
यह पत्र येसु मसीह के सेवक पौलुस की ओर से है, जो ईश्वर के द्वारा प्रेरित चुना गया और उसके सुसमाचार के प्रचार अट्ठाईसवाँ सप्ताह सोमवार के लिए नियुक्त किया गया है। ईश्वर ने बहुत पहले अपने नबियों के द्वारा इस सुसमाचार की प्रतिज्ञा की थी, जैसा कि धर्मग्रंथ में लिखा है। यह सुसमाचार ईश्वर के पुत्र, हमारे प्रभु येसु मसीह के विषय में है। वह मनुष्य के रूप में दाऊद के वंश में उत्पन्न हुए और मृतकों में से जी उठने के कारण पवित्र आत्मा के द्वारा सामर्थ्य के साथ ईश्वर के पुत्र प्रमाणित हुए। उन से मुझे प्रेरित बनने का वरदान मिला है, जिससे मैं उनके नाम पर गैरयहूदियों में प्रचार करूँ और वे लोग विश्वास की अधीनता स्वीकार करें। उन में से आप लोग भी हैं, जो येसु मसीह के समुदाय के लिए चुने गये हैं। मैं उन सबों के नाम पर यह पत्र लिख रहा हूँ, जो रोम में ईश्वर के कृपापात्र और उसकी प्रजा के सदस्य हैं। हमारा पिता ईश्वर और प्रभु येसु मसीह आप लोगों को अनुग्रह तथा शांति प्रदान करे ।
प्रभु की वाणी।
अनुवाक्य : प्रभु ने राष्ट्रों को अपना न्याय दिखाया है।
1. प्रभु के आदर में नया गीत गाओ, क्योंकि उसने अपूर्व कार्य किये हैं। उसके दाहिने हाथ और उसकी पवित्र भुजा ने हमारा उद्धार किया है
2. प्रभु ने अपना मुक्ति-विधान प्रकट किया और सभी राष्ट्रों को अपना न्याय दिखाया है। उसने अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रख कर इस्राएल के घराने की सुध ली है
3. पृथ्वी के कोने-कोने में हमारे ईश्वर का मुक्ति-विधान प्रकट हुआ है। समस्त पृथ्वी आनन्द मनाये और ईश्वर की स्तुति करे ।
अल्लेलूया ! आज अपना हृदय कठोर न बनाओ, प्रभु की वाणी पर ध्यान दो । अल्लेलूया !
भीड़ की भीड़ उनके चारों ओर उमड़ रही थी और वह कहने लगे, "यह एक विधर्मी पीढ़ी है। यह एक चिह्न माँगती है, परन्तु नबी योनस के चिह्न को छोड़ इसे और कोई चिह्न नहीं दिया जायेगा। जिस प्रकार योनस निनिवे-निवासियों के लिए एक चिह्न बन गया था, उसी प्रकार मानव पुत्र भी इस पीढ़ी के लिए एक चिह्न बन जायेगा। न्याय के दिन दक्षिण की रानी इस पीढ़ी के लोगों के साथ जी उठेगी और इन्हें दोषी ठहरायेगी, क्योंकि वह सुलेमान की प्रज्ञा सुनने के लिए पृथ्वी के सीमान्तों से आयी थी, और देखो - यहाँ वह है, जो सुलेमान से भी महान् है ! न्याय के दिन निनिवे के लोग इस पीढ़ी के साथ जी उठेंगे और इसे दोषी ठहरायेंगे, क्योंकि उन्होंने यौनस का उपदेश सुन कर पश्चात्ताप किया था, और देखो यहाँ वह है, जो योनस से भी महान् है !"
प्रभु का सुसमाचार।
आज का सुसमाचार चिन्ह, विश्वास और क्षमा के बारे में है। कभी-कभी असामान्य और असाधारण की खोज में हम उस आश्चर्य को भूल जाते हैं जो हमारे सामने है। प्रभु हमारे सामने उसी पूर्णता से मौजूद हैं जैसे वह गलीलिया और यहूदिया के लोगों के सामने मौजूद थे। वह वचन, यूखरिस्त, ख्रीस्तीय समुदाय और हमारे अंतरतम में मौजूद हैं। प्रभु हमारे बीच अनुग्रह और सच्चाई से परिपूरित हैं और हमें उनकी परिपूर्णता प्राप्त करने के लिए आमंत्रित करते है। हमें चिन्हों और चमत्कारों की आवश्यकता नहीं है। हर दिन इस बात के प्रति अधिक जागरूक होने का निमंत्रण है कि प्रभु अपनी महानता और आश्चर्य के साथ हमारे सामने किस रूप में मौजूद हैं। प्रभु की उपस्थिति से अनुग्रहित हो कर, हमें उनकी उपस्थिति में गरिमापूर्ण जीवन बिताना है। येसु चाहते हैं कि कलीसिया द्वारा प्रदत्त सब कुछ के प्रति उदार प्रतिक्रिया दे।
✍फादर संजय कुजूर एस.वी.डी.The gospel of the day is about signs, faith and forgiveness. Sometimes in our search for the unusual and the extraordinary we can miss the wonder of what is there before us. The Lord is present to us as fully as he was present to the people of Galilee and Judea. He is present to us in his Word, in the Eucharist, in each other, deep within ourselves. The Lord dwells among us full of grace and truth and we are invited to receive from his fullness. We don’t need signs and wonders. Everyday is an invitation to become more aware of the many ways the Lord is present to us in all his greatness and wonder. Having been graced by the Lord’s presence, we are to respond to his presence by living in a graced way.What Jesus looks for from us is a generous response to all that we have been given through the Church.
✍ -Fr. Sanjay Kujur SVD
येसु नीनवे के लोगों की सराहना करते हैं कि वे नबी योना द्वारा उन्हें दिए गए संदेश के प्रति ग्रहणशील हैं। नबी योना ने उन्हें उनकी पापमय जीवन शैली और उन पर ईश्वर के आसन्न क्रोध के बारे में चेतावनी दी। नीनवे के लोगों ने विश्वास में तुरंत पश्चाताप के मार्ग को अपनाया। ईश्वर ने उनकी पुकार सुनी और उनके जीवन के तरीके को बदलने की उनकी इच्छा को मान लिया। येसु के लिए, यह नीनवे के लोगों का पश्चाताप महत्वपूर्ण है। यदि उनके पास भविष्यद्वक्ता योना के अधिकार को पहचानने और पश्चाताप करने की बुद्धि है, तो निश्चित रूप से येसु की पीढ़ी को ऐसा करने में सक्षम होना चाहिए, यह देखते हुए कि येसु योना से भी बडे है।
यही बात शेबा की रानी पर भी लागू होती है, जिसने इस्राएल के राजा की महानता को देखने के लिए एक लंबा सफर तय किया था। शेबा की रानी और नीनवे के लोगों जैसे विदेशी, इस्राएलियों की तुलना में सच्चाई को बेहतर ढंग से देखने में सक्षम हैं!
शायद हम भी अपनी धार्मिकता की भावना से घिर गए हैं और परिवर्तन की पुकार को नहीं पहचानते हैं जो ईश्वर हमारे जीवन में ला रहा है। आइए हम सतर्क रहें और अपने जीवन में ईश्वर की वाणी को पहचानें।
✍फादर रोनाल्ड मेलकम वॉनJesus applauds the people of Nineveh for being receptive to the message given to them by the prophet Jonah. Prophet Jonah warned them about their evil living style and God’s impending wrath upon them. The people of Nineveh responded in faith and immediately too to the path of repentance. God heeded their cry and relented to their desire to change their way of life. For Jesus, it is the repentance of the people of Nineveh which is significant here. If they have the wisdom to recognize the authority of the prophet Jonah and repent, then surely Jesus’ generation should be able to do the same, given that Jesus is even greater than Jonah.
The same applies to the Queen of Sheba, who came a long way to look upon the greatness of Israel's king. Foreigners like the Queen of Sheba and the Ninevites, are better able to see the truth than the Israelites!
Perhaps we too are clouded by our own sense of righteousness and do not recognize the call of change God is bringing into our life. let us be watchful and recognize God’s voice in our life.
✍ -Fr. Ronald Melcum Vaughan
जनता स्वर्ग से कोइ विशेष चिह्न की माँ कर रही थी। येसु ने कोई चिह्न देने से इनकार किया क्योंकि वे स्वयं सब से बडा चिह्न हैं। वे अपने आप में अदृश्य ईश्वर को दर्श्य बनाते हैं। राजा सुलेमान के समय में लोगों ने उनकी प्रज्ञा के बारे में सुन कर उनकी शिक्षा सुनने आये थे। निनीवे नगर के लोगों ने नबी योना के प्रवचन सुन कर अपने पापों पर पश्चात्ताप किया। प्रभु येसु सुलेमान और योना से महान हैं। वे वास्तव में सुलेमान को प्रज्ञा देने वाले और योना को नबी बनाने वाले हैं। फिर भी धरती पर उनके शारीरिक जीवन-काल में कई लोग उन पर विश्वास करने के लिए कुछ विशेष चिह्न माँग रहे थे। प्रभु येसु उनकी माँग का इनकार किया। नबी योना एक चिह्न था। मछली के पेट चले जाने से पहले वह ईश्वर से दूर भागने वाला मनुष्य था। मछ्ली द्वारा उगल दिया गया योना ईश्वर की ओर वापस आकर ईश्वर की आज्ञा का पालन करने लगता है। पापी मनुष्य का पतिनिधि बन कर प्रभु येसु क्रूस पर मरते हैं; तीसरे दिन वे मुक्ति प्राप्त मनुष्य के प्रतिनिधि बन कर जी उठते हैं। इस्राएली लोगों को बहुत-से चिह्न दिये गये। परन्तु वे और भी बडे चिह्न माँगते रहे। हमें खुले हृदय से प्रभु येसु की महानता को समझ कर उनको स्वीकार करना चाहिए।
✍ -फादर फ्रांसिस स्करिया
The people were asking for an extraordinary sign from heaven. Jesus refused to give any sign, because he himself is the greatest sign. He makes the invisible God visible to them. The people at the time of King Solomon perceived his wisdom and came to listen to him. The people of Nineveh responded to the preaching of Jonah and repented over their sins. They came back to God listening to the message of repentance preached by Prophet Jonah. When Jesus who is greater than Jonah and Solomon preached, some people were still asking for extraordinary signs. Jesus did not want to respond to their cravings and give into their demands. Jonah was a sign for the people of Nineveh. Before he entered into the belly of the fish he was a man running away from God in disobedience. After he was spewed out upon the dry land by the fish, he was a man willing to obey God. Hence as per the command of the Lord, he went to Nineveh to preach the message of repentance. Jesus representing sinful humanity dies on the cross and on the third day he was raised by the Father as first among the Risen, among the redeemed. The people of Israel were given many signs, but they kept on demanding more and more. We have to learn to respond to Jesus with an open heart.
✍ -Fr. Francis Scaria