📖 - होशेआ का ग्रन्थ (Hosea)

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अध्याय 09

1) इस्राएल! खुशियाँ मत मनाओ; अन्य राष्ट्रों की तरह आनन्दित मत दो, क्योंकि तुमने अपने ईश्वर को त्याग कर वेश्यावृत्ति की है और तुम खलिहान-खलि-हान में वेश्या की कमाई भोग चुके हो।

2) उन को न खलिहान न कोल्हू पुष्ट करेगा और न ताजी अंगूरी उन को तृप्त करेगी।

3) वे अब प्रभु-ईश्वर की भूमि में नही निवास करेंगे; एफ्राईम को मिस्र में लौट जाना पडेगा और अस्सूर में उन्हें अशुद्ध भोजन खाना पडेगा।

4) वे प्रभु-ईश्वर के सामने अंगूरी का तर्पण नहीं करेंगे, न उस को बलि चढायेंगे। ऐसी बलि मातम मनाने वालों की रोटी की तरह अशुद्ध होगी और उसे खाने वाले भी अशुद्ध होंगे। ऐसी रोटी पेट भरने के काम तो आयेगी, किन्तु वह प्रभु के मन्दिर में चढाने योग्य नहीं होगी।

5) तब तुम पर्वोंत्सव के दिन क्या करोगे और यात्रा-पर्व कैसे मनाओगे?

6) वे अवश्य ही उजाड से भाग गये होंगे, वे मिस्र की शरण गये होंगे और मेमफिस ही उनका कब्रिस्थान होगा। कितनी बहुमूल्य थी उनकी चाँदी- बिच्छू पौधे उसे ढक देंगे और उनके तुम्बुओं में झाड-झंखाड उग आयेंगे।

7) दण्ड के दिन आ रहे हैं; प्रतिकार के दिन आ गये हैं। इस्राएल की यह शिकायतः ’नबी मूर्ख है; इस पागल के सिर पर क्या सवार है?’ हाँ तो, किन्तु इसका कारण तुम्हारे भीषण अपराध और घोर विश्वासघात ही है।

8) नबी के तम्बू के सामने एफ्राईम घात लगाये रहता है और उसके सभी मार्गों पर फन्दे बिछा चुका है; ईश्वर के मन्दिर में भी शत्रु उसका विरोध करते हैं।

9) ये व्यक्ति जैसे गिबआ के दिनों में, वैसे ही नष्ट, भ्रष्ट हो गये हैं। प्रभु-ईश्वर उनके अपराध स्मरण करेगा और उनके पापों का दण्ड देगा।

10) मुझे इस्राएल इस प्रकार मिला, जैसे उजाड भूमि में अंगूर। मैंने तुम्हारे पूर्वजों को इस प्रकार देखा, जैसे कोई ऋतु के शुरू में नये अंजीर के फल पाता है। किन्तु जब वे बाल-पओर पहुँचे, तब वे घृणास्पद देवता के सामने आत्मसमर्पण करेने लगे और देवता के समान स्वयं घृणित बन गये।

11) एफ्राईम का वैभाव फुर्र से उड जायेगा; न जन्म, न गर्भ, न ही गर्भधारण होगा।

12) यदि वे बच्चों को पालन-पोषण करेंगे भी, तो मैं उन्हें सन्तानहीन बना कर निर्वंश बना दूँगा। जब मैं उन से विमुख हो जाऊँगा, तो उनके दुर्दिन आयेंगे।

13) सिंह के शावक केवल शिकार बनने के लिए अपनी माँद से बाहर निकलते हैं, वैसे ही एफ्राईम भी वध के लिए अपने बच्चों का पालन कर रहा है।

14) प्रभु-ईश्वर! भिक्षा दान! किन्तु तू क्या देगा उन्हें? गर्भपात करने वाले गर्भाशय और सूखे स्तन?

15) उनके प्रत्येक दुष्कर्म का गिलगाल से ही प्रारंभ हुआ; वही उन से मेरी घृणा भी शुरू हो गयी। उनके दुष्कर्मों के कारण मैं उन्हें अपने घर से भगा दूँगा। मैं उन से प्रम और नहीं करूँगा, क्योंकि उनके सभी नेता विद्रोही हैं।

16) एफ्रईम का वृक्ष कट गया, उसकी जडे सूख गयी हैं, वे फल नहीं दे सकेंगे। यदि वे बच्चों को जन्म भी देंगे, तो मैं उनके लाडले बच्चों को मार डालूँगा।

17) मेरा ईश्वर उन्हें त्याग देगा, क्योंकि उन्होंने उसकी नहीं सुनी; अतः राष्ट्रों में भटकते रहना पडेगा।



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