
अब हम अपने कुलपति इब्राहीम के विषय में क्या कहें? यदि इब्राहीम अपने कर्मों के कारण धार्मिक माने गये, तो वह अपने पर गर्व कर सकते हैं। किन्तु वह ईश्वर के सामने ऐसा नहीं कर सकते । क्योंकि धर्मग्रन्थ क्या कहता है? इब्राहीम ने ईश्वर में विश्वास किया और इसी से वह धार्मिक माने गये। जो काम करता है, उसे मजदूरी अनुग्रह के रूप में नहीं, बल्कि अधिकार के रूप में मिलती है। जो काम नहीं करता, किन्तु उस में विश्वास करता है जो अधर्मी को धार्मिक बनाता है, तो वह अपने विश्वास के कारण धार्मिक माना जाता है। इसी तरह दाऊद उस मनुष्य को धन्य कहते हैं जिसे, ईश्वर कर्मों के अभाव में भी धार्मिक मानता है धन्य हैं वे, जिनके अपराध क्षमा हुए हैं, जिनके पाप ढक दिये गये हैं। धन्य हैं वह मनुष्य, जिसके पाप का लेखा प्रभु नहीं रखता।
प्रभु की वाणी।
अनुवाक्य : हे प्रभु ! तू मेरा आश्रय है, तू मुझे मुक्ति के गीत गाने देता है।
1. धन्य है वह, जिसका अपराध क्षमा हुआ है, जिसका पाप मिट गया है। धन्य है वह, जिसे ईश्वर दोषी नहीं मानता और जिसका मन निष्कपट है
2. मैंने अपना अपराध स्वीकार किया, मैंने अपना दोष नहीं छिपाया । मैंने कहा, "मैं प्रभु के सामने अपना अपराध स्वीकार करूँगा।" तब तूने मेरा दोष मिटा दिया, तूने मेरा पाप क्षमा किया
3. हे धर्मियो ! प्रभु में आनन्द मनाओ। हे प्रभु-भक्तो ! उल्लसित हो कर आनन्द के गीत गाओ ।
अल्लेलूया ! हे प्रभु ! तेरा प्रेम हम पर बना रहे । तुझ पर ही हमारा भरोसा है। अल्लेलूया !
उस समय भीड़ इतनी बढ़ गयी थी कि लोग एक दूसरे को कुचल रहे थे। येसु मुख्य रूप से अपने शिष्यों से कहने लगे, “फरीसियों के कपटरूपी खमीर से सावधान रहो। ऐसा कुछ भी गुप्त नहीं है, जो प्रकाश में नहीं लाया जायेगा और ऐसा कुछ भी छिपा हुआ नहीं है, जो प्रकट नहीं किया जायेगा। तुमने जो कुछ अँधेरे में कहा है, वह उजाले में सुना जायेगा और तुमने जो कुछ एकांत में फुसफुसा कर कहा है, वह पुकार-पुकार कर दुहराया जायेगा ।" "मैं तुम, अपने मित्रों से कहता हूँ जो लोग शरीर को मार डालते हैं, परन्तु उसके बाद और कुछ नहीं कर सकते, उनसे नहीं डरो। मैं तुम्हें बताता हूँ कि किस से डरना चाहिए उस से डरो, जिसका मारने के बाद नरक में डालने का अधिकार है। हाँ, मैं तुम से कहता हूँ, उसी से डरो।" "क्या दो पैसे में पाँच गौरैयाँ नहीं बिकतीं? फिर भी ईश्वर उन में से एक को भी नहीं भुलाता है। हाँ, तुम्हारे सिर का बाल-बाल गिना हुआ है। इसलिए नहीं डरो। तुम बहुतेरी गौरैयों से बढ़ कर हो ।”
प्रभु का सुसमाचार।
आज का सुसमाचार अपने समय के धार्मिक अधिकारियों के विरुद्ध येसु की अंतिम आलोचना प्रस्तुत करता है। येसु अपने शिष्यों को फरीसियों के पाखंड से सावधान रहने को कहते हैं। पाखण्ड एक मनोवृत्ति है जो मूल्यों को पलट देती है। यह सच्चाई को छुपाता है। इस मामले में, पाखंड ईश्वर के वचन के प्रति अत्यधिक निष्ठा के स्पष्ट आवरण की तरह है जो उनके जीवन के विरोधाभास को छुपाता है। फरीसियों ने वास्तव में दोहरा जीवन जीया - मुखौटे, दिखावे, झूठ का जीवन, लोगो की राय पर निर्भर, दोहरा जीवन, ईश्वर के साथ एक लापरवाह और स्वार्थी रिश्ता है। यह सच है कि जो छिपा है वह एक दिन उजागर होगा। येसु इसके विपरीत चाहते हैं। येसु चाहते हैं कि हम विश्वास का सुसंगत और ईमानदार जीवन जियें। आइए हम सत्य के प्रति प्रेम में प्रभु का अनुकरण करें। आइए हम झूठ और जो कुछ भी पाखंड है उसे त्यागने का संकल्प लें।
✍फादर संजय कुजूर एस.वी.डी.Today’s Gospel presents a last criticism of Jesus against the religious authority of his time. Jesus tells his disciples to be aware of the hypocrisy of the Pharisees. Hypocrisy is an attitude which overturns the values. It hides the truth. In this case, hypocrisy is like the apparent cover of the extreme fidelity to the word of God which hides the contradiction of their life. The Pharisees in fact led a double life - one life of masks, appearances, falsehood, which depended on the opinion of men; the other life, a careless and selfish relationship with God. It is the fact that what is hidden will one day be revealed. Jesus wants the contrary. Jesus wants us to lead coherent and sincere lives of faith. Let us imitate the Lord in his love for the truth. Let us resolve to shun falsehood and whatever is hypocrisy.
✍ -Fr. Sanjay Kujur SVD
लोगों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सामान्य नारा है 'जियो जैसे आप बात करते हो', जिसका अर्थ है कि हम जो उपदेश देते हैं उसका अभ्यास करते हैं, और जो हम मानते हैं उसे जीते हैं। पाखंड किसी के आध्यात्मिक जीवन के लिए कैंसर है। पूरे आटे को प्रभावित करने के लिए केवल थोड़ा सा खमीर लगता है। अच्छे इरादों को कमजोर करने के लिए केवल थोड़ा पाखंड लगता है।
हम जिस ढोंग में रहते हैं, उसके कारण ईश्वर के साथ हमारा पवित्र संबंध खराब हो गया है। लोगों के सामने हम अच्छे, पवित्र और प्रस्तुत करने योग्य बनने की कोशिश करते हैं लेकिन ईश्वर के सामने हम नंगे हैं। ईश्वर हमें हमेशा देखते है। वह हमारे सभी कार्यों पर नजर रखते है। हम कुछ समय के लिए अपने दोहरे स्वाभाव को छुपाने में सक्षम हो सकते हैं लेकिन लंबे समय में यह उजागर हो जाता है।
येसु पाखंड पर सख्त हैं, अक्सर उन लोगों पर कठोर होते हैं जो धर्म का उपयोग अपने स्वार्थ के लिए करते हैं। वह इसकी तुलना उस खमीर से करते है, जो कम मात्रा में होते हुए भी स्वंय और दूसरों के जीवन को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। ईश्वर के सामने, सभी ढोंग अंततः उजागर हो जाते हैं। ईश्वर के लिये कुछ भी अनदेखा नहीं हैं। ईश्वर उनके साथ हमारे संबंधों की प्रामाणिकता की हमारी खोज में हमारा समर्थन करते है। येसु हमें ईमानदारी और अखंडता के लिए आमंत्रित करते हैं, हमें यह महसूस करने में मदद करते हैं कि उनकी उपस्थिति में ढोंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन पूरी तरह से हम जो हैं वह हो सकते हैं। बहुत बार हम अपने स्वयं के पाखंड से अवगत नहीं होते हैं, इसलिए हम प्रकाश और शुद्ध हृदय की कृपा मांगते हैं। धन्य हैं वे जो हृदय के शुद्ध हैं क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।
✍फादर रोनाल्ड मेलकम वॉनWalk it as you talk it' is a common slogan people use, with the meaning that we practice what we preach, and live what we believe. Hypocrisy is cancer to one’s spiritual life. It only takes a little yeast to affect an entire batch of dough. It only takes a little hypocrisy to undermine the best intentions.
Our sacred relationship with God is vandalized due to the pretense we live. Before people, we try to be good, pious, and presentable but before God, we are bare naked. God sees us always. He watches over all our actions. We may be able to hide our dual self for some time but in the long run, it is exposed.
Jesus is tough on hypocrisy, often hard on people who use religion for their own ends. He compares it to the yeast which, though small in quantity can wreak great damage to my life and that of others. Before God, all pretense is eventually uncovered. God misses nothing. Our relationship with God supports us in our search for authenticity. Jesus invites us to honesty and integrity, helping us to realize that there is no need to pretend in his presence but can be fully who we are. Very often we are not aware of our own hypocrisy, so we ask for the grace of light, and of a pure heart. Blessed are the pure of heart for they will see God.
✍ -Fr. Ronald Melcum Vaughan