1प्रभु! मेरे हृदय में अहंकार नहीं है। मैं महत्वाकांक्षी नहीं हूँ। मैं बड़ी-बड़ी योजनाओं के फेर में नहीं पड़ा और मैंने ऐसे कार्यों की कल्पना नहीं की, जो मेरी शक्ति से परे हैं। 2माँ की गोद में सोये हुए दूध-छुड़ाये बच्चे के सदृश मेरी आत्मा शान्त और मौन है। ठीक उसी बच्चे की तरह मेरी आत्मा मुझ में है। 3इस्राएल! प्रभु पर भरोसा रखो, अभी और अनन्त काल तक!