वर्ष का अट्ठाईसवाँ सप्ताह, शुक्रवार - वर्ष 2

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📕पहला पाठ

एफेसियों के नाम सन्त पौलुस का पत्र 1:11-14

"हमने सब से पहले मसीह पर भरोसा रखा था । आप लोगों पर भी पवित्र आत्मा की मुहर लग गयी है।"

ईश्वर सब बातों में अपने मन की योजना पूरी करता है। उसके अनुसार उसने निर्धारित किया कि हम (यहूदी) मसीह द्वारा बुलाये जायें और हम लोगों के कारण उसकी महिमा की स्तुति हो। हम लोगों ने तो सब से पहले मसीह पर भरोसा रखा था। आप लोगों ने भी सत्य का वचन, अपनी मुक्ति का सुसमाचार सुन लेने के बाद मसीह में विश्वास किया है और आप पर उस पवित्र आत्मा की मुहर लग गयी है, जिसकी प्रतिज्ञा की गयी थी। वह हमारी विरासत का आश्वासन है और ईश्वर की प्रजा की मुक्ति की तैयारी, जिससे उसकी महिमा की स्तुति हो ।

प्रभु की वाणी।

📖भजन : स्तोत्र 32:1-2,4-5,12-13

अनुवाक्य : धन्य हैं वे लोग, जिन्हें प्रभु ने अपनी प्रजा बना लिया है।

1. हे धर्मियो ! प्रभु में आनन्द मनाओ ! स्तुतिगान करना भक्तों के लिए उचित है। वीणा बजाते हुए प्रभु का धन्यवाद करो, सारंगी पर उसका स्तुतिगान करो

2. प्रभु का वचन सच्चा है, उसके समस्त कार्य विश्वसनीय हैं। उसे धार्मिकता तथा न्याय प्रिय हैं। पृथ्वी उसके प्रेम से भरपूर है

3. धन्य हैं वे लोग, जिसका ईश्वर प्रभु है, जिन्हें प्रभु ने अपनी प्रजा बना लिया है। प्रभु आकाश के ऊपर से दृष्टि डालता और सभी मनुष्यों को देखता रहता है।

📒जयघोष

अल्लेलूया ! हे प्रभु ! तेरा प्रेम हम पर बना रहे । तुझ पर ही हमारा भरोसा है। अल्लेलूया !

📙सुसमाचार

सन्त लूकस के अनुसारं पवित्र सुसमाचार 12:1-7

"तुम्हारे सिर का बाल-बाल गिना हुआ है।"

उस समय भीड़ इतनी बढ़ गयी थी कि लोग एक दूसरे को कुचल रहे थे। येसु मुख्य रूप से अपने शिष्यों से कहने लगे, “फरीसियों के कपटरूपी खमीर से सावधान रहो। ऐसा कुछ भी गुप्त नहीं है, जो प्रकाश में नहीं लाया जायेगा और ऐसा कुछ भी छिपा हुआ नहीं है, जो प्रकट नहीं किया जायेगा। तुमने जो कुछ अँधेरे में कहा है, वह उजाले में सुना जायेगा और तुमने जो कुछ एकांत में फुसफुसा कर कहा है, वह पुकार-पुकार कर दुहराया जायेगा ।" "मैं तुम, अपने मित्रों से कहता हूँ जो लोग शरीर को मार डालते हैं, परन्तु उसके बाद और कुछ नहीं कर सकते, उनसे नहीं डरो। मैं तुम्हें बताता हूँ कि किस से डरना चाहिए उस से डरो, जिसका मारने के बाद नरक में डालने का अधिकार है। हाँ, मैं तुम से कहता हूँ, उसी से डरो।" "क्या दो पैसे में पाँच गौरैयाँ नहीं बिकतीं? फिर भी ईश्वर उन में से एक को भी नहीं भुलाता है। हाँ, तुम्हारे सिर का बाल-बाल गिना हुआ है। इसलिए नहीं डरो। तुम बहुतेरी गौरैयों से बढ़ कर हो ।”

प्रभु का सुसमाचार।


📚 मनन-चिंतन

आज के सुसमाचार में हम देखते हैं कि भीड़ की भीड़ प्रभु येसु की बातें सुनने के लिए उनके पास खिंची चली आती थी। इतने सारे लोग थे कि प्रभु येसु के पहुँचने के लिए एक-दूसरे पर चढ़े चले जाते थे। यह सुनकर बड़ा ताज्जुब होता है कि भीड़ को सम्बोधित करने की बजाय प्रभु येसु अपने शिष्यों को सम्बोधित करते हैं, और इन्हें फरीसियों के ख़मीर से सावधान रहने के लिए आगाह करते हैं। वह ख़मीर उनका ढोंग है। प्रभु येसु के समय में धार्मिक नेता लोगों को अपना शिष्य बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे। वे अपने शिष्यों की संख्या बढ़ाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते थे। कई बार वे धोखे से भी लोगों को मूर्ख बनाकर, अपने ढोंग के द्वारा उन्हें शिष्य बना लेते थे।

प्रभु येसु जब बहुत बड़ी भीड़ को अपने पीछे आते हुए देखते हैं, तो अपने शिष्यों को आगाह करते हैं की यदि तुम अपने जीवन में ईमानदार व पवित्र हो, तो लोग स्वयं ही तुम्हारी ओर खिंचे चले आएँगे। तुम्हें कोई ढोंग करने की ज़रूरत नहीं है। तुम्हारा पवित्र जीवन ना केवल लोगों को आकर्षित करेगा बल्कि ईश्वर भी तुम्हारी ओर आकर्षित होंगे। प्रभु येसु उन्हीं के मित्र हैं जो पवित्र और निष्कलंक जीवन जीते हैं। पवित्रता छुपी हुई नहीं रह सकती उसी तरह से एक ढोंगी की असलियत भी एक ना एक दिन बाहर आ ही जाती है। अगर हम अपनी असलियत छुपाते हैं और लोगों के सामने झूठी छवि प्रस्तुत करते हैं, उन्हें अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में फँसाने की कोशिश करते हैं, तो हो सकता है वे कुछ समय के लिए हमारे बहकावे में आ भी जाएँ, लेकिन अंततः सत्य बाहर आ ही जाएगा। आइए हम अपने जीवन के हर पल में पवित्र और ईमानदार बनें।

- फ़ादर जॉन्सन बी. मरिया (ग्वालियर धर्मप्रान्त)


📚 REFLECTION

In today's gospel we see thousands of people flocking to listen to Jesus. They were so many that they almost trampled on each other in order to get around to Jesus. Very strangely, Jesus instead of addressing the people he addresses the disciples, telling them to be aware of the leaven of the Pharisees which is hypocrisy. The time of Jesus was such that the religious leaders used lot of tactics to gain followers. They would go to any extent in order to gain followers and make disciples. For this even if they had to cheat people with their hypocrisy they would gladly do.

Jesus, seeing the great number of people coming to him, reminds his disciples that if we are sincere and holy in our way of life, people will automatically flock to us. Holiness attracts not only people but also God. Jesus is friend to those who are holy and blameless. Holiness cannot remain hidden, same is true with hypocrisy. If we hide our true self and present before the people a very pleasant image, and talk sweetly, they may come to us for a while, but ultimately truth will come out. Let us be sincere and holy in all our dealings.

-Fr. Johnson B. Maria (Gwalior Diocese)

📚 मनन-चिंतन -2

आज का पहला पाठ जो एफेसियों के नाम पत्र से लिया गया है, बताता है कि ईश्वर ने हमें अपने प्रिय लोगों के रूप में चुना है जिससे हम उन पर भरोसा कर सकें। ईश्वर ने हम लोग पर, जो उनका सुसमाचार का संदेश सुना है और विश्वास किया है, पवित्र आत्मा की मुहर लगाई है। इसका मतलब है कि उसने हमें अपना बना लिया है। यह बात आज का अनुवाक्य में प्रतिबिंबित है - "धन्य हैं वे लोग जिन्हें प्रभु ने अपनई प्रजा बना लिया हैं।"

आज का सुसमाचार में येसु इस महान दिव्य प्रेम के बारे में विस्तार से बताते है और कहते है कि ईश्वर का संरक्षण और दिव्या रक्षा हमेशा उनके लोगों के लिए उपलब्ध है। इतना ही नहीं, ईश्वर आकाश के पक्षियों का भी, जिन्हें हम तुच्छ समझते हैं, ध्यान रखते है। ईश्वर हम में से हर एक को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं; इतना ही नहीं वह हमारे सिर के बालों की संख्या भी जानता है! इतना गहरा ज्ञान और प्रेमपूर्ण संरक्षण केवल ईश्वर के लिए संभव है। इसलिए येसु कहते हैं, डरिये नहीं!

क्या आपको ईश्वर की प्यारी संतान होने का एहसास है? क्या आप अपने जीवन के बारे में चिंतित और परेशान हैं? याद रखें, प्रभु जो गौरैयों की भी परवाह करते हैं, वे ज़रूर आपकी अच्छी देखभाल करेंगे।

आज कलीसिया संत मार्ग्रेट मेरी अलाकोक का पर्व मनाती है, जिसे ईश्वर ने येसु के पवित्र हृदय के प्रेम को प्रकट किया था। येसु के पवित्र हृदय की श्रद्धापूर्वक वंदना करने वाले सभी लोगों को दी जाने वाली सुरक्षा ईश्वर का अनंत प्रेम और दया की एक और अभिव्यक्ति है। आज के पाठ और त्यौहार हमें याद दिलाती है कि हम अपने आपको आत्मविश्वास के साथ प्रभु को सौंपें।

- फादर जोली जोन (इन्दौर धर्मप्रांत)


📚 REFLECTION

The first reading from Ephesians tells us that God has chosen us to be his people who put their trust in him. We who have heard the message of the gospel and have believed it have been stamped with the seal of the Holy Spirit. That means, God has made us his own. This theme is echoed in the responsorial psalm which says, happy the people the Lord has chosen as his own.

Jesus elaborates upon this great divine love and says that God’s protection and providence is always available for his people. God takes care of even the insignificant sparrows. God knows each one of us personally as to know even the number of hair on our head! Such deep knowledge and loving care is possible only for God. Therefore, Jesus says, there is no need to be afraid.

Do you realize the great vocation that God has given you as God’s beloved child? Do you get anxious and worried about your life? Remember, the Lord who cares for even the sparrows, will take good care of you.

Today the Church celebrates the feast of St. Margaret Mary Alacoque, to whom God revealed the love of the Sacred Heart of Jesus. The protection offered to all those who venerate the Sacred Heart of Jesus is another expression of this divine love and providence. Entrust yourself to the Lord. Today’s readings and the feast remind us to entrust ourselves confidently to the Lord.

-Fr. Jolly John (Indore Diocese)