वर्ष का इक्कीसवाँ सप्ताह, बृहस्पतिवार - वर्ष 2

🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥

पहला पाठ

कुरिंथियों के नाम सन्त पौलुस का पहला पत्र 1:1-9

"आप लोग मसीह से संयुक्त हो कर सब प्रकार के वरदानों से सम्पन्न हो गये हैं।"

कुरिंथ में ईश्वर की कलीसिया के नाम पौलुस, जो ईश्वर द्वारा येसु मसीह का प्रेरित नियुक्त हुआ है, और भाई सोस्थिनुस का पत्र। आप लोग येसु मसीह द्वारा पवित्र किये गये हैं और उन सबों के साथ सन्त बनने के लिए बुलाये गये हैं, जो कहीं भी हमारे प्रभु येसु मसीह अर्थात् अपने तथा हमारे प्रभु का नाम लेते हैं। हमारा पिता-ईश्वर और प्रभु येसु मसीह आप लोगों को अनुग्रह तथा शांति प्रदान करें। आप लोगों को येसु मसीह द्वारा ईश्वर का अनुग्रह प्राप्त हुआ है; इसके लिए मैं ईश्वर को निरन्तर धन्यवाद देता हूँ। मसीह का सन्देश आप लोगों के बीच इस प्रकार दृढ़ हो गया है कि आप लोग मसीह से संयुक्त हो 586 इक्कीसवाँ सप्ताह शुक्रवार कर, अभिव्यक्ति और ज्ञान के सब प्रकार के वरदानों से सम्पन्न हो गये हैं। आप लोगों में किसी कृपादान की कमी नहीं है और अब आप हमारे प्रभु येसु मसीह के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ईश्वर अंत तक आप लोगों को विश्वास में सुदृढ़ बनाये रखेगा, जिससे आप प्रभु येसु मसीह के दिन निर्दोष पाये जायें। ईश्वर सत्यप्रतिज्ञ हैं। उसी ने अपने पुत्र हमारे प्रभु येसु मसीह के सहभागी बनने के लिए आप लोगों को बुलाया है।

प्रभु की वाणी।

भजन : स्तोत्र 144:2-7

अनुवाक्य : हे प्रभु ! मैं सदा-सेर्वदा तेरा नाम धन्य कहूँगा।

1. मैं दिन-प्रतिदिन तुझे धन्य कहूँगा, मैं सदा-सर्वदा तेरे नाम की स्तुति करूँगा। प्रभु महान् और अत्यन्त प्रशंसनीय है। उनकी महिमा की सीमा नहीं।

2. सभी पीढ़ियाँ तेरी सृष्टि की स्तुति करेंगी और तेरे महान् कार्यों का बखान करती रहेंगी, तेरे ऐश्वर्य तथा तेरी महिमा का वर्णन करेंगी और तेरे चमत्कारों के गीत गाती रहेंगी।

3. वे तेरे विस्मयकारी कर्मों का और तेरी महिमा तथा सामर्थ्य का वर्णन करेंगी। वे तेरी अपार कृपा की चरचा करती रहेंगी और तेरी न्यायप्रियता घोषित करेंगी।

जयघोष

अल्लेलूया ! जागते रहो और तैयार रहो; क्योंकि तुम नहीं जानते कि मानव पुत्र किस घड़ी आयेगा। अल्लेलूया !

सुसमाचार

मत्ती के अनुसार पवित्र सुसमाचार 24,42-51

"तैयार रहो।"

येसु ने अपने शिष्यों से यह कहा, "जागते रहो; क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारे प्रभु किस दिन आयेंगे। यह अच्छी तरह समझ लो – यदि घर के स्वामी को मालूम होता कि चोर रात के किस पहर आयेगा, तो वह जागता रहता और अपने घर में सेंध लगने नहीं देता। इसलिए तुम लोग भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम उसके आने की नहीं सोचते, उसी घड़ी मानव पुत्र आयेगा।" "कौन ऐसा ईमानदार और बुद्धिमान सेवक है, जिसे उसके स्वामी ने अपने नौकर-चाकरों पर नियुक्त किया है, जिससे वह समय पर उन्हें रसद बाँटा करे? धन्य है वह सेवक, जिसका स्वामी आने पर उसे ऐसा ही करता हुआ पायेगा ! मैं तुम लोगों से कहे देता हूँ - वह उसे अपनी सारी सम्पत्ति पर नियुक्त करेगा।" "परन्तु यदि वह बेईमान सेवक अपने मन में कहे, 'मेरा स्वामी आने में देर करता है' और वह दूसरे नौकरों को पीटने और शराबियों के साथ खाने-पीने लगे, तो उस सेवक का स्वामी ऐसे दिन आयेगा जब वह उसकी प्रतीक्षा नहीं कर रहा होगा और ऐसी घड़ी, जिसे वह नहीं जान पायेगा। तब स्वामी उसे कोड़े लगवायेगा और ढोंगियों का दण्ड देगा। वहाँ वे लोग रोयेंगे और दाँत पीसते रहेंगे।"

प्रभु का सुसमाचार।


📚 मनन-चिंतन

"जागते रहो!" ये आज हमारे लिए येसु के वचन हैं। वह हमें बताते है कि हम उस दिन या समय को नहीं जानते जब प्रभु हमारे पास आएंगे। सुसमाचार में येसु हमारे सामने दो प्रकार के सेवकों को प्रस्तुत करता है: ईमानदार और बेईमान सेवक। पहला सेवक मालिक द्वारा उसकी देखभाल के लिए सौंपी गई जिम्मेदारी को जानता है। वह इसे बेहद प्यार और जिम्मेदारी की भावना के साथ निभाते हैं। इस संदर्भ में, प्रेम और जिम्मेदारी के तत्व, सेवक और स्वामी के बीच विश्वास के अपरिहार्य तत्व के साथ-साथ चलते हैं। प्रेम वह प्रेरक शक्ति थी जिसने पहले सेवक को अपने स्वामी की अनुपस्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। जबकि, दूसरा सेवक, स्वामी द्वारा सौंपे गए अपने उत्तरदायित्व को जानता है, परन्तु स्वामी की अनुपस्थिति का लाभ उठाता है और स्वामी के प्रेम और विश्वास की परवाह किए बिना, लापरवाह जीवन जीने लगता है। दूसरा नौकर स्वामी के साथ आपसी तालमेल की कमी के कारण जिम्मेदारी से अपना काम पूरा करने में विफल रहा।

- फादर संजय कुजूर एस.वी.डी.


📚 REFLECTION

“Stay awake!” These are Jesus’ words to us today. He tells us that we do not know the day or the time when the Lord will come to us. In the gospel Jesus presents before us two types of servants: the faithful and an unfaithful servant. The first servant knows the responsibility entrusted to his care by the Master. He carries it out with an utmost love and sense of responsibility. In this context, the elements of love and responsibility go hand in hand with the indispensable element of trust, between the servant and the Master. Love was the driving force that made the first servant carry out his responsibility in the absence of his Master. Whereas, the second servant, knows his responsibility entrusted by the Master, but takes advantage of the Master’s absence and began to live a reckless life, unmindful of the Master’s love and trust. The second servant failed to carry out his assignment responsibly due to lack of mutual confidential rapport with the Master.

-Fr. Snjay Kujur SVD

📚 मनन-चिंतन - 2

“इसलिए जागते रहो क्योंकि तुम नहीं जानते कि किस घड़ी प्रभु आएगा।” हम प्रभु के सेवक मात्र हैं। हमारे जन्म लेने से पहले ही ईश्वर ने हमें चुना है और एक ज़िम्मेदारी दी है (यिरमियाह 1:5)। ईश्वर ने हम में से प्रत्येक व्यक्ति को अपनी योजना पूरी करने के लिए चुना है, लेकिन उसने समय निश्चित नहीं किया कब वह हमसे हमारे काम का लेखा-जोखा लेगा, और कब हमें अपने सामने प्रस्तुत होने के लिए बुलाएगा। आज का सुसमाचार हमारी उससे मुलाक़ात की तैयारी के बारे में ही है।

हमें प्रत्येक को जो ज़िम्मेदारी दी है उसे हमें पूरी वफ़ादारी और ईमानदारी से निभाना है। उदाहरण के लिए यदि मैं एक अध्यापक/अध्यापिका हूँ तो मुझे अपना काम इस तरह करना है मानो ईश्वर मुझसे लेखा-जोखा लेगा कि मैंने अपना काम कितनी ईमानदारी और लगन से किया। यही बात नर्स के कार्य के साथ भी है कि कितनी ईमानदारी और सेवा भाव से मैंने रोगियों के रूप में प्रभु की सेवा की, या फिर हम कोई प्राइवेट नौकरी या सरकारी नौकरी करते हों, क्या हम अपने काम को उसी तरह से करते हैं जैसे ईश्वर चाहते हैं? हम जीवन में अलग-अलग भूमिकाएँ भी निभाते हैं, माता, पिता, बहन, पुत्र/पुत्री, विद्यार्थी, आदि क्या मैं अपनी भूमिका पूर्ण ईमानदारी से निभा रहा हूँ? संत मोनिका एक आदर्श माँ हैं जिसने एक माँ होने की, पत्नी होने की, बहु होने की, आदर्श पड़ौसी होने की अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाया और आज वो एक संत हैं।

- फादर जॉन्सन बी. मरिया (ग्वालियर धर्मप्रान्त)


📚 REFLECTION

“Stay awake then, for you do not know on what day your Lord will come.” We are the servants of the Lord. Each one of us has been entrusted with a responsibility even before we were born (cf. Jer.1:5). God has chosen each one of us for a task and a responsibility to fulfil, but he has not given a deadline so as to when he will ask us to give account or when we will be called to him. The passage of today is certainly about our preparedness.

Each one of us is called to fulfil the role we are assigned with faithfulness and sincerity. If I am a teacher, I have to do my job as if Lord is going to take account of my work, how sincerely and faithfully I do my job so is the case with nurse, how faithfully and sincerely did I serve the Lord as a nurse, or I am in a government or private job, am I doing my job as the Lord would want me to do it? We have various roles to play – a mother, a father, a sister, a child, a student etc., am I fulfilling my responsibility with utmost faithfulness. St. Monica is one of the ideal mother that fulfilled her responsibility faithfully as mother, wife, daughter-in-law, neighbour etc and became a saint.

-Fr. Johnson B.Maria (Gwalior)