📖 - राजाओं का दुसरा ग्रन्थ

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अध्याय 16

1) रमल्या के पुत्र पेकह के सत्रहवें वर्ष योताम का पुत्र यूदा का राजा आहाज़ शासन करने लगा।

2) जब आहाज़ राजा बना, तो उसकी अवस्था बीस वर्ष थी। उसने येरूसालेम में सोलह वर्ष तक शासन किया। उसने अपने पूर्वज दाऊद की तरह वैसा नहीं किया, जो प्रभु की दृष्टि में उचित है,

3) बल्कि वह इस्रएल के राजाओं के मार्ग पर चला। प्रभु ने जो राष्ट्र इस्राएलियों के सामने से भगा दिये थे, उसने उनके घृणित कार्यों के अनुसार अपने पुत्र की होम-बलि चढ़यी।

4) वह पहाड़ी स्थानों में, टीलों पर और प्रत्येक छायादार वृक्ष के नीचे बलिदान चढ़ाता और धूप देता था।

5) अराम का राजा रसीन और रमल्या का पुत्र इस्राएल का राजा पेकह, दोनों येरूसालेम पर आक्रमण करने आये। उन्होंने आहाज़ को घेर लिया, लेकिन वे उसे पराजित नहीं कर सके।

6) उस समय अराम के राजा रसीन ने एलत से यूदा के लोगों को निर्वासित किया और एलत को फिर अराम में मिला लिया। एदोमी आ कर वहाँ बस गये और आज तक वहाँ निवास करते हैं।

7) आहाज़ ने दूतों द्वारा अस्सूर के राजा तिगलत-पिलएसेर को यह सन्देश भेजा, “मैं आपका दास हूँ, आपका पुत्र हूँ। आइए और मुझ पर आक्रमण करने वाले अराम और इस्राएल के राजाओं के चंगुल से मुझे छुड़ाइए।“

8) आहाज़ ने प्रभु के मन्दिर और राजमहल के कोषागारों का चाँदी-सोना उपहारस्वरूप अस्सूर के राजा के पास भेजा।

9) अस्सूर के राजा ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। अस्सूर का राजा दमिश्क पर आक्रमण करने चल पड़ा। उसने उस पर अधिकार कर लिया और उसके निवासियों को बन्दी बना कर कीर ले गया। उसने रसीन का वध किया।

10) जब राजा आहाज़ अस्सूर के राजा तिगलत-पिलएसेर से भेंट करने दमिष्क आया, तब उसने दमिष्क की वेदी देखी। राजा आहाज़ ने याजक ऊरीया के पास उस वेदी का प्रतिरूप और उसका संागोपांग वर्णन भेजा।

11) दमिष्क से राजा आहाज़ के भेजे हुए सांगोपांग वर्णन के अनुसार याजक ऊरीया ने एक वेदी बनवायी। दमिष्क से राजा आहाज़ के लौटने से पहले ही से याजक ऊरीया ने उसे तैयार करवा लिया।

12) दमिष्क से लौट आने पर राजा वेदी को देखने गया। राजा ने उसके पास आ कर उस पर चढ़ावा अर्पित किया।

13) उसने उस पर होम-बलि और अन्न-बलि चढ़ायी, अर्घ अर्पित किया और शान्ति-बलि का रक्त वेदी पर छिड़का।

14) उसने काँसे की वेदी को हटवाया, जो प्रभु के सामने नयी वेदी और प्रभु के मन्दिर के बीच में थी और उसे नयी वेदी के उत्तर में रखवाया।

15) राजा आहाज़ ने याजक ऊरीया को यह आदेश दिया, "आप प्रातःकाल की होम-बलि और सन्ध्या की अन्न-बलि, राजा की होम-बलि और अन्न-बलि, देश के सब लोगों की होम-बलि, अन्न-बलि और अर्घ बड़ी वेदी पर चढ़ायेंगे और उस पर होम-बलियों और चढ़ावों का रक्त छिड़केंग

16) याजक ऊरीया ने राजा आहाज़ के आदेश का पालन किया।

17) राजा आहाज़ ने ठेलों के पटरे और चिलमचियाँ हटवायीं। उसने काँसे के बैल हौज़ के नीचे से निकलवा कर हौज़ को पत्थर के चबतूरे पर रखवाया।

18) उसने अस्सूर के राजा के कारण मन्दिर के भीतर बनाया हुआ विश्राम-दिवस का चँदोवा और प्रभु के मन्दिर के बाहर का राजकीय प्रवेश-मार्ग हटवाया।

19) आहाज़ का शेष इतिहास और उसका कार्यकलाप यूदा के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है।

20) आहाज़ अपने पूर्वजों से जा मिला और उनके पास दाऊदनगर में दफ़नाया गया। उसका पुत्र हिजकीया उसकी जगह राजा बना।



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