
योब ने अपने जन्म-दिवस को कोसते हुए कहा, "विनाश हो उस दिन का, जब मैं पैदा हुआ था। विनाश हो उस रात को, जो कहती थी, 'एक बालक का गर्भाधान हुआ है'। मैं गर्भ में ही क्यों नहीं मर गया? मैं जन्म लेते ही क्यों नष्ट नहीं हुआ? सँभालने के लिए दो घुटने क्यों थे? मुझे दूध पिलाने के लिए दो स्तन क्यों थे? समय से पहले गिरे हुए गर्भ की तरह मुझे क्यों नहीं गाड़ा गया, उन बच्चों की तरह, जो दिन का प्रकाश, कभी नहीं देखते? यदि ऐसा हुआ होता, तो मैं अभी शांतिपूर्ण समाधि में पड़ा रहता और निश्चिन्त हो कर चिरनिद्रा में लीन होता, उन राजाओं और देश के शासकों के साथ जिन्होंने अपने लिए मकबरे बनवाये, उन राजकुमारों के साथ, जिनके पास बहुत सोना था और जिन्होंने अपने भवन चाँदी से भर लिये। वहाँ दुष्ट लोग किसी को तंग नहीं करते और थके-मांदे विश्राम पाते हैं। दुःखियों को दिन का प्रकाश और अभागे लोगों को जीवन क्यों दिया जाता है? वे मृत्यु की प्रतीक्षा करते हैं, किन्तु वह आती नहीं, वे उसे छिपे हुए खजाने से कहीं अधिक खोजते हैं। वे मकबरा देख कर हर्षित हो जाते और कब्र में पहुँचने पर आनन्द मनाते हैं। उस मनुष्य को जीवन क्यों दिया जाता है, जो अपना मार्ग नहीं देखता और जिसे ईश्वर चारों ओर से बाधित करता है?"
प्रभु की वाणी।
अनुवाक्य : हे प्रभु ! मेरी प्रार्थना तेरे पास पहुँचे ।
1. हे प्रभु! मेरे ईश्वर ! मैं दिन भर तेरी दुहाई देता हूँ, मैं रात को तेरे सामने रोता हूँ। मेरी प्रार्थना तेरे पास पहुँचे, मेरी दुहाई पर ध्यान देने की कृपा कर
2. मैं कष्टों से घिरा हुआ हूँ, मैं अधोलोक के द्वार पर पहुँचा हूँ। लोग मुझे मरा हुआ समझते हैं। मेरी सारी शक्ति समाप्त हो गयी है
3. मैं मृतकों में एक जैसा हो गया हूँ, उन लोगों के सदृश जो कब्र में पड़े हुए हैं, जिन्हें तू याद नहीं करता, जिन्हें तू सहायता नहीं देता
4. तूने मुझे गहरी कब्र में डाल दिया, अँधेरे में, मृत्यु की छाया में। तेरे क्रोध का भार मुझे दबाता है, उसकी लहरें मुझे डुबा कर ले जाती हैं।
अल्लेलूया ! मानव पुत्र सेवा करने और बहुतों के उद्धार के लिए अपने प्राण देने आया है। अल्लेलूया !
अपने स्वर्गारोहण का समय निकट आने पर येसु ने येरुसालेम जाने का निश्चय किया और संदेश देने वालों को अपने आगे भेजा । वे चले गये और उन्होंने येसु के रहने का प्रबंध करने के लिए समारियों के एक गाँव में प्रवेश किया। लोगों ने येसु का स्वागत करने से इनकार किया, क्योंकि वह येरुसालेम जा रहे थे। उनके शिष्य याकूब और योहन यह सुन कर बोल उठे, "प्रभु ! आप चाहें, तो हम यह कह दें कि आकाश से आग बरसे और उन्हें भस्म कर दे।" पर येसु ने मुड़ कर उन्हें डाँटा और वे दूसरी बस्ती चले गये।
प्रभु का सुसमाचार।
ईश्वर का अनुग्रह हमें असहिष्णुता, पूर्वाग्रह और हर उस चीज़ से मुक्त करता है जो हमें उसका अनुसरण करने से रोकती है। जब येसु ने समारिया के एक गाँव में प्रवेश करने की तैयारी की, तो उनका विरोध हुआ, जाहिर है क्योंकि समारी लोग मानते थे कि येसु उस दूसरे पक्ष से संबंधित थे, जिसके साथ उनका विवाद था। यहूदी और समारी सदियों से विभाजित थे। येसु के शिष्य क्रोधित थे और आक्रामक रूप से प्रतिक्रिया करना चाहते थे। बदले में, येसु ने उन्हें सहनशीलता की कमी के लिए फटकार लगाई। येसु ने अपने दुखभोग के लिए यरूशलेम की ओर मुंह किया था कि यहूदी, समारी और अन्य सभी जातियों का परमेश्वर के साथ मेल हो जाए और वे मसीह में एक हो जाएं। जब प्रभु हमें उसके पीछे चलने के लिए बुलाते हैं, तो वह हमें वह सब कुछ अलग रखने का अनुग्रह देते है जो हमें उसकी इच्छा पूरी करने से रोक सकता है। येसु के प्रति वफादारी बलिदान की मांग करती है, विशेष रूप से ईश्वर की इच्छा के लिए अपनी इच्छा का बलिदान।
✍ - फादर रोनाल्ड वाँन
God's grace sets us free from intolerance and prejudice and from everything that would keep us from following him. When Jesus made preparation to enter a Samaritan village he was met with opposition, obviously because the Samaritans perceived that Jesus belonged to the other party they were in dispute with. The Jews and Samaritans had been divided for centuries. Jesus' disciples were indignant and wanted to react aggressively. Jesus, in turn, rebukes them for their lack of toleration. Jesus had set his face toward Jerusalem in order to die that Jew, Samaritan and Gentile might be reconciled with God and be made one in Christ. When the Lord calls us to follow him he gives us the grace to put aside everything that might keep us from doing his will. Loyalty to Jesus demands sacrifice, especially the sacrifice of one's own will for the will of God.
✍ -Fr. Ronald Vaughan