📖 - राजाओं का दुसरा ग्रन्थ

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अध्याय 14

1) इस्राएल के राजा यहोआहाज़ के पुत्र योआश के दूसरे वर्ष योआश का पुत्र अमस्या यूदा का राजा बना।

2) जब वह शासन करने लगा, तो वह पच्चीस वर्ष का था। उसने येरूसालेम में उनतीस वर्ष तक शासन किया। उसकी माता का नाम यहोअद्दान था। वह येरूसालेम की थी।

3) उसने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में उचित है। फिर भी उसने अपने पूर्वज दाऊद का पूरा अनुसरण नहीं किया। उसने भी वैसे ही कार्य किये, जैसे उसके पिता योआश ने किये थे,

4) किन्तु पहाड़ी पूजास्थाल नहीं हटाये गये। लोग वहाँ बलिदान चढ़ाते और धूप देते थे।

5) जब राजसत्ता अमस्या के हाथ में सुदृढ हो गयी, तो उसने उन सेवकों को प्राणदण्ड दिया, जिन्होंने उसके पिता राजा का वध किया था।

6) परन्तु उसने हत्यारों के पुत्रों का वध नहीं किया, जैसा कि मूसा की संहिता के ग्रन्थ में लिखा है, जहाँ प्रभु ने आदेश दिया- न तो पिता को अपने किसी बच्चे के पाप के लिए प्राणदण्ड दिया जाये और न बच्चे को अपने पिता के पाप के लिए। हर व्यक्ति को अपने दोष के लिए प्राणदण्ड दिया जायेगा।

7) अमस्या ने लवण-घाटी में दस हज़ार एदोमियों को पराजित किया और धावा बोल कर सेला पर अधिकार कर लिया। उसने उसका नाम योकतएल रखा। आज तक उसका वही नाम है।

8) उस समय अमस्या ने यहोआहाज़ के पुत्र और येहू के पौत्र, इस्राएल के राजा योआश के यहाँ दूत भेज कर उस से कहलवाया, "आइए, हम एक दूसरे का मुकाबला करें"।

9) इस पर इस्राएल के राजा योआश ने यूदा के राजा अमस्या को यह उत्तर भेजा, "लेबानोन के ऊँटकटारे ने लेबानोन के देवदार को यह सन्देश भेजा, ‘तुम अपनी बेटी का विवाह मेरे बेटे से करो’ ; किन्तु लेबानोन के एक जंगली पशु ने ऊँटकटारे को पैरों से रौंद डाला।

10) तुमने अवश्य एदोमियों को पराजित किया; इस कारण घमण्डी हो गये हो। तुम अपनी विजय पर गौरव करो, किन्तु अपने घर में ही बैठे रहो। तुम अपने लिए विपत्ति क्यों मोल ले रहे हो? इस से तो तुम्हारा और तुम्हारे साथ यूदा का भी पतन हो जायेगा।"

11) अमस्या ने एक न सुनी। तब इस्राएल का राजा योआश आक्रमण कर बैठा। उसका और यूदा के राजा अमस्या का यूदा के बेत-शेमेश के पास आमना-सामना हुआ।

12) यूदा इस्राएल द्वारा इस तरह पराजित किया गया कि यूदा के लोग अपने-अपने घर भाग निकले।

13) इस्राएल के राजा योआश ने बेत-शेमेश के पास अहज़्या के पौत्र और योआश के पुत्र यूदा के राजा अमस्या को बन्दी बना लिया। उसने येरूसालेम जा कर एफ्ऱईम के फाटक से ले कर कोण-फाटक तक येरूसालेम की चार सौ हाथ लम्बी चार-दीवारी गिरा दी।

14) वह प्रभु के मन्दिर तथा राजभवन के कोषागार का सब सोना, चाँदी और अन्य सब सामान उठा ले गया और बन्धक के रूप में व्यक्तियों को भी ले गया। इसके बाद वह समारिया लौट गया।

15) योआश का शेष इतिहास, उसके कार्य कलाप, उसकी विजयों और यूदा के राजा अमस्या से उसके युद्ध का वर्णन इस्राएल के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है।

16) योआश अपने पितरों से जा मिला और इस्राएल के राजाओं के पास समारिया में दफ़नाया गया। उसका पुत्र यरोबआम उसकी जगह राजा बना।

17) इस्राएल के राजा यहोआहाज़ के पुत्र योआश की मृत्यु के बाद योआश का पुत्र यूदा का राजा अमस्या पन्द्रह वर्ष और जीवित रहा।

18) अमस्या का शेष इतिहास यूदा के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है।

19) जब येरूसालेम में उसके विरुद्ध षड्यन्त्र रचा गया, तब वह लाकीश भाग गया। लोगों ने लाकीश तक उसका पीछा किया और वहाँ उसका वध किया।

20) वह घोड़ों पर रख कर येरूसालेम लाया गया और अपने पुरखों के पास येरूसालेम के दाऊदनगर में दफ़नाया गया।

21) इसके बाद यूदा के सब लोगों ने अज़र्या को, जो उस समय सोलह वर्ष का था, उसके पिता अमस्या की जगह राजा बनाया।

22) अमस्या के मरने के बाद उसने एलत को बसाया, जिसे उसने यूदा के लिए पुनः प्राप्त किया था।

23) यूदा के राजा योआश के पुत्र अमस्या के पन्द्रहवें वर्ष योआश का पुत्र यरोबआम इस्राएल का राजा बना और समारिया में शासन करने लगा। उसने इकतालीस वर्ष तक शासन किया।

24) उसने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में बुरा है। नबाट के पुत्र यरोबआम ने इस्राएलियों से जो पाप करवाये थे, उसने उन में एक भी नहीं छोड़ा।

25) यरोबआम ने लेबो-हमात से ले कर अराबा के समुद्र तक इस्राएल के सीमान्त फिर अपने अधिकार में कर लिये, जैसा कि प्रभु इस्राएल के ईश्वर ने गत-हेफ़ेरवासी अमित्तय के पुत्र योनस द्वारा कहा था।

26) प्रभु इस्राएलियों की घोर विपत्ति देखी थी- चाहे वे स्वतन्त्र हों या दास। उनका कोई सहायक नहीं था।

27) प्रभु ने यह नहीं कहा था कि वह पृथ्वी पर से इस्राएल का नाम मिटा देगा, इसलिए उसने योआश के पुत्र यरोबआम द्वारा इसका उद्धार किया।

28) यरोबआम का शेष इतिहास, उसके कार्यकलाप, उसकी विजयों का वर्णन और किस प्रकार उसने दमिश्क और हमात इस्राएल में मिला लिये, जिन पर कभी यूदा का अधिकार था, यह इस्राएल के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है।

29) यरोबआम अपने पितरों, इस्राएल के राजाओं से जा मिला और उसका पुत्र ज़कर्या उसकी जगह राजा बना।



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