📖 - प्रवक्ता-ग्रन्थ (Ecclesiasticus)

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अध्याय 36

1) सर्वेश्वर प्रभु! हम पर दया कर, हमें अपनी करुणा की ज्योति दिखा।

2) सब राष्ट्रों में अपने प्रति श्रद्धा उत्पन्न कर, जिससे वे जान जायें कि तेरे सिवा और कोई ईश्वर नहीं और तेरे महान् कार्यों का बखान करें।

3) अन्य राष्ट्रों पर अपना हाथ उठा, जिससे वे तेरा सामर्थ्य देखें।

4) जिस तरह तूने उनके सामने हम पर अपनी पवित्रता को प्रदर्शित किया, उसी तरह उन में अपनी महिमा को हमारे सामने प्रदर्शित कर।

5) प्रभु! वे तुझे उसी प्रकार जान जायें, जिस प्रकार हम जान गये कि तेरे सिवा और कोई ईश्वर नहीं।

6) नये चिह्न प्रकट कर और नये चमत्कार दिखा।

7) अपना हाथ और बाहुबल महिमान्वित कर।

8) अपना क्रोध जगा, अपना प्रकोप प्रदर्शित कर,

9) विरोधी को मिटा और शत्रु का विनाश कर।

10) विलम्ब न कर, निश्चित समय याद कर, जिससे लोग तेरे महान् कार्यों का बखान करें।

11) जो भागना चाहे, वह आग में भस्म हो जाये और जो लोग तेरी प्रजा पर अत्याचार करते हैं, उनका सर्वनाश हो।

12) विरोधी शासकों का सिर तोड़ डाला, जो कहते हैं, "हमारे बराबर कोई नहीं"।

13) समस्त याकूबवंशियों को एकत्र कर, उन्हें पहले की तरह उनकी विरासत लौटा।

14) प्रभु! उस प्रजा पर दया कर, जो तेरी कहलाती है, इस्राएल पर, जिसे तूने अपना पहलौठा माना है।

15) अपने पवित्र नगर, अपने निवासस्थान येरूसालेम पर दया कर।

16) अपने स्तुतिगान से सियोन को भर दे और अपनी महिमा से अपने मन्दिर को।

17) अपनी पहली कृति का समर्थन कर और अपने नाम पर घोषित भविष्य वाणियाँ पूरी कर।

18) जो तुझ पर भरोसा रखते हैं, उन्हें पुरस्कार दे और अपने नबियों की वाणी सत्य प्रमाणित कर। अपने सेवकों की प्रार्थना सुन।

19) अपनी प्रजा पर दया कर, हमें धर्ममार्ग पर ले चल और पृथ्वी भर के सभी लोग यह स्वीकार करें कि तू ही प्रभु और शाश्वत ईश्वर है।

20) मुँह सब प्रकार का भोजन निगलता है, किन्तु एक भोजन दूसरे से अच्छा है।

21) जिस प्रकार तालू चख कर शिकार का मांस पहचान लेता है, उसी प्रकार समझदार हृदय झूठ जान जाता है।

22) कपटपूर्ण हृदय दुःख पहुँचाता है, किन्तु अनुभवी व्यक्ति उसे बदला चुकाता है।

23) प्रत्येक मनुष्य अपने लिए पत्नी ग्रहण करता है, किन्तु एक कन्या दूसरी से सुन्दर है।

24) स्त्री का सौन्दर्य अपने पति का हृदय आनन्दित करता और उसकी सभी अभिलाषाओें को पूरा करता है।

25) इसके सिवा यदि वह प्रेमपूर्ण और मधुर बातें करती है, तो वह दूसरे मनुष्यों से कहीं सौभाग्यशाली है।

26) जो पत्नी प्राप्त करता है, उसे खजाना मिलता है। वह उसके लिए योग्य साथी है और विश्वस्त सहारा।

27) जहाँ बाड़ नहीं, वहाँ दाखबारी उजड़ती है और जिस मनुष्य की पत्नी नहीं, वह उदास भटकता रहता है।

28) जो सशस्त्र डाकू नगर-नगर घूमता है, उस पर कौन विश्वास करेगा? यह उस व्यक्ति की दशा है, जिसके घर नहीं और जो जहाँ रात हो जाती है, वहीं रह जाता है।



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