सामान्य काल का चौथा सप्ताह, शुक्रवार - वर्ष 2

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पहला पाठ

प्रवक्ताव-ग्रन्थ 47:2-11

“दाऊद अपने सृष्टिकर्त्ता के प्रति अपना प्रेम प्रकट करने के लिए सारे हृदय से गीत गाया करता था।”

जिस प्रकार प्रायश्चित के बलिदान में चरबी अलग की जाती है, उसी प्रकार दाऊद को इस्राएलियों में से चुना गया था। वह सिंहों के साथ खेलता था, मानो वे बकरी के बच्चे हों, और भालुओं के साथ खेलता था, मानो वे छोटे मेमने हों। उसने अपनी जवानी में भीमकाय योद्धा को मारा और अपने राष्ट्र का कलंक दूर किया। उसने हाथ से ढेलवाँस का पत्थर मारा और गोलयत का घमण्ड चूर-चूर कर दिया। क्योंकि उसने सर्वोच्च प्रभु से प्रार्थना की और उसने उसके दाहिने हाथ को शक्ति प्रदान की, जिससे वह बलवान योद्धा को पछाड़ कर अपनी प्रजा को शक्तिशाली बना सके। इसलिए लोगों ने उसे “दस हजार का विजेता' घोषित किया, ईश्वर के आशीर्वाद के कारण उसकी स्तुति की और उसे महिमा का मुकुट पहना दिया। क्योंकि उसने चारों ओर के शत्रुओं को परास्त किया और अपने फिलिस्तीनी विरोधियों का सर्वनाश किया। उसने सदा के लिए उनकी शक्ति समाप्त कर दी। वह अपने सब कार्यों में धन्यवाद देते हुए परमपावन सर्वोच्च ईश्वर की स्तुति करता रहा। वह अपने सृष्टिकर्त्त के प्रति अपना प्रेम प्रकट करने के लिए सारे हृदय से गीत गाया करता था। उसने गायकों को नियुक्त किया, जिससे वे वेदी के सामने खड़े हो कर मधुर गान सुनायें। उसने पर्वो के भव्य समारोह का प्रबन्ध किया और सदा के लिए पर्वचक्र निर्धारित किया, जिससे प्रभु का मंदिर प्रातःकाल से ही उसके पवित्र नाम की स्तुति से गूँज उठे। प्रभु ने उसके पाप क्षमा किये और सदा के लिए उसे शक्तिशाली बना दिया। उसने उसे राज्याधिकार तथा इस्राएल का महिमामय सिंहासन प्रदान किया।

प्रभु की वाणी।

भजन : स्तोत्र 17:31,47,50-51

अनुवाक्य : मेरे मुक्तिदाता प्रभु की स्तुति हो।

प्रभु का मार्ग निर्दोष है। उसकी प्रतिज्ञा परिष्कृत स्वर्ण के सदृश है। वह उन सबों की रक्षा करता है, जो उसकी शरण में जाते हैं।

प्रभु की जय! धन्य हे मेरी चट्टान ! मेरे मुक्तिदाता ईश्वर की स्तुति हो। हे प्रभु ! मैं राष्ट्रों के बीच तेरी स्तुति करूँगा, मैं तेरे प्रेम की महिमा का गीत गाऊँगा।

जिसका तूने राज्याभिषेक किया है, उसे तू सँभालता और विजय दिलाता है। दाऊद और उसके उत्तराधिकारियों के लिए तेरा प्रेम सदा बना रहता है।

जयघोष : लूकस 8:15

अल्लेलूया ! धन्य हैं वे, जो सच्चे और निष्कपट हृदय से ईश्वर का वचन सुरक्षित रखते हैं और अपने धीरज के कारण फल लाते हैं। अल्लेलूया !

सुसमाचार

मारकुस के अनुसार पवित्र सुसमाचार 6:14-29

“यह योहन ही है, जिसका सिर मैंने कटवाया और जो जी उठा है।”

हेरोद ने येसु की चरचा सुनी, क्योंकि उनका नाम प्रसिद्ध हो गया था। लोग कहते थे - योहन बपतिस्ता मृतकों में से जी उठा है, इसलिए वह ये महान्‌ चमत्कार दिखा रहा है। कुछ लोग कहते थे यह एलियस है। कुछ लोग कहते थे - यह पुराने नबियों की तरह कोई नबी है। हेरोद ने यह सब सुन कर कहा, “यह योहन ही है, जिसका सिर मैंने कटवाया और जो जी उठा है।” हेरोद ने अपने भाई फिलिप की पत्ली हेरोदियस के कारण योहन को गिरफ्तार किया और बन्दीगृह में बाँध रखा था; क्योंकि हेरोद ने हेरोदियस से विवाह किया था और योहन ने हेरोद से कहा था, “अपने भाई की पत्नी को रखना आपके लिए उचित नहीं है।” इसी से हेरोदियस योहन से बैर रखती थी और उसे मार डालना चाहती थी; किन्तु वह ऐसा नहीं कर पाती थी, क्योंकि हेरोद योहन को धर्मात्मा और सन्त जान कर उस पर श्रद्धा रखता और उसकी रक्षा करता था। हेरोद उसके उपदेश सुन कर बड़े असमंजस में पड़ जाता था। फिर भी, वह उसकी बातें सुनना पसंद करता था। हेराद्‌ के जन्म-दिवस पर हेरोदियस को एक सुअवसर मिला। उस उत्सव के उपलक्ष्य में हेरोद ने अपने दरबारियों, सेनापतियों और गलीलिया के रइसों को भोज दिया। उस अवसर पर हेरोदियस की बेटी ने अंदर आ कर नृत्य किया और हेरोद तथा उसके अतिथियों को मुग्ध कर लिया। राजा ने लड़की से कहा, “जो भी चाहो, मुझ से माँगो। मैं तुम्हें दे दूँगा”, और उसने शपथ खा कर कहा, “जो भी माँगो, चाहे मेरा आधा राज्य ही क्यों न हो, मैं तुम्हें दे दूँगा।” लड़की ने बाहर जा कर अपनी माँ से पूछा, “मैं क्या माँगूँ"? उसने कहा, “योहन बपतिस्ता का सिर।” वह तुरन्त राजा के पास दौड़ती हुई आयी और बोली, “मैं चाहती हूँ कि आप मुझे इसी समय थाली में योहन बपतिस्ता का सिर दे दें।” राजा को धक्का लगा, परन्तु अपनी शपथ और अतिथियों के कारण वह उसकी माँग अस्वीकार करना नहीं चाहता था। राजा ने तुरन्त जल्लाद को भेज कर योहन का सिर ले आने का आदेश दिया। जल्लाद ने जा कर बन्दीगृह में उसका सिर काट डाला और उसे थाली में ला कर लड़की को दिया और लड़की ने उसे अपनी माँ को दे दिया। जब योहन के शिष्यों को इसका पता चला, तो वे आ कर उसका शव ले गये और उन्होंने उसे कब्र में रख दिया।

प्रभु का सुसमाचार।


मनन-चिंतन

आज के सुसमाचार में, हम राजा हेरोद द्वारा योहन बपतिस्ता का प्राणदंड की कहानी को पातेे हैं। योहन निर्जन स्थान में एक शक्तिशाली आवाज था, जो पश्चाताप और मसीहा के आने का आह्वान कर रहा था। उसने राजा हेरोद को अपने भाई की पत्नी से शादी करने सहित उनके अनैतिक व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की थी। परिणामस्वरूप, राजा हेरोद ने योहन को गिरफ्तार कर लिया और अंततः हेरोदियस, जिस पत्नी को उसने लिया था, के अनुरोध पर उसका सिर कलम कर दिया।

यह पाठ सच बोलने और अपने सिद्धांत के लिए खड़े होने की कीमत का एक शक्तिशाली अनुस्मारक है। योहन ने अपने विश्वास और अपने दृढ़ता के लिए अंतिम कीमत चुकाई। वह सत्ता में बैठे लोगों के भ्रष्टाचार और अनैतिकता के खिलाफ बोलने को तैयार थे, यहां तक कि अपनी जान जोखिम में डालकर भी। ऐसी दुनिया में जहां व्यक्तिगत लाभ या सामाजिक स्वीकृति के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करना आसान हो सकता है, योहन की यह घटना साहस और विश्वास के एक शक्तिशाली उदाहरण के रूप में कार्य करती है जो वास्तव में मसीह का अनुसरण करने के लिए आवश्यक है।

- -फादर डेन्नीस तिग्गा (भोपाल महाधर्मप्रान्त)


REFLECTION


In today’s gospel, we see the story of the execution of John the Baptist by King Herod. John had been a powerful voice in the wilderness, calling for repentance and the coming of the Messiah. He had also publicly criticized King Herod for his immoral behavior, including marrying his brother's wife. As a result, King Herod had John arrested and ultimately beheaded at the request of Herodias, the wife he had taken.

This passage is a powerful reminder of the cost of speaking the truth and standing up for one's beliefs. John paid the ultimate price for his faith and his convictions. He was willing to speak out against the corruption and immorality of those in power, even at the risk of his own life. In a world where it can be easy to compromise our beliefs for the sake of personal gain or societal acceptance, John's story serves as a powerful example of the courage and faith that is required to truly follow Christ.

- Fr. Dennis Tigga (Bhopal Archdiocese)

मनन-चिंतन -2

हम आनंद और मनोरंजन की दुनिया में रह रहे हैं। आज दुनिया में लोग अपने जीवन में आनंद और सुख की प्राप्ति के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहते हैं विभिन्न प्रकार की सुख-सुविधाओं के विभिन्न विकल्पों के साथ प्राप्त करना चाहते हैं। आज के सुसमाचार में राजा हेरोद, आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है, जो अपने भाई की पत्नी को अपने शारीरिक सुख के लिए रख लेता है और योहन बपतिस्ता को एक नृत्य के आनंद के लिए पुरस्कार के रूप में मारवा देता है। हेरोद की तरह लोग आज भी अपनी इच्छाओं की संतुष्टि के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। आज कल हत्या, बलात्कार और लूटपाट और धोखाधड़ी की कई सारी वारदातें इसलिए होती है क्योंकि लोग अपनी सांसारिक इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं और उसके लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं।

मानव जीवन, मानवीय संबंध और मानवीय गरिमा हमारे व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर होनी चाहिए। किसी और का नाम, गरिमा या जीवन समाप्त करके कुछ भी हासिल करना कोई जीत नहीं है। यह कायर लोगों का काम है। हमें बुराई के साथ समझौता करने की जरूरत नहीं है, चाहे जो कुछ भी हो जाये । हमें दूसरे के सुख की तलाश करनी होगी, इसके लिए कभी-कभी हमें अपने आराम और सुख का त्याग करना पड़ सकता है। आइए हम हेरोद न बनें बल्कि योहन बपतिस्ता की तरह बनें जो बुराई का सामना करता है और सच्चाई के लिए खड़ा होता है।

- -फादर प्रीतम वसूनिया (इन्दौर धर्मप्रान्त)


REFLECTION


We are living in the world of pleasure and entertainment. People in the world want to enjoy their life with various wide varieties of options of pleasure available. Herod in today’s Gospel, represents today’s world, who takes his brother’s wife for his own pleasure and gets John the Baptist killed as a reward for enjoyment of a dance. Like Herod people today are ready to do anything for the gratification of their desires. The number of murders, rapes, and lootings and cheatings takes place just because of people want to satisfy their worldly desires.

Human life, human relations and human dignity should be above our personal selfishness. Gaining anything by eliminating someone else’s name, dignity or life is not a victory. This is the work of cowardly people. We don’t need to compromise with the evil, come what may. We need to look for other’s happiness and good for this sometimes we may have to sacrifice our comfort and pleasure. Let us not be Herod but be like John the Baptist who confronted the evil and stood for the truth.

- Fr. Preetam Vasuniya (Indore)