
प्रिय भाइयो ! आप यह अच्छी तरह समझ लें : प्रत्येक व्यक्ति सुनने के लिए तत्पर रहे; किन्तु बोलने और क्रोध करने में देर करे। क्योंकि मनुष्य का क्रोध उस धार्मिकता में सहायक नहीं होता, जिसे ईश्वर चाहता है। इसलिए आप लोग हर प्रकार की मलिनता और बुराई को दूर कर नम्नतापूर्वक ईश्वर का वह वचन ग्रहण कीजिए, जो आप में रोपा गया है और आपकी आत्माओं का उद्धार करने में समर्थ है। आप लोग अपने को धोखा नहीं दें; वचन के श्रोता ही नहीं, बल्कि उसके पालनकर्त्ता भी बन जायें। जो व्यक्ति वचन सुनता है, किन्तु उसके अनुसार आचरण नहीं करता, वह उस मनुष्य के सदृश है जो दर्पण में अपना चेहरा देखता है। वह अपने को देख कर चला जाता है और उसे याद नहीं रहता कि उसका अपना स्वरूप कैसा है। किन्तु जो व्यक्ति उस संहिता को, जो पूर्ण है और उसे स्वतन्त्रता प्रदान करती है, ध्यान से देखता और उसका पालन करता है, वह उस श्रोता के सदृश नहीं, जो तुरन्त भूल जाता है, बल्कि वह कर्त्ता बन जाता और उस संहिता को अपने जीवन में चरितार्थ करता है। वह अपने आचरण के कारण धन्य होगा। यदि कोई अपने को धार्मिक मानता है, किन्तु अपनी जीभ पर नियन्त्रण नहीं रखता, तो वह अपने को धोखा देता है और उसका धर्माचरण व्यर्थ है। हमारे ईश्वर और पिता की दृष्टि में शुद्ध और निर्मल धर्मांचरण यह है - विपत्ति में पड़े हुए अनाथों और विधवाओं की सहायता करना और अपने को संसार के दूषण से बचाये रखना।
प्रभु की वाणी।
अनुवाक्य : हे प्रभु ! कौन तेरे पवित्र पर्वत पर निवास कर पायेगा?
1. जिसका आचरण निदोंष है, जो सदा सत्कार्य करता है, जो हृदय से सत्य बोलता है और चुगली नहीं खाता।
2. जो अपने भाई को नहीं ठगता और अपने पड़ोसी की निन्दा नहीं करता, जो विधर्मी को तुच्छ समझता और प्रभु-भक्तों का आदर करता है।
3. जो उधार दे कर ब्याज नहीं माँगता और निर्दोष के विरुद्ध घूस नहीं लेता- जो ऐसा आचरण करता है, वह कभी भी विचलित नहीं होगा।
अल्लेलूया ! हमारे प्रभु येसु मसीह का पिता आप लोगों के मन की आँखों को ज्योति प्रदान करे, जिससे आप यह देख सकें कि उसके द्वारा बुलाये जाने के कारण हमारी आशा कितनी महान् है। अल्लेलूया !
येसु और उनके शिष्य बेथसाइदा पहुँचे। लोग एक अंधे को येसु के पास ले आये और उन्होंने यह प्रार्थना की कि आप उस पर हांथ रख दीजिए। वह अंधे का हाथ पकड़ कर उसे गाँव के बाहर ले गये। वहाँ उन्होंने उसकी आँखों पर अपना थूक लगा कर और उस पर हाथ रख कर उस से पूछा, “क्या तुम्हें कुछ दिखाई दे रहा है?" अंधा कुछ-कुछ देखने लगा था, इसलिए उसने उत्तर दिया, “मैं लोगों को देखता हूँ। वे पेड़ों जैसे लगते, पर चलते हैं।” तब उन्होंने फिर अंधे की आँखों पर हाथ रख दिये और वह अच्छी तरह देखने लगा। वह चंगा हो गया और दूर तक सब कुछ साफ-साफ देख सकता था। येसु ने उसे यह कह कर घर भेजा, “इस गाँव के अन्दर पैर मत रखना।”
प्रभु का सुसमाचार।
हम व्यापार और व्याकुलता की दुनिया में रहते हैं। कुछ सबसे महान और सबसे अधिक विश्वास बढ़ाने वाले समय होते हैं जब हम पूरी तरह से ईश्वर के साथ अकेले में होते हैं। सुसमाचार में, येसु उस अंधे व्यक्ति को धीरे से ले जाते है जहाँ वह अपने आप नहीं जा सकता था। न केवल उस व्यक्ति को मसीह के साथ अकेले रहने के लिए लिया गया था, बल्कि संभावित रूप से चमत्कार दो चरणों में पूरा किया गया था। इससे पता चलता है कि उस व्यक्ति की देखभाल किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती थी जो उसे घनिष्ठ रूप से जानता था। येसु ने अंधे व्यक्ति को धैर्यपूर्वक अपने विश्वास में बढ़ने में मदद की। येसु ने उसे अविश्वास से विश्वास की ओर बढ़ने में मदद की। यह अक्सर येसु के साथ सहभागिता में होता है कि हम पूरी तरह से उनके उपचारात्मक स्पर्श का अनुभव करते हैं। उसी तरह, हमें आध्यात्मिक नवीनीकरण के लिए एकांत के विशेष स्थानों पर येसु का अनुसरण करने के लिए तैयार रहना चाहिए। क्या मैं येसु के नेतृत्व में एकांत स्थान पर जाने के लिए तैयार हूँ?
✍ - फादर संजय कुजूर एस.वी.डी
We live in a world of business and distraction. Some of the greatest and most faith-growing times happen when we are completely alone with God. In the gospel, Jesus leads the blind man gently where he would not have gone on his own. Not only was the man taken to be alone with Christ, but potentially the miracle was accomplished in two steps. This shows that the person was cared by someone who knew him intimately. Jesus helps the blind man to grow in his faith patiently. Jesus helped him to move from unbelief to belief. It is often in communion with Jesus that we experience fully His healing touch. In the same way, we must be willing to follow Jesus to special places of solitude for spiritual renewal. Am I ready to be led by Jesus to a place of solitude?
✍ -Fr. Sanjay Kujur SVD
आज का सुसमाचार बताता है कि कैसे येसु ने बेथसाइदा में एक अंधे व्यक्ति को चंगा किया था। वे अन्धे का हाथ पकड़ कर उसे गाँव के बाहर ले जाते हैं। वे उसे चरणों में चंगा करते हैं। अंधा आदमी धीरे-धीरे देखने लगता है। शुरू में वह अस्पष्ट देखता है। अंत में, वह सब कुछ स्पष्ट रूप से देखता है। फिर येसु ने उसे गाँव में न जाने को कहा। इस तथ्य से कि येसु ने उसे गाँव से निकाल दिया और उसे चेतावनी दी कि वह गाँव में न जाए, हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि गाँव के वातावरण का उसके दुर्भाग्य से कुछ लेना-देना है। संभवतः येसु गांव के बुरे प्रभावों और ताकतों के खिलाफ चेतावनी दे रहे थे। बेथसाइदा उन स्थानों में से एक है जहाँ येसु ने ईश्वर के कार्य का सहयोग न देने के बारे में चेतावनी दी थी। मत्ती 11:21-22 में प्रभु कहते हैं, “"धिक्कार तुझे, खोराज़िन! धिक्कार तुझे, बेथसाइदा! जो चमत्कार तुम में किये गये हैं, यदि वे तीरूस और सिदोन में किये गये होते, तो उन्होंने न जाने कब से टाट ओढ़ कर और भस्म रमा कर पश्चाताप किया होता। इसलिए मैं तुम से कहता हूँ, न्याय के दिन तेरी दशा की अपेक्षा तीरूस और सिदोन की दशा कहीं अधिक सहनीय होगी।“ येसु शायद हमें बुरी परिस्थितियों और दोस्ती के खिलाफ चेतावनी देते हैं, जिनसे हमें ख्रीस्तीय जीवन में बचने की जरूरत है।
✍ -फादर फ्रांसिस स्करिया
Today’s gospel narrates how Jesus healed a blind man at Bethsaida. He leads the blind man by the hand outside the village. He heals him in stages. The blind man receives healing in a gradual process. Initially he sees dimly and vaguely. Finally, he sees everything plainly and distinctly. At the end Jesus tells him not to go into the village. From the fact that Jesus took him out of the village and warned him not to go into the village, we can conclude that the atmosphere in the village has something to do with his misfortune. Probably Jesus was warning against the evil influences and forces in the village. Bethsaida is one of the places Jesus warned about for not responding to the work of God. In Mt 11:21-22, Jesus says, “Woe to you, Chorazin! Woe to you, Bethsaida! For if the deeds of power done in you had been done in Tyre and Sidon, they would have repented long ago in sackcloth and ashes. But I tell you, on the day of judgment it will be more tolerable for Tyre and Sidon than for you.” Jesus probably warns us against evil circumstances and friendships that we need avoid in Christian life.
✍ -Fr. Francis Scaria