभोग और मृत्यु के बारे में भविष्यवाणी की, तो शैतान ने पेत्रुस के माध्यम से काम करना शुरू कर दिया और उनका ध्यान क्रूस से हटाने की कोशिश की और इस प्रकार, प्रभु ईश्वर की योजना से हटाने की कोशिश की। येसु ने शैतान के भ्रामक तरीकों को महसूस किया जो अब प्रेरितों के नेता का उपयोग कर रहा था। उन्होंने पेत्रुस से कहा, "हट जाओ, शैतान"। पुराने नियम में, हम दाऊद को देखते हैं जिसे शैतान द्वारा बहकाया गया था जो उसे पापों की ओर ले गया। साथ-साथ, हम यूसुफ के मजबूत चरित्र को भी देखते हैं जो शैतान के तरीकों के बारे में हमेशा सतर्क रहता था। हम जानते हैं कि पेत्रुस स्वयं एक क्षण के लिए शैतान के द्वारा पकड़ा गया था जिसने उसे अपने स्वामी का तीन बार अस्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। उत्पत्ति 4:6-7 में, हम प्रभु को यह कहते हुए काइन को सतर्क करते हुए पाते हैं, ''तुम क्यों क्रोध करते हो और तुम्हारा चेहरा उतरा हुआ क्यों है? जब तुम भला करोगे, तो प्रसन्न होगे। यदि तुम भला नहीं करोगे, तो पाप हिंस्र पशु की तरह तुम पर झपटने के लिए तुम्हारे द्वार पर घात लगा कर बैठेगा। क्या तुम उसका दमन कर सकोगे?” आइए हम "हमारे दरवाजे पर छिपे हुए पाप" से अवगत हों और शैतान को हमें पाप की ओर ले जाने की अनुमति न देने का संकल्प लें।

- फ़ादर फादर फ्रांसिस स्करिया


📚 REFLECTION

Just as God wants us to succeed, the devil wants us to fail. God has a plan for our welfare, but the devil has a plan for our failure. In Lk 4:13 we read, “When the Devil had finished every temptation, he left him until an opportune time”. Jesus was not only constantly listening to the heavenly Father, but he was also always alert about the deception of the devil. When Jesus foretold about his passion and death, the devil began to work through Peter trying to divert his attention from the Cross and thus, from the plan of God. Jesus realising the deceptive ways of the Devil who was now making use of the leader of the Apostles, told Peter, “Get behind me, Satan”. In the Old Testament, we have David who was caught unguarded by the devil who led him to sins. Side by side, we have also the strong character of Joseph who was always alert about the ways of the devil. We know that Peter himself was caught unguarded for a moment by the devil who led him to deny his master three times. In Gen 4:6-7, we find God warning Cain, “Why are you angry, and why has your countenance fallen? If you do well, will you not be accepted? And if you do not do well, sin is lurking at the door; its desire is for you, but you must master it.” Let us be aware of the “sin lurking at our door” and make a determination not to allow the devil to lead us into sin.

-Fr. Francis Scaria

📚 मनन-चिंतन-2

आज सामान्य काल का बाईसवाँ रविवार है और इस महीने का आख़िरी रविवार। यह रविवार इस महीने प्रभु से प्राप्त आशीषों और कृपादानों के लिए धन्यवाद देने का दिन है। पिछले 8 जून को एक प्रसिद्ध फ़िल्मी सितारे की प्रबंधक दिशा सालियन ने 14वें माले से कूदकर आत्महत्या कर ली। वह प्रसिद्ध अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थी, जिसके एक सप्ताह बाद 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत भी अपने कमरे में मृत पाए गए। पिछले कुछ महीनों और कुछ सालों में हमने ऐसे कई मामले देखे हैं जहाँ जीवन को खुश रखने के सारे सुख संसाधन होने के बावजूद बड़े-बड़े प्रसिद्ध लोग आत्महत्या कर लेते हैं। उनके पास गाड़ी-बंगला, प्रशंसक-दोस्त, धन-दौलत शोहरत और सब कुछ होते हुए भी आख़िर ऐसा क्या है जो उन्हें अपने लिए ऐसा दर्दनाक अन्त चुनने के लिए मजबूर कर देता है?

वर्तमान में यह बहुत ही ज्वलंत प्रश्न है। सब कुछ होने के बावजूद लोग अपने जीवन में सार्थकता क्यों नहीं पाते? शायद ऐसा इसलिए क्योंकि इस जीवन का एक मक़सद है, और जब तक जीवन का वह मक़सद पूरा नहीं हो जाता तब तक हमारा जीवन सार्थक नहीं होगा। जब तक हम ईश्वर की वाणी पर ध्यान नहीं देंगे, जब तक हम ईश्वर को अपने जीवन का केंद्रबिंदु नहीं बनाएँगे, तब तक हमारे अन्दर एक ख़ालीपन सा रहेगा, कुछ कमी रहेगी, कुछ खोया सा लगेगा, जीवन में कोई अर्थ नहीं, कोई मतलब नहीं निकलेगा। ईश्वर ही है जिसने हमारे जीवन का मक़सद निर्धारित किया है।

जब किसी कारख़ाने में कोई चीज़ बनायी जाती है, या कोई आविष्कारक किसी नई चीज़ का अविष्कार करता है तो उस चीज़ को बनाने वाला ही जानता है कि वह चीज़ किसलिए बनाई गयी है और उसका सबसे सही क्या उपयोग है। उदाहरण के लिए किसी ने अचार बनाने की मशीन बनायी हो, तो उस मशीन को बनाने वाला जानता है कि उस मशीन का उपयोग कैसे किया जाता है, और क्या-क्या सावधानियाँ हैं जिन्हें मन में रखना है ताकि ना मशीन को कुछ नुक़सान हो और ना उससे लिए जाए वाले काम का नुक़सान हो। उस मशीन का सही उपयोग और मक़सद दूसरों को समझाने के लिए एक नियम पुस्तक (मैन्यूअल) भी प्रिंट किया जाता है।

हमें ईश्वर ने बनाया है और हमारे जीवन का मक़सद ईश्वर ही जानते हैं, और जब तक हम विनम्र हृदय से अपने सृष्टिकर्ता की ओर नहीं मुड़ेंगे तब तक हम अपने जीवन का अर्थ नहीं समझ पाएँगे। ओर मुड़ने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि “हम अपना क्रूस उठाकर प्रभु येसु के पीछे हो लें।” हमें ईश्वर के लिए अपना जीवन खोना है तभी हम अपना जीवन पा सकेंगे। पवित्र बाइबिल वह नियम पुस्तिका (मैन्यूअल) है जो हमारे जीवन का मक़सद हमें समझाएगी, ईश्वर पवित्र बाइबिल के द्वारा हमें हमारे जीवन का सही उद्देश्य पहचानने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।आइए हम ईश्वर से प्रार्थना करें कि हम ईश्वर के लिए अपना जीवन खो दें ताकि हम ईश्वर को पा लें। आमेन।

- फादर जॉन्सन बी. मरिया (ग्वालियर धर्मप्रान्त)


📚 REFLECTION

Today is the twenty-second Sunday in Ordinary time and the last Sunday of this month. It is the day of thanking the Lord for blessings and graces received throughout this month. On June 8th a famous celebrity’s talented manager Disha Salian committed suicide by jumping from the 14th floor. She was ex-manager of Actor Sushant Singh Rajput who also was found dead, hanging in his room on June 14th after a week. We have seen many such cases in last few months and few years where famous personalities who seem to have everything that is required to be happy in this world, they committed suicide. They had vehicles, big bungalow, friends and fans, money and everything and yet what is it that made them to go for such a tragic end?

Today it has become a vital question. In spite of having everything why people don’t find meaning in their life. It is perhaps because this life has a purpose and till that purpose is fulfilled, we cannot find meaning in life. There will always be, emptiness, something missing, something loosing unless we listen go God, unless we make God as the centre of our life, we will find no sense, no meaning. God is the one who has set a purpose for our life.

When something is made in a factory or invented by an innovator or scientist, the maker of that thing knows for what it is made and how it can be used best. For example if a particular machine is made for making pickle, the one who made that machine knows how that machine will be used, and what are the precautions that have to be followed so that no harm is done to the machine or the work that it does. A manual also is printed so that others can know the use of that machine.

We are created by God and God our Creator alone knows the purpose of our life and unless we turn to him with humble heart, we will not know the purpose of our life. Best way to turn to him and find meaning for our life is to “take up our cross and follow Jesus.” We have to loose ourselves for God, then only we can find ourselves. Holy Bible could be the manual to find the best use of our life, God can inspire through his word in the Bible to find right purpose and use of our lives. Let us pray to God that we may get the grace to loose ourselves to find God. Amen.

-Fr. Johnson B.Maria (Gwalior)

मनन-चिंतन - 3

एक व्यक्ति जो पहले प्रभु येसुको नहीं जानता था, लेकिन आज प्रभु येसुको अपना मुक्तिदाता मानता है और प्रभु के लिए अपना जीवन समर्पित करता है, अपना एक अनुभव बताता है जिसके कारण उसने प्रभु को अपना मुक्तिदाता माना। उस व्यक्ति का जन्म एक गैरख्रीस्तीय परिवार में हुआ था। परिवार के सभी सदस्य बहुत धार्मिक थे। उस व्यक्ति ने प्रभु येसुका नाम कभी नहीं सुना था, न ही उनके बारे में जानता था।

एक बार वह अपने मित्र से मिलने अस्पताल गया क्योंकि वह बीमार था, उसका मित्र जिस अस्पताल में था वह एक क्रिश्चियन अस्पताल था। अस्पताल में प्रार्थना के लिए चर्च भी बना हुआ था। जब वह अपने बीमार मित्र से मिला तो उसकी हालत देख कर उसे बहुत दुःख हुआ क्योंकि उन दिनों वह स्वयं भी अपने निजी एवं पारिवारिक कारणों से जूझ रहा था। अपने मित्र से मिल कर जब वह बाहर जा रहा था, तब अचानक उसने सोचा क्यों न थोड़ी देर चर्च में बैठ कर प्रार्थना करूँ क्योंकि वह अपने मित्र की बीमारी और स्वयं के संकटों का निवारण चाहता था। इसके पहले वह कभी भी किसी चर्च में नहीं गया था। जीवन में पहली बार अपना मन हल्का करने के लिए उसने चर्च में प्रार्थना करने की सोची।

उसने बताया कि जैसे ही वह चर्च के अंदर गया और सामने क्रूसित प्रभु येसुको देखा, तो वह अपनी हॅसी को रोक नहीं पाया क्योंकि वह अपने दुःख-संकटों को हल्का करने के लिए भगवान से प्रार्थना करने यहाँ आया था, लेकिन अपने जीवन काल में उसने पहली बार एक ऐसे भगवान को देखा जो उसके ही समान दुःख-पीड़ा में था। तब उसने सोचा मैं अपने दुःख-संकटों के लिए कैसे इस भगवान से प्रार्थना करूँ जो स्वयं संकट में है। फिर भी उसने थोड़ी देर वहाँ बैठने का मन बनाया। वह वहाँ बैठ कर क्रूसित प्रभु येसुको देख रहा था। अचानक उसके मनमें एक आवाज़ आई, यह भगवान तुम्हें और तुम्हारे संकटों को अच्छे से समझ सकता है क्योंकि वह स्वयं दुःख-संकटों को सह चुका है, वह जानता है कि तुम्हारा दुःख-दर्द कितना बड़ा है क्योंकि उसने स्वयं तुम्हारे समान व तुमसे ज़्यादा दुखों को सहा है।

आज के सुसमाचार में प्रभु येसु अपने दुख-भोग, मरण एवं पुनरुत्थान की भविष्यवाणी करते हैं, साथ ही वे कहते है कि जो मेरा अनुसरण करना चाहता है वह आत्मत्याग करें और अपना क्रूस उठा कर मेरे पीछे हो ले। प्रभु येसु ने स्वयं अपना क्रूस उठाया और हम सबों की मुक्ति के लिए उस पर मर गये। क्योंकि उनके जीवन का उद्देश्य भी यही था। प्रभु को क्रूस-मरण से दूर करने के लिए शैतान ने बहुत कोशिशें की थी। चालीस दिन व चालीस रात के प्रार्थना एवं उपवास के बाद प्रभु को क्रूस एवं क्रूस-मरण से दूर ले जाने के लिए शैतान ने उन्हें तीन बार प्रलोभन दिए, लेकिन वह उस में सफल नहीं हो सका। आज के सुसमाचार में हमने सुना शैतान संत पेत्रुस के द्वारा प्रभु को क्रूस एवं क्रूस-मरण छोडने का प्रलोभन देता है। अनेक प्रलोभनों एवं परीक्षाओं के बावजूद प्रभु क्रूस एवं क्रूस मरण को अपनाते हैं और उसके द्वारा हमें मुक्ति प्रदान करते हैं। प्रभु येसु हम से भी यही चाहते हैं कि हम भी प्रलोभनों एवं परीक्षाओं के बावजूद अपना दैनिक क्रूस उठाकर उनके पीछे हो लें। हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि हमारे दैनिक क्रूस का बोझ या हमारे दैनिक दुख-संकटो की तीव्रता को प्रभु भली भांति जानते हैं क्योंकि उन्होंने स्वंय हमारे समान या हमसे ज्यादा हर प्रकार के दुख-संकटों को सहा है।

हम प्रभु से प्रार्थना करें कि वे हमें अपना क्रूस उठा कर उनके पीछे जाने की कृपा व शक्ति प्रदान करें साथ ही हमें इस बात का भी ज्ञान करायें कि प्रभु हमारे दुख-संकटो से परिचित हैं और वे हमारी मदद भी करते हैं।

-फादर वर्गीस पल्लिपरम्पिल