1तब एलियाह अग्नि की तरह प्रकट हुए। उनकी वाणी धधकती मशाल के सदृश थी। 2उन्होंने उनके देश में अकाल भेजा और अपने धर्मोत्साह में उनकी संख्या घटायी। 3उन्होंने प्रभु के वचन से आकाश के द्वार बन्द किये और तीन बार आकाश से अग्नि गिरायी। 4एलियाह! आप अपने चमत्कारों के कारण कितने महान् है! आपके सदृश होने का दावा कौन कर सकता है! 5आपने सर्वोच्च प्रभु की आज्ञा से एक मनुष्य को मृत्यु और अधोलोक से वापस बुलाया। 6आपने राजाओें का सर्वनाश किया, प्रतिष्टित लोगों केा गिरा दिया और सहज ही उनका बल तोड़ दिया। 7आपने सीनई पर्वत पर दोषारोपण और होरेब पर्वत पर दण्डाज्ञा सुनी। 8आपने प्रतिशोध करने वाले राजाओं का और अपने उत्तराधिकारियों के रूप में नबियों का अभिषेक किया। 9आप अग्नि की आँधी में अग्निमय अश्वों के रथ में आरोहित कर लिये गये। 10आपके विषय में लिखा है, कि आप निर्धारित समय पर चेतावनी देने आयेंगे, जिससे ईश्वरीय प्रकोप भड़कने से पहले ही आप उसे शान्त करें, पिता और पुत्र का मेल करायें और इस्राएल के वंशों का पुनरुद्धार करें। 11धन्य हैं वे, जिन्होंने आपके दर्शन किये, जो आपके प्रेम से सम्मानित हुए! 12हमें तो जीवन मिला है, किन्तु मृत्यु के बाद हमें आपके सदृश नाम नहीं मिलेगा। 13जब एलियाह बवण्डर में ओझल हो गये, तो एलीषा को उनकी आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त हुई। वे अपने जीवनकाल में किसी भी शासक से नहीं डरते थे। कोई भी मनुष्य उन्हें अपने वश में नहीं कर सका। 14कोई भी कार्य उनकी शक्ति के परे नहीं था और मृत्यु के बाद भी उनके शरीर में नबी का सामर्थ्य विद्यमान था। 15उन्होंने अपने जीवनकाल में चमत्कार और मृत्यु के बाद भी अपूर्व कार्य कर दिखाये। 16यह सब होते हुए भी लोगों ने पश्चात्तप नहीं किया और पाप करना नहीं छोड़ा। इसलिए वे अपने देश से निर्वासित किये गये और सारी पृथ्वी पर बिखेरे गये। 17बहुत कम लोग बच गये और दाऊद के घराने का एक शासक शेष रहा। 18उन में कुछ लोगों ने वही किया, जो प्रभु के प्रिय है, किन्तु अन्य लोग पाप करते रहे। 19हिजकीया ने अपने नगर को किलाबन्द किया और वे उसके भीतर पानी लाये। उन्होंने लोहे के औज़ारों से चट्टान खुदवा कर जलाशय बनवाये। 20उनके राज्यकाल में सनहेरीब ने आक्रमण किया। उसने अपने प्रधान रसद-प्रबन्धक को भेजा, जिसने सियोन पर हाथ उठाया और अपने घमण्ड में ईश्वर की निन्दा की। 21तब उनका हृदय और उनके हाथ काँपने लगे और उन्हें प्रसव-पीड़िता की-सी वेदना होने लगी; 22उन्होंने हाथ पसार कर दयालु प्रभु से प्रार्थना की और परमपावन प्रभु ने शीघ्र ही उनकी सुनी। 23उसने उनके पापों को याद नहीं किया। उसने उन्हें शत्रुओें के हाथ नही पड़ने दिया और उन्हें इसायाह द्वारा छुड़ाया। 24उसने अस्सूरियों का शिविर उजाड़ा और अपने दूतों द्वारा उनका विनाश किया। 25हिज़कीया ने वही किया, जो प्रभु को प्रिय है और वे अपने पिता दाऊद के मार्ग के प्रति ईमानदार रहे, जिनका निर्देश नबी इसायाह करते थे जो एक महान् और विश्वसनीय दृष्टा प्रमाणित हुए। 26इसायाह के दिनों में सूर्य के पीछे हटने पर राजा का जीवन बढ़ा दिया गया। 27इसायाह ने दिव्य शक्ति से प्रेरित हो कर अन्तिम दिनों के दृष्यों का दर्शन किया, उन्होंने सियोन में शोक मनाने वालों को सान्त्वना दी, अनन्त काल तक का भविष्य घोषित किया 28और घटित होने के पूर्व गुप्त बातों को प्रकट किया।